लोग भौंक रहे हैं, उन पर क्या कहें: आसाराम

मंगलवार, 8 जनवरी । धार्मिक गुरु आसाराम बापू ने अपने विवादास्पद बयान पर हो रही आलोचनाओं का मज़ाक उड़ाते हुए कहा है कि लोग ‘कुत्तों की तरह भौंक’रहे हैं.

आसाराम ने अपने प्रवचन के दौरान कहा, ‘‘कल मुझसे किसी ने पूछा कि मेरी बीवी मुझसे लड़ती है तो मैंने कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती. उस टिप्पणी पर कुत्तों की तरह लोग भौंक रहे हैं. मैं तो हाथी हूं उन पर टिप्पणी नहीं करुंगा.’’

असल में आसाराम बापू ने अपने प्रवचन में दिल्ली गैंग रेप का पूरा ज़िक्र करते हुए कहा था कि रेप पीड़ित भी ज़िम्मेदार है. उन्होंने कहा था कि रेप पीड़िता अगर रेप करने वालों को भइया कह के राखी बांधती तो रेप नहीं होता.

इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक दलों समेत आम और खा़स लोगों ने आसाराम की कड़ी आलोचना की थी.

जब मीडिया ने आसाराम बापू से इस बारे में पूछा तो उनकी प्रतिक्रिया नाराज़गी भरी थी. उनका कहना था, ‘‘सब भौंक रहे हैं. इस पर क्या कहना. मैंने जो कहा है वो कहा है.’’
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले की पीड़िता को लेकर जिस तरह से धार्मिक गुरु आसाराम बापू ने टिप्पणी की है, उस पर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

आम से लेकर ख़ास लोगों तक ने आसाराम बापू की आलोचना की है. उनका ये बयान सोमवार को सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा था, “केवल पांच-छह लोग ही अपराधी नहीं हैं. बलात्कार की शिकार हुई बिटिया भी उतनी ही दोषी है जितने बलात्कारी. वह अपराधियों को भाई कहकर पुकार सकती थी. इससे उसकी इज्जत और जान भी बच सकती थी. क्या ताली एक हाथ से बज सकती है, मुझे तो ऐसा नहीं लगता.”

युवा लेखक चेतन भगत @chetan_bhagatने आसाराम बापू की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया वक्त करते हुए ट्विट किया है, “प्रिय आसाराम जी, आप मेरे भाई जैसे हैं. क्या आप हमें ज्ञान देना बंद करेंगे. भाई, प्लीज़ प्लीज़”

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी [email protected] ट्विट किया है, “केवल विकृत मानसिकता वाले लोग ही बलात्कार पीड़िता को दोषी मान सकते हैं.”

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर भी लोग आसाराम की आलोचना कर रहे हैं. सागर वासुदेव ने अपने फेसबुक पर लिखा है, “क्यों न इन बाबाओं को सज़ा दी जाए जो ये कहते हैं कि ताली एक हाथ से नहीं बजती है. रेप के मामलों में भी.”
आसाराम बापू नहीं निराशाराम बापू

वहीं गीतकार और रेडियो प्रजेंटर नीलेश मिश्रा ने अपने फेसबुक पर लिखा है, “आसाराम बापू सफेद लबादे में हनी सिंह ही हैं.”

वहीं एक अन्य युवा अंकुर त्यागी [email protected] ने थोड़े तल्ख़ अंदाज़ में ट्विट करते हुए लिखा है, “प्रिय बापू जी, कुत्ते भाई-बहन की रिश्तों का आदर नहीं करते. मैं ऐसा कहते हुए शर्मिंदा हूं लेकिन आप बुद्धिमान बनिए और ये जानिए की मौन सबसे बेशकीमती होता है.”

वहीं कुणाल चौधरी @kunal_pistons ने तो बापू को अपना नाम बदलने की सलाह दे डाली है. उन्होंने ट्विट किया है, “आसाराम बापू का नाम बदलकर बेशर्म भौंपू कर देना चाहिए.”

वहीं महिला पत्रकार अनुराधा मंडल ने फेसबुक के अपने स्टेट्स पर लिखा है, “संत का अंत तो पहले हो चुका है. आज भी उसे संत कहा जा रहा है.”

वहीं रति हेगड़े @ratihegdeने ट्विट किया है, “हमें आसाराम बापू को निराशाराम बापू का संबोधन देना चाहिए, उनसे कोई उम्मीद नहीं हैं.”

वैसे इन आलोचनाओं में एक आलोचना दिलचस्प है. नीरज [email protected] ने आसाराम बापू से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने की अपील कुछ इस तरह से की है- य आसाराम बापू, भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ सालों से बलात्कार हो रहा है. आप हमारा नेतृत्व कीजिए और मनमोहन सिंह के पास चलिए और कहिए, “भईया, ये बलात्कार बंद कर दो.”

आसाराम बापू के बयानों की सभी राजनीतिक दलों ने भी निंदा की है ।बीबीसी

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