विधान आला रे आला व्यग्ंय

मधेश के लिए कफनऔर बाँकी देश के लिए संविधान आ गया रे आ गया । नेपाली २६ अर्ब रुपैंया खर्च कर के आने वाला है देश का नया ‘हैवान’ यानि संविधान । जो मधेश को जलाएगा और रुलाएगा और बाँकी देशवासी और सत्तारुढ दल के नेताओं और मन्त्रियों को हंसाएगा । एक मसालेदार फिल्म मे जितने मसाले होने चाहिए वह सब इस संविधान मे भरपूर है । कंही पर हंसाएगा, कंही रुलाएगा, कंही गुस्सा दिलवाएगा और कंही पर झगडा करवाएगा । है न बिल्कूल जोकर की तरह यह संविधान ?

पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से मधेश बन्द है । १५ दिनों से वहाँ पर कर्फयू लगा हुआ है । नेपाल की जनता की कर से पालित नेपाल की पुलिस मधेश की जनता को उपहार मे गोली दाग कर स्वागत कर रही है । अपनी कईं पीढिंयो से नेपाल मे रह रहे इन मधेशियों को बिहारी और धोती का अपमान भरा सम्बोधन दे कर इनकी छाती गोलियों से छलनी कर रहें है । और मजे की बात यह है कि इन्ही को राष्ट्र सेवक का दर्जा भी मिला हुआ है । यह राष्ट्र सेवक हैं की राष्ट्र के जल्लाद हैं ?

देश की राजधानी मे रहनेवाले संविधान को उत्सव की तरह मनाना चाहते हैं । पर कुछ ही घंटो की दूरी पर रह रहा मधेश कर्फ्यू के कारण सहमा हुआ है । मधेश और मधेशी चित्कार करना चाहते हैं । संविधान का विरोध वह चाहते हुए भी नहीं कर पा रहे हैं । क्योंकि उन के घर, आंगन मे कर्फ्यू का ताला जडा हुआ है । घर मे शव रख कर पडोस की शादी में नएं कपडे पहन कर बनठन कर जाने जैसा माहौल है । मधेश मे दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मृत्यु या हत्या पर मातम छाया हुआ है और देश की संवेदनहीन सरकार संविधान का विगूल फूंक रही है ।

यह कितने शर्म की बात है कि मधेशीऔर अन्य सिमान्तकृत जाति और समुदाय की मांग को संवोधन न कर के ही देश मे संविधान का विना माहौल का राग छेडा गया है । इस संविधान से फायदा सिर्फ एक किडनी वाले बाबा केपी ओली को ही । इस संविधान नाम की शादी मे केपी ओली ही दूल्हा बन कर प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर बैठेगें । और ओली महाशय के दूल्हा बनने मे संविधान सभा के अधिकांश सभासद बाराती बन कर सहयोग कर रहे हैं ।

यह देश का दुर्भाग्य ही है की यहां पर हमेशा बुढा और अंपग ही प्रधानमन्त्री बनता है  वर्तमान मन्त्री की आवाज साथ नहीं देती है तो आने वाले प्रधानमन्त्री की सिर्फ एक किडनी है । वह भी दूसरे की दया से दान मे मिली हुई है । जो खुद अपंग है और पूर्ण नहीं है वह देश को पूर्ण कैसे बनाएगा और मंत्री मण्डल का नेतृत्व क्या खाक करेगा ?जो चल नहीं सकता वह दौड्ना चाहता है ।

हिन्दू महिलाओं का प्रमुख पर्व तीज कल है । देश की राजधानी मे इस की चारों और धूम है । लोग खापी और नाच गा रहे हैं । पर मधेश विधवा की मागं की तरह सूना और उदास है । वहां की कितनी औंरते पुलिस के हाथों मिली गोली रुपी प्रसाद के कारण आसन्न विधवा हुई है । अपनी तरह की दूसरी औरतों को सज धज कर लाल साडी मे तीज मनाते हुए देखना उन्हे कैसा लगता होगा ? पर देश की राजधानी को इस का कोइ मलतब नहीं हैं । राजधानी तो संविधान के नशे मे चूर है । उसे क्या मतलब कोई मरे या जिए ?वह तो कर्फ्रयू लगा कर मधेश से सामान ट्रकों मे लाद कर लाता है और खापी कर मस्त रहता है । मधेश जाए भांड मे, उसकी बला से ।

मधेश से ही उत्पादन हो कर आए हुए अन्न और सब्जी से काठमाण्डुं के नेता और जनता अपना पेट भरते है । और अभी उसी मधेश को बाबा जी का ठूल्लू की तरह ठेगां दिखा रहे हैं । मधेश अपना है पर मधेशी अपने नही है । वह तो भारतीय उत्पादन है जो गलती से नेपाल मे घुस आए हैं । भारत क्या नेपाल से छोटा और कमजोर है जो वहां खाना न मिलने नेपाल मे खाना मागंने आए है । नेपाल का ही कोइ पहाडी मूल का आदमी भारत जाना चाहता है और पहले से ही वहां है तो गलती से भी नेपाल लौट्ना नहीं चाहता है । तो फिर भारतीय क्यों कर आएगें इस गरीब मूल्क में क्या मिलेगा उन्हें यहां ?

अगले रविवार को संविधान बन, संवर कर मधेशियों को रुला कर आ रहा है । केपी ओली के साथ सती जाने के लिए सभी नेता और उनके द्धारा पालित पोषित जनता तैयार है । संविधान में क्या है या क्या नहीं हैं यह बात महत्वपूर्ण नहीं है । इस संविधान ने देश के एक बडे हिस्से का दिल दुखाया है । यह संविधान उस समुदाय के हित के अनुकूल है कि नहीं यह महत्वपूर्ण है । संविधान कोई वस्त्र नहीं है कि आज पहन लिया और पसंद नहीं आया तो कल बदल लिया । यह देश का भाग्यनियंता के तौर पर महत्वपूर्ण दस्तावेज है । पर यहां के नेता और जनता कब समझेगें इस की गम्भीरता को ?

सात साल मे मधेश को लहुलुहान बना कर वहां के जनता की रक्त से होली खेल कर और उन के आंसुओं को स्याही बना कर लिखा गया यह संविधान निःसन्देह बहुत महंगा है पर बढि़या नही ।

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