विद्युतीय हस्ताक्षर- एक जानकारी
राजनराज पन्त

ई-विजनेस के विकास और विस्तार से आज व्यवसाय को नया मोडेल मिला है। इन्टरनेट की लोकप्रियता, अनलाइन कारोबार से शीघ्र होने वाले व्यवसाय मात्र न होकर हम लोग प्रायः बहुत प्रकार के कारोबार अनलाइन के द्वारा कर रहे हैं।
आपर्ूर्तिकर्ता, उपभोक्ता और उत्पादनकर्ता सबों को इन्टरनेट के माध्यम से जोडÞकर व्यापार-व्यवसाय फल-फूल रहा है। यह हम लोग प्रत्यक्ष देख रहे हैं। मगर जितना आसान अनलाइन कारोबार होता है, उससे ज्यादा उसकी सुरक्षा का प्रश्न उठता है। क्योंकि अनलाइन मार्फ कारोबार करते समय गोप्य सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है और उसे कोई भी अनलाइन से चुरा सकता है। वैसे अनलाइन से गोप्य सूचना चुराना, किसी के कम्प्यूटर तथा र्सभर को बिगाडÞ देना तथा उस में अनधिकृत पहुँच रखना, उन सूचनाओं को चुराना आदि काम करने वाले हृयाकर वा क्र्याकर कहलाते हैं। अनलाइन कारोबार करते समय ऐसे हृयाकर तथा क्र्याकरों से बचना अति जरुरी है। सूचना प्रविधि के क्षेत्र में सूचनाएँ सुरक्षित होनी चाहिए। कोई भी सूचना अनलाइन के द्वारा भेजने पर कोई भी उसे बीच में परिवर्तन न कर सके, ऐसी प्रविधि को अपनाना चाहिए। इन्टरनेट बैंकिकर्,र् इ-कमर्स, अनलाइन मार्फ किए जाने वाले सरकारी कामकाज र्-इ- गर्भनेन्स) में अनलाइन से प्रवाहित होने वाली सूचनाएँ और वैसी सूचनाएँ तथा तथ्यांक रखा गया र्सभर सब का संरक्षण अत्यन्त महत्वपर्ूण्ा होता है।
इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक अनलाइन कारोबार होना और प्रवाहित होने वाली सूचना का संरक्षण के लिए विद्युतीय हस्ताक्षर का प्रयोग होता है।
क्या है विद्युतीय हस्ताक्षर –
विद्युतीय हस्ताक्षर -डिजिटल सिग्नेचर) कहने पर कागज में दस्तखत करने के बाद स्क्यान द्वारा स्क्यान करके डिजिटल के रुप में कम्प्यूटर में रखा गया दस्तखत नहीं होता। यह एक प्रकार का कोड है, जिससे इन्टरनेट ब्राउजर में अथवा स्मार्ट कार्ड में अथवा युएसबी टोकन में रखा जाता है और गोप्य पिन दिया जाता है। विद्युतीय हस्ताक्षर प्रयोग करते समय वैसा स्मार्टकार्ड वा युएसबी टोकन कम्प्यूटर में रखा जाता है और गोप्य पिन द्वारा उसका प्रयोग किया जाता है।
विद्युतीय हस्ताक्षर एगदष्अि पभथ भलअचथउबतष्यल ९एप्क्ष् mभतजयम० मार्फ बनाया जाता है, जिसके अनुसार विद्युतीय हस्ताक्षर में एक र्सार्वजनिक चाभी ९एगदष्अि प्भथ० और दूसरी निजी चाभी ९एचष्खबतभ पभथ० होती है। र्सार्वजनिक चाभी के बारे में दूसरो को भी जानकारी हो सकती है। लेकिन निजी चाभी के बारे में खुद के अतिरिक्त दूसरे किसी को जानकारी नहीं होनी चाहिए। कोई भी सूचना भेजते समय प्राप्तकर्ता को र्सार्वजनिक चाभी द्वारा विद्युतीय हस्ताक्षर करके भेजा गया हो तो प्राप्तकर्ता के ही निजी चाभी से वह सूचना प्राप्त होती है अन्यथा नहीं। उदाहरण के लिए राम ने श्याम को अनलाइन मार्फ भेजी गई सूचना को राम ने श्याम की र्सार्वजनिक चाभी का प्रयोग करके भेजा है तो श्याम उस सूचना को अपनी निजी चाभी से ही खोल सकता है। राम से श्याम तक वह सूचना पहुँचते समय बीच में इन्त्रिmप्टीभ होकर जाता है। साधारण अक्षरों को -कखगघ) इक्रिप्सन करके भेजने पर वह इन्त्रिmप्टिभ ९ह२र३० होता है, जिससे साइफर टेक्स्ट कहते हैं।
उसी तरह यदि राम अपनी निजी चाभी प्रयोग करके श्याम को सूचना भेजता है तो श्याम राम की र्सार्वजनिक चाभी प्रयोग करके ही उसे खोल सकता है। इस तरह सूचना प्रवाह करते समय विद्युतीय माध्यम द्वारा होने वाले कारोबार में आधिकारिकता, गोपनीयता के साथ ही किए हुए कारोबार को नकारा नहीं जा सकता।
विद्युतीय हस्ताक्षर का प्रयोग इन्टरनेट बैंकिकर्,र् इ-गभर्नेन्सर्,र् इ-कमर्शर्,र् इ-मेल, डाटा इस्टोरिङ, डाटा इन्ट्री, डाटा टान्सफर आदि कार्य में होता है। सूचना प्रविधि के क्षेत्र में विद्युतीय हस्ताक्षर को विश्वसनीय सुरक्षण प्रविधि माना जाता है। इसीलिए नेपाल का एक मात्र साइबर-ल, जिसे विद्युतीय कारोबार ऐन-२०६३ कहा जाता है, जिसमें इसकी व्यवस्था की गई है और जिसके अनुसार विद्युतीय हस्ताक्षर करके विद्युतीय कारोबार को नेपाल सरकार ने कानूनी मान्यता प्रदान की है। विद्युतीय हस्ताक्षर के विषय में काम करने के लिए तथा विद्युतीय कारोबार ऐन, २०६३ को प्रभावकारी रुप से कार्यान्वयन करने के लिए नेपाल सरकार, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय अर्न्तर्गत प्रमाणीकरण नियन्त्रक कार्यालय की स्थापना की गई है।

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