वाम गठबंधन अवसरवादी गठबंधन है : उपेन्द्र यादव

जनता के हक मेरे उपर बनता हैं : फोरम अध्यक्ष उपेन्द्र यादव (चुनावी अन्तर्वार्ता)

नेपाल में संसदीय व प्रांतीय सभा के चुनाव को लेकर राजनीति बिसात बिछ चुकी है और चुनाव में शामिल गठबंधन और दल अपनी—अपनी गोटियां चल चुके हैं। ये गोटियां मतदाता को कितना रिझा पाती है, वो तो भविष्य तय करेगा। इन्हीं उतार चढ़ाव के बीच सप्तरी के क्षेत्र नं. २ से राजपा और फोरम के गठबन्धन के तरफ से संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष ‘उपेन्द्र याादव’ नें उम्मीदवारी दी हैं । प्रतिनिधी सभा के उम्मीदवार उपेन्द्र यादव से चुनावी रणनीति के बारे में बातचीत की । प्रस्तुत है ‘उपेन्द्र यादव’ से हुए बातचीत के प्रमुख अंश :



आप सप्तरी जिले के क्षेत्र संख्या २ से संसदीय सीट के प्रत्याशी है ऐसे में आपके लिए क्या-क्या चुनौतियां हैं?
क्षेत्र नं.२ में गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ापन सबसे बड़ी समस्या है। यह क्षेत्र आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़ा, यातायात संचार का बुरा हाल, अत्यंत गरीबी और बेरोजगारी की अवस्था जैसे समस्याओं से ग्रस्त है।


देश की राजनीति लगभग दो दिशाओं में बंट चुकी है एक है वामपंथी तो दूसरा लोकतांत्रिक लेकिन राजपा और संघीय समाजवादी फोरम नेपाल अंततः लोकतांत्रिक गठबंधन में शामिल नहीं हो सकी। ऐसे गठबंधनों को लेकर आपकी क्या राय है है?
हमलोग दोनों गठबंधनों में से किसी में नहीं हैं। कांग्रेस के साथ सीट एडजेस्टमेंट के बारे में बात हुयी है। हमलोग तीसरे धार के विकास के पक्ष में हैं जो लोकतांत्रिक भी हो समाजवाद भी हो और जिसमें मधेशी, आदिवासी और जनजाति जैसे पिछड़े लोगों की जो समस्याएं हैं, उसका समाधान हो। इसके साथ ही मुल्क में स्थापित लुटतंत्र, भ्रष्टतंत्र के खिलाफ लड़ाई लड़ते लड़ेंगे। तीसरी धार यानि प्रगतिशील लोकतांत्रिक धार की जरूरत है। दो धार के विकास की सोच हमारे साथ है।

कोई भी गठबंधन बनाए, वो उसकी स्वतंत्रता है। लेकिन गठबंधन केवल अवसरवादी नहीं होना चाहिए। वाम गठबंधन का नीति—कार्यक्रम का अब तक कुछ पता नहीं है। ये मात्र अवसरवादी गठबंधन है। दूसरी बात, ये लोग कोई वामपंथी या कम्युनिस्ट तो हैं नहीं। कम्यूनिस्ट के नाम पर कोई मार्क्सवाद-लेनिनवाद का नाम पर राजनीति कर रहा है तो कोई माओवाद के नाम पर। गौर करें तो इन लोगों को मार्क्सवाद-लेनिनवाद या माओवाद के सिद्धांत से कोई लेना-देना नहीं है। ये सब विशुद्ध रूप से उदारवादी लोकतांत्रिक पार्टी यानि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी जैसों में परिवर्तित हो चुकी है। इन लोगों का कोई सैद्धांतिक आधार तो है नहीं।


आप प्रायः मोरंग—सुनसरी से चुनाव लड़ा करते थे लेकिन ऐसा क्या हुआ जो आपको सप्तरी से उम्मीदवारी देना पड़ा है?
निश्चित रूप से मेरा राजनीतिक कर्मभूमि मोरंग—सुनसरी था जहां से आंदोलन किया और आगे बढ़ा। लेकिन जन्मभूमि तो मेरा सप्तरी ही है। इसी धरती पर जन्मा और बचपन बीता, शिक्षा—दीक्षा प्राप्त किया। ऐसे में जन्मभूमि के लिए भी कुछ करना मेरा कत्र्तव्य है। मोरंग-सुनसरी जहां से हम आगे बढ़े, वो तो काफी एडवांस हो चुका है। लेकिन सप्तरी तो हुम्ला—जुमला के हारा—हारी में है। ये धरती हमारे पूर्वजों का रहा है। इसलिए सोचा कि यहां के लिए भी कुछ किया जाए। इसके अलावा यहां की जनता की भारी डिमांड थी कि मैं यहीं से चुनाव लडूँ। जनता का कहना था कि आप सप्तरी के हैं, बाहर क्यूं जाइएगा। सप्तरी के लोग मोरंग,सुनसरी क्यूँ जाएं। यहीं अब कुछ किया जाए। हम सब आपके साथ हैं।
आखिर में जनता की भावना का कद्र करना मेरा कत्र्तव्य बनता था और जनता का अधिकार भी। जनता का हक बनता है मेरे ऊपर। इसलिए जनता के सम्मान में यहां आना पड़ा। चुनाव तो कहीं से लड़ जाते। मोरंग-सुनसरी से तो जीतते ही रहे हैं और जीतते भी।


आपलोगों ने संविधान संशोधन के लिए काफी आंदोलन किया लेकिन जिन मुद्दों के लिए आपने लड़ाई लड़ा, वोे अब तक हासिल नहीं हो सका है। इस चुनाव में इन मुद्दों का कितना अर पड़ेगा?
इन मुद्दों को लेकर हम इस चुनाव में जनता के पास जा रहे हैं। चुनाव के बाद संगठित होकर संविधान संशोधन और मधेश में व्याप्त असामानता, विभेद और उत्पीड़न की समाप्ति के लिए लड़ेंगे। इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है।


मान लीजिए कि यदि वाम गठबंधन सरकार बनाने में सफल हो जाती है तो क्या आप कांग्रेस के साथ विपक्ष में खड़ें होंगे या अलग ही विपक्ष में रहेंगे?
देखिए, हमने पहले भी बताया कि हम बीच के रास्ते में हैं न कांग्रेस न कम्युनिस्ट। हमारा अपना मार्ग है। कांग्रेस और कम्युनिस्ट की कई बार तो सरकार बनी है न। लेकिन हमलोग कई बार साथ भी दिए और कई बार दोनों के विपक्ष में भी रहे। सवाल उठता है कि कौन सरकार बनाता है और उनकी नीति-कार्यक्रम क्या होता है और किस उद्देश्य से सरकार बनती है, इन सब चीजों पर साथ देना और न देना निर्भर करता है।


आप सप्तरी के क्षेत्र नं.२ से प्रतिनिधि सभा के प्रत्याशी हैं। और आपके विपक्ष में लगभग डेढ़ दर्जन उम्मीदवार हैं। ये उम्मीदवार आपके लिए कितना बड़ा चुनौती है खासकर बागी उम्मीदवार?
देखिए, जनता के बीच जाने का सबको अधिकार है। सब लोग मिलकर जनता के पास जाए और जिसे मैंडेट मिले, उसका सम्मान करें। मेरे अलावा और कोई चुनाव लड़ रहा है तो वो कोई दुश्मन नहीं है मेरा, ऐसा मेरा मानना है। लोकतंत्र में सब सहयात्री ही होते हैं।


आपके विपक्ष में वाम गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में उमेश यादव हैं जो इससे पहले के चुनाव में जीत भी हासिल की थी और सिंचाई मंत्री भी बने। ऐसे में उमेश यादव को आप कैसी चुनौती मानते हैं?
चुनाव तो चुनाव ही है। लेकिन जनता की भावना और परिस्थितियां बदल चुकी है। तराई के प्रति माओवादी और कम्युनिस्ट सबों का जो दुर्भाग्यपूर्ण रवैया रहा है, उसे मधेश की जनता नहीं भूली है।


आप किन-किन मुद्दों को लेकर जनता के सामने जा रहे हैं?
मधेशी जनता का अधिकार और मधेश का अधिकार, ये दो प्रमुख एजेंडा है हमलोगों का।


यदि आप इस बार प्रतिनिध सभा का चुनाव जीतते हैं तो आपका आगे की रणनीति क्या रहेगी?
क्षेत्र नं. २ के साथ—साथ पूरे देश का विकास, प्रमुख एजेंडा रहेगा। आर्थिक समृद्धि और समानता का अधिकार, ये दो आधारभूत तो मुद्दा है ही हमलोगों का ।


अन्त में आप यहां के जनता से आप क्या कहना चाहेंगे?
संघीय गणतंत्र को संस्थागत करें और विभेद व असमानता को समाप्त करें। समान अधिकार और अवसर में समानता और अपने राष्ट्रीय की पहचान के मुद्दा को आगे बढ़ायें और साथ ही मुल्क को भ्रष्टाचार, दुराचार और लूटतंत्र की राजनीति को अंत करने का वक्त आया है।s:enaiummid

 

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