वसंत पंचमी पर आखिरी शाही स्नान को संगम तट पर उमड़े श्रद्धालु

संगम पर आज बसंत पंचमी के दिन महाकुंभ का तीसरा शाही स्नानपर्व अपनी सादगी और भव्यता के साथ जारी है। सबसे आगे महानिर्वाणी अखाड़ा, सहयोगी अटल अखाड़े के साथ सुबह सवा पांच बजे छावनी से निकलकर सवा छह बजे संगम पहुंचा। और सबसे पहले महानिर्वाणी के संतों ने संगम में ड़ुबकी लगाई। प्रशासन का अनुमान है कि आज लगभग दो करोड़ श्रद्धालु स्नान करेंगे, इसलिए विशेष तैयारियां की गई हैं।

महानिर्वाणी के बाद आनंद के साथ पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी और जूना में साथ आवाहन, अग्नि, संन्यासिनी अखाड़ा तथा अलख दरबार के संतों ने डुबकी लगाई। उसके बाद अखाड़ों के महामंडलेश्वर, महंत, श्रीमहंत मौनी अमावस्या पर हुए हादसे में मृत लोगों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण भी दिए। तीसरे शाही स्नान पर नए बने महामंडलेश्वर और संन्यासियों ने भी डुबकी लगाई।

इससे पूर्व स्नानपर्व के मद्देनजर विभिन्न अखाड़ों की ओर से महामंडलेश्वरों के रथों को सजाने का काम पूरी रात जारी रहा। अंतिम स्नानपर्व के कारण अखाड़ों और उनके महामंडलेश्वरों में गज़ब का उत्साह था।

शाही जुलूस में पहली बार शामिल होने को लेकर नए महामंडलेश्वरों की ओर से उनके रथों को और आकर्षक तरीके से सजाया गया था। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक रवानगी के पहले आराध्य और निशान की विशेष पूजा की गई, फिर अभिमंत्रित करके श्रृंगार के तहत नागा संन्यासियों को भस्म लगाई गई। अग्नि अखाड़े के सभापति श्रीमहंत गोपालानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक बसंत पर्व के कारण लौटने पर अखाड़े की परंपरानुसार वाग्देवी सरस्वती की पूजा की जाएगी।

बृहस्पतिवार को सुबह 10.19 बजे के बाद माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी शुरू हुई जो शुक्रवार को सुबह 10.57 बजे तक रहेगी। ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्णेय के मुताबिक उदयातिथि के कारण सूर्योदय से लेकर 11 बजे तक की अवधि पुण्य काल है। वैसे पंचमी तिथि के कारण गणपति आराधना के बाद डुबकी विशेष फलदायी होगी।

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