लोडसेडिंग मंत्रालय ! हमने अंधेरो से दोस्ती कर ली है : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा.काठमांडू , ४ जनवरी

इस देश की जनता को अब उजाला देखने और महसूस करने के लिए बहुत लंबा इंतजार करना पडेगा शायद । क्योंकि उर्जा मन्त्रालय का काम अब लोडसेडिंग मंत्रालय कर रहा है । हपते में ८६ और एक दिन में लगभग १३ घण्टों का उपहार जनता को दे कर यह सरकार देश को आधा दिन और आधी रात बना रहा है । दूसरे देशों के लोग शेयर के भाव बढ़ने का समाचार अखवार में पढ़ते हैं और एक हम अति भाग्यशाली देश की जनता अखवार मे लोडसेडिंग के दिन दूनी और रात चौगूनी बढ़ने का समाचार पढ़ते और दूसरों को भी शान से बताते हैं ।



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हमने अंधेरो से दोस्ती कर ली है । क्योंकि हमारे देश के सरकार ने इस अंधेरो को ही हमलोगो का भाग्यविधाता बना दिया है । इसीलिए जलश्रोत में विश्व का दूसरा धनी देश नेपाल अंधेरा उत्पादन करनें में भी विश्व में सबसे धनी देश है । दुख की बात यह है कि इस अंधेरे को हमलोग अन्य देशों मे निर्यात नहीं कर सकते । इस अंधेरे को इसी देश मे खपाना है और सब को मिल, बांट कर खाना है । इस देश के हाईड्रो पावर से बिजली नहीं अंधेरा और लोडसेडिंग उत्पादन होता है ।

जब अंधेरा ही हमलोगों के भाग्य में है और पहनना और बिछाना है तो फिर उर्जा मंत्रालय कि जरुरत क्यों है ? क्या वह जनता को मोमबत्ती बांटने के लिए है । जब दिन में १२ घंटा लोडसेडिंग होता है तो उस हिसाब से इस देश में ६ महीना अंधेरा होता है । तो क्यों इस निकम्मे उर्जा मंत्रालय से हमलोग बिजल ीऔर उजाला मिलने की उम्मीद करें ? यह तो हमारे कर के उठे हुए पैसे से ही चलता है और हमलोगों को उस के बदले अंधेरा देता है । तब इस मंत्रालय को हटा कर इस की जगह पर लोडसेडिगं मंत्रालय बनाना चाहिए । कम से कम कितने घंटे लाइन जाएगी की जगह कितने मिनट के लिए बिजली आएगी यह तो बताएगा ?

लोडसेडिंग मंत्रालय में किसी को कुछ नहीं करना पडेÞगा । जब कुछ काम नहीं करना होगा तो कमीशन भी खाने को नहीं मिलेगा । क्योंकि इस मंत्रालय में तो चौबीसों घंटे अंधेरा रहेगा और इस अंधेरे मे कौन आएगा और कौन जाएगा ? न कोई योजना बनाने की जरुरत है न उसको अमल में लाने की, बस सोते रहो और दूसरों को भी दिन में ही सुलाते रहो । सरकार कितने शान से कहती है कि लोडसेडिगं हपm्ते मे इतने घंटे तक बढ़ाया जाएगा और जनता सरकार का यह नियम व आदेश हाथ जोड़ कर शिरोधार्य कर लेती है । जनता कर भी देती है, सरकारी आज्ञा का पालन करती है और मोमबत्ती भी खरीदती है । है न कितनी उदार और कर्तव्यपरायण जनता, जो सरकार को नहीं कोसती, अधेंरे और अपनी किस्मत को कोसती है । ऐसी जनता किसी और देश में नहीं होगी ।

हमें गर्व करना चाहिए अपने आप पर और यहां की जनता पर । क्योंकि हमे सहनशील होना सिखाया गया है । इसी सहनशीलता के चलते हम पहले नेताओं को वोट देते हैं । उस के बाद कर के रूप में इन्हें ही नोट भी देते है । पर यह सरकार हमे इस के बदले में देती है अंधेरे की चोट । तब भी हम गर्व करते हैं अपने देश और नेताओं पर । आज ही उर्जा मंत्री ने आगामी फागुन महीने से लोडसेडिंग घटने की जानकारी दी है । और इस को मीडिया इस तरह प्रचार कर रही है जैसे कोई लाटरी निकल आई हो । मीडिया और सोशल साइटस पर इस समाचार को मिठाई जैसे बांटा जा रहा है ।

कई साल पहले अमरीका के न्यूयोर्क शहर मे लिफ्ट में १५ सेकेडं के लिए बिजली गुलहो गई थी । वहां पर इतनी छोटी सी बात पर अफरा तफरी मच गई थी । तब से आज तक वहां पर एक बार भी बिजली नहीं गई । पर एक हमलोग हैं जिनके यहां १५ मिनट के लिए भी बिजली आ जाए तो खुशी में बौखला जाते है । अमरीकियों को तो लोडसेडिगं का अर्थ भी मालूम नहीं होगा शायद, पर हमारे देश मे नवजात बच्चे से ले कर शमसान घाट जाते वृद्ध व्यक्ति तक को लोडसेडिगं के बारे में मालूम है । क्योंकि इन लोगो नें लोडसेडिंग को भोगा है और इसी के साथ ही पले बढे हैं ।

नेपाल में दो पीढ़ियाँ निवास करती हैं । एक लोडसेडिगं शुरु होने से पहले जब यह देश बिजली से जगमग करता था की पीढ़ी और दूसरी लोडसेडिंग के बाद और लोडसेडिगं के साथ पैदा हुई पीढ़ी । आश्चर्य की बात है कि लोडसेडिगं को इतना सहने के बाद भी किसी ने इस के बारे में रिसर्च और पीएचडी नहीं किया । न लोडसेडिगं साहित्य रचे गए न इसके बारें में कोई कविता ही किसी ने लिखी । मतलब यह कि देश में इतने सालों से लोडसेडिगं व्याप्त है पर कोई इस के महत्व को नहीं जान पाया । शायद इसी लिए हमारी प्यारी राजदुलारी सरकार लोडसेडिगं हमे वेतन जैसा देती है उस पर वोनस और अन्य भत्ता बढ़ाती रहती है ।

हमलोगों के लिए खाने, पीने, पहनने, ओढ़ने जैसा ही महत्वपूर्ण है लोडसेडिंग । इस लोडसेडिंग के बिना हमारी सुबह और शाम नहीं होती । जब यह आता है हम चौकन्ने हो जाते हंै और मोमबत्ती जला कर इस के उजाले मे लोडसेडिंग का स्वागत करते हैं । लोडसेडिगं हमारे हिसाब से नहीं बनता है और नहीं चलता है । पर हम इस के हिसाब से चलते हैं । अब तो लोग रोमासं और प्यार, मोहब्बत भी लोडसेडिंग के हिसाब से करते हैं । जैसे ही बिजली आने पर बल्ब आंख मारती है वैसे ही लोग अपनी प्रेमी या प्रेमिका पर आंख मारते हैं । देश की जनसंख्या भी लोडसेडिगं के कारण बढ़ रही है । अब कोई दुश्मन देश हमारी तरफ आंख उठा कर नही. देख सकता । हमारी बढती आवादी के कारण दुश्मन भी डर जाएगा । क्योंकि आवादी ज्यादा होने से भी कुछ देश अपने आप को शक्तिशाली मानते हैं । पर लोडसेडिंग का इतना महत्व होने पर भी इस के लिए अभी तक मंत्रालय नहीं बना ।

यह तो लोडसेडिगं के शान के खिलाफ है वह ६ महीने हमारी सेवा में उपस्थित रहता है पर सरकार इस पर खास तवज्जो नहीं दे रही । देश से बिजली अपराधी की तरह नदारद है पर उसके नेपाल विद्युत अप्राधिकरण है । जिस का पूर्जा, पूर्जा ढीला है और कोई काम नहीं करता उस के लिए भी उर्जा मंत्रालय है । पर जो कभी कोई शिकायत नहीं करता । आम जनता की झिड़की और श्राप दोनो सहता है । उस बेचारे लोडसेडिगं के लिए कोई मंत्रालयन नहीं है । यह तो घोर अनर्थ है । इस देश में साम्यवादी सरकार राज करती है और साम्यवादी सभी को एक ही आंख से देखते हैं और एक ही जैसा बर्ताव करती है । तो लोडसेडिंग के साथ इतना बडा भेदभाव क्यों ? जब लोडसेडिगं हमारी नस, नस के अंदर घुस चुका है । यह हम आम जनता के लिए भी अति प्रिय है इसीलिए सरकार से आग्रह है कि उर्जा मंत्रालय को विघटन कर एक लोडसेडिगं मंत्रालय अविंलब बनाए नहीं तो यहां की जनता मोमबत्ती जला कर विरोध करेंगे और सिहंदरवार के आगे प्रदर्शन करेंगे ।

लोडसेडिगं की जय हो । यह और खूब फूले–फले और चौबीसों घंटे हमारी सेवा में हाजिर रहे । (व्यग्ंय)

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