विदुषक प्रधानमंत्री ! ओली महाशय कहते हैं किसी को भी भूखे नहीं मरने दूंगा ।

 बिम्मीशर्मा, काठमांडू,२ मई |

हमारे देश के विदुषक प्रधानमंत्री श्री केपीशर्मा ओली के तरकश से हर दिन नए–नएतीर निकल रहे हैं । उनके तरकश में एक से एक मुहावरों के तीर और व्यगंयोक्ति भरे पडे हैं । अभी–अभी पीएम ओली ने कहा कि“मैं जब तक प्रधानमंत्री पद में हुं देश में कोई भूख से नहीं मरेगा ।” अब उन की बात में जनता हंसे, ताली बजाए, रोए या मातम मनाए ? क्योंकि पीएम ओली की इस भावभीनी अमृत वाणी से कुछ दिन पहले ही झापा में भूकंप पीडितों के लिए विदेशी सहयोग में आए चावल सड़ कर उनको जमीन मे गाड़े जाने की खबर आई थी । इसी को कहते है चिराग तले अंधेरा ।

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पर लाजवंती के झार से ठीक उलट स्वभावबाले हमारे विदुषक पीएम सभी के पेट भरने का दावा ऐसे कर रहे जैसे उन के पास कोई अक्षय पात्र हो । महाभारत में जगंल में रहने के दौरान सूर्य भगवान ने पांडवों को अपने और दूसरों को खिलाने के लिए पाक स्थली दिया था । क्या हमारे पिएम ओली को भी उनकी सूर्य छाप पार्टी ने देश के नागरिको का पेट भरने के लिए कोई पाक स्थली दिया है । बारिश नहीं हो रही है, देश में इस बार सूखा पड़ने का अंदेशा है । पर हमारे पिएम अन्न भंडारण को कैसे बढाया जाए और सूखे से कैसे निपटा जाए इस तरफ गंभीर हो कर नहीं सोचते उन्हे तो बस हर समय मसखरी ही सूझती है । शायद झापा में सड़े हुए चावल को गाड़े जाने की खबर उन्हें नहीं है । शायद पीएम ओली की सुनने और देखने की शक्ति भी समाप्त हो गई है ।

जिस देश में विदेशों से सहयोग स्वरुप मूफ्त में आए चावल को भी जनता को खाने के लिए न देकर सड़ा कर फेंका और गाड़ा जाता है उस देश का सरकारी निकाय कितना निकम्मा होगा ?अपनी अंटी से पैसा खर्च करना नहीं है, दूसरा दे रहा है उस को भी बाँटने में सरकार लाचार है । यह सरकार खुद ही इतनी भूखी है कि यह जनता का पेट क्या भरेगी ? भूकंप पीड़ितों ने बिना आशियाने के वर्षा और जाड़ा काट लिया । भूकंप की पहली बरसी भी बेलुन उड़ा कर मना लिया गया । यह निकम्मी सरकार भूकंप में जो बच गए हैं उनकी भी बरसी मना कर अपना पल्ला झाड़ना चाहती है ।

देश के सर्वोच्च पद में आसीन प्रधानमंत्री को ही देश की मूलभूत समस्याओं की जानकारी नहीं है । इसीलिए तो कितने मजे से चटखारे ले ले कर ओली महाशय कहते हैं कि किसी को भी भूखे नहीं मरने दूंगा । इस का मतलब तो यही हुआ न कि वह प्रधानमंत्रीका पद छोड़ना ही नहीं चाहते । इसी लिए जब तक वह पीएम हैं तभी तक देश वासी सुखी और भूखे नहीं रहेगें का जो भ्रमजाल ओली एंड कंपनी फैला रही है । उस से तो लगता है कि इस देश को एमाले ने ठेकेदारी में ले लिया है ।

क्या सिंह दरवार के अंदर इतना बड़ा खेत या बारी है जहां पीएम ओली अपने मंत्री मंडल के अन्य सदस्यों और पार्टी के कार्यकर्ताओं से अन्न की उगाई कर के भूखी जनता का पेट भरेगें ? क्या बालुवाटार में इतनी जमीन है जहां पर खेती किया जा सके ? या ओली के लिए अपने मंत्री मंडल के सदस्य और अपनी पार्टी के कार्यकता ही देश के नागरिक के कोटे में आते हैं ? यदि नहीं तो यह बेसिर पैर कि बातें करने के लिए ओली को शर्मिन्दा होना चाहिए । जिस देश में महंगाई और कालाबजारी समानान्तर सरकार चला रही है । जनता को उचित दाम में जरुरत की वस्तुएं नहीं मिल रही है । वहां पर विदुषक जैसा देश का प्रधानमंत्री जनता को भूखा नहीं रखने का स्वागं भरता है ।

इस देश की जनता अपना पेट अपने परिश्रम से खुद ही भर सकने मे सक्षम है । बस किसानों को कृषि उपकरणों मे अनुदान और मल में रियायत दिया जाए । यह तो सरकार करेगी नहीं किसान की अन्तिम आशा तो आकाश में गड़गड़ाते मेघ ही हैं जो बरस कर इनके खेत और पेट को साथ में भरते हैं । पीएम ओली से अच्छा तो आकाश के बादल है जो उनकी तरह सिर्फ गड़गड़ाते ही नहीं बरस कर खेत खलिहानों को नयां जीवन देते हैं ।

देश में अकाल पड़ने के आसार हैं । पर सरकार को इस की कोई फिक्र नहीं । कभी हवा से बिजली निकालने, कभी गैस की पाईप लाईन रसोई तक लाने की बात, कभी राजधानी काठमाडूं में मेट्रो रेल चलवाने की हवाहवाई बातें । किसी पर कोई ठोस निर्णय और योजना नहीं । बस फेकना हैं फेक रहे हैं और जनता अपनी गरीबी की लटाईं मे प्रधानमंत्री की मसखरी को लपेट रही है । पर अब तो हद हो गयी उसी भूखी और गरीब जनता को अपने भरे हुए बडेÞ पेट पर हाथ फिराते हुए डकार ले कर कोई मसखरा बोल रहा है कि जब तक मैं प्रधानमंत्री पद में हुं, किसी को भुखे नहीं रहने दूंगा ।

महाभारत में जंगल में रह रहे पांडवों के पास आधी रातको दुर्वासा ऋषि और उनके साठ हजार शिष्य अचानक से टपक पड़े थे । तब अभावों में दिनगुजार रहे पांडवों भगवान श्री कृष्ण को पुकारा था । तब श्री कृष्ण ने पाकस्थली में बचे हुए छोटे से साग के टुकडेÞ को खा कर पानी पी लेने से दुर्वासा और उन के साठ हजार शिष्यों का पेट भर गया था । उसी तरह क्या पीएम ओली के बालुवाटार या सिंह दरवार में बैठ कर चौरासी व्यंजन या छप्पन भोग डकार लेने से गरीब और भूख से बेहाल देश के नागरिकों का पेट भर जाएगा ? क्या पीएम के पास कोई जादू की छडी है । जनता अपना खून, पसीना बहाकर भी भूखी और अभाव ग्रस्त हैं और आप एसी में आराम फरमाकर भरे हुएअपने पेट से मसखरी करते हैं । क्या प्रधानमंत्री का अपना कार्यकाल मसखरी करके ही बीतेगा ? या विश्व का आठंवा अजुबा प्रधानमंत्री जो जनता की भावनाओं से खेलता है का खिताब जितने की कोई होड लगी है ?जिस में पीएम ओली को जैसे भी हो प्रथम आना ही है । व्यग्ंय

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