विधेयक पारित होने से पूर्व कोई भी चुनाव स्वीकार्य नहीं : रेखा यादव

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काठमांडू, १८ पुस । वर्तमान में नेपाल के नश्लवादियों ने देश को अनिर्णय का बंदी बना रखा है । पंजीकृत संशोधन विधेयक को अनिश्चितता एवं अन्यौलता में रखकर संसद की कार्यवाही को भी स्थगित की है । सत्ता, भत्ता, लोभ, मोह एवं ऐयाशी में लिप्त होने के कारण मधेशी, आदिवासी, जनजाति, दलित, पिछड़ावर्ग और सीमान्तकृत समुदायों को हमेशा के लिए दबाने का षड़यन्त्र किया है ।
देश में एक ही भाषा, वेशभूषा और नश्ल की पहचान कायम रहे, यही उनकी धारणा रही है ।
सरकार ने अगहन १४ गते संघीयता, सीमांकन, समानुपातिक, समावेशी नागरिकता की प्राप्ति जैसे मुद्दों में संघीय गठबन्धन से विमर्श किए बगैर अधूरे विधेयक पंजीकृत किया है । इस विधेयक में संघीय गठबंधन असहमत हैं । दूसरी तरफ फिलहाल संविधान संशोधन विधेयक को रद्दीखाना में रखकर कांग्रेस, एमाले और माओवादी के बीच चुनाव करवाने में सहमति हुई हैं । इससे स्पष्ट होता है कि सरकार, एमाले और कांग्रेस की नियत में खोटापन तो दिखाई दे ही रहा है । दूसरी तरफ यह भी साफ है कि देश में जातीय–सामाजिक सहिष्णुता भड़काने तथा देश को विभाजन की ओर उन्मुख करने का प्रयत्न किया जा रहा है । राष्ट्रीय एकता को कमजोर कर देश में फिर से गृहयुद्ध करवाने का प्रयत्न किया जा रहा है । संघीयता, गणतन्त्र, धर्म निरपेक्षता जैसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों को खाई में रखकर देश को प्रतिगमन की ओर ले जाने की कोशिशें की जा रही हैं ।
जहाँ तक चुनाव करवाने की बात है, हमारी मान्यता है कि विधेयक पारित होने से पूर्व किसी भी तह का चुनाव करवा गया, तो वह चुनाव स्वीकार्य नहीं होगा ।
(रेखा यादव, संघीय समाजवादी फोरम नेपाल की केन्द्रीय सदस्य तथा राजनीतिक समिति की सदस्य हैं ।)

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