विनोद चौधरी के बिजनेस मंत्र

१. उच्च महत्वाकांक्षाः महत्वाकांक्षा भूख जगाती है। और भूख आदमी को आगे बढने की प्रेरणा और दवाव देती है। बडÞे स्तर का कारोवार फैलाऊंगा, औद्योगिक समूह स्थापित करुंगा अथवा अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर का प्रतिष्ठान बनाऊंगा- ऐसा लक्ष्य आप को रखना होगा। अन्यथा इस क्षेत्र में हाथ न डÞालना ही बेहतर होगा।
२. संगठन निर्माणः अकेले के परिश्रम से बडÞा लक्ष्य हासिल नहीं होता। इसके लिए बÞा संगठन चाहिए। व्यावसायिक लोगों का समूह चाहिए। उसीका परिणाम है- हमारा खिचापोखरी स्थित अरुण इम्पोरियम का पेडÞ आज सघन होकर चौधरी ग्रुप में परिणत हुआ है।

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विनोद चौधरी

३. हार मत मानीए ः मेरे व्यावसायिक जीवन में बहुतों बार ऐसे क्षण आए, जिन्होंने मुझे अन्दर से हिला कर रख दिए। ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं। वि.सं. २०४४/४५ के आसपास ऊर्जा और सिमेन्ट में इन्भेस्ट करना चाहा था। मगर नहीं हो सका। भारत के अन्सल समूह के साथ मिलकर ‘काठमांडू रेजिडेन्सी’ संचालन करते समय शुरु में कटु अनुभव हुआ। कुछ योजनाएं धरी की धरी रह गर्इं। कहने का मतलव अपने अभियान में लगे रहिए। हिम्मत न हारिए।
४. बाजार की समझः मोटी-मोटी कितावें पढÞ लेने से बिजनेस नहीं चलता। व्यापार चलता है, बजार की समझदारी से। हाँ, सम्भाव्यता अध्ययन किया जा सकता है। बाजार संचेतना बहुत बडÞी चीज है। मैं ने थाई फुड के साथ सहकार्य करते समय बाजार अध्ययन नहीं किया था। मेरे अन्दर के बजार चेत ने मुझे पूरा सहयोग किया। मुझे कभी धोखा नहीं दिया।
५. नकारात्मक सोच का फायदा ः ‘जिन्दगी में हमेशा सकारात्मक ही सोचना चाहिए।’ मैं इससे सहमत नहीं। मेरी जिन्दगी का सिद्धान्त है, आदमी को कभी सन्तुष्ट नहीं होना चाहिए। सन्तुष्ट हो जाना, प्रगति में बाधक हो जाता है। नए काम में हाथ डलते वक्त नकारात्मक पक्ष के बारे में भी सोचना जरूरी होता है।
६. व्यग्रता नेगोसिएसन का शत्रुः नेगोसिएसन में बैठते वक्त अपने आप को जितना व्यग्र दिखाएंगे, आपकी कमजोरी उतनी ही दिखेगी। अगला आपको दबाव में रख सकता है। नेगोसिएसन की जीत-हार आदमी की बोलने की शैली और प्रस्तुति में भी निर्भर होती है। निगोसिएसन का पहली और सबसे महत्वपर्ूण्ा शर्त है, अगली पार्टर्ीीो प्रभावित कर के किसी भी हालत में ‘डिल’ हाथ में लेना।
७. सफलता सफलता के पीछे दौडÞी आती हैः अंग्रेजी में एक कहावत है- ‘नथिङ सक्सिड्स लाइक सकसेस।’ अर्थात् सफलता के पीछे सफलता आती है। विजनेस में पैर जमाने के लिए सफलता की कहानियाँ तो आप को रचनी ही होंगी। अर्थात् कुछ खास तो करना ही होगा।
८. खर्च में कटौती कीजिएः चौधरी ग्रुप का कर्पोरेट अफिस देखने पर नहीं लगेगा कि यह ग्रुप नेपाल, मैनमार और श्रीलंका आदि देशों में एक ही बार सिमेन्ट आयोजनाओं में कुल लागत १२०० करोडÞ से ज्यादा इन्भेस्ट कर रहा था।
९. अनुशासन ः अनुशासन में दो बातें होती हैं- व्यक्तिगत चालढÞाल और समय व्यवस्थापन। आप अपने सहकर्मी के साथ कैसा व्यवहार करते हैं – अपने साझेदार -पार्टनर) विक्रेता, खरीदकर्ता के साथ कैसे पेश आते है – इससे आप का व्यक्तिगत अनुशासन पता चलता है। और दूसरी बात- समय संसार में अमूल्य है। जो एक बार गुम जाय तो अरबों डाँलर में समय वापस नहीं मिलता।
१०. ‘अपटेड’ रहिए ः मैं देख कर सीखता हूँ। जो कुछ सीखा जाना, सब दूसरों को देखकर। नई जगहों में नए दोस्त बनाता हूँ। उन्हें देखता परखता हूँ। मेरे लिए यही बिजनेस पाठशाला है। आकाश सभी के लिए वही है। अब यह आप पर निर्भर है कि आप उसमें से कितना हिस्सा अपना बना पाते हैं। बाहरी संसार से जितना हो सके ‘अपडेट’ रहना सीखिए।
११. आक्रोशः आवेश में आकर कोई काम नहीं करना चाहिए। मैं जनता हूँ कि क्रोध करने से नुकसान ही होता है। फिर भी कभी कभार मैं क्रोधित हो जाता हूँ। मैं जनता हूँ, यह मेरी बडÞी कमजोरी है। आप भी अपनी कमजोरी को खुद पर हावी होने मत दीजिए।
१२. मेरी आक्रामक आदत ः क्रोधावेश में आदमी आत्मनियन्त्रण खो बैठता है। वह आक्रामक स्वभाव दिखाने लगता है। इसी के चलते मैंने बहुतों बार उद्योग वाणिज्य संघ और उद्योग परिसंघ में दूसरों को कुछ भला-बुरा कहा है। किसी का दिल भी दुखाया होगा। ऐसे में बात को दिल पर लेनेवाले लोग बाद में मौका मिलने पर वार करना नहीं भूलते।
१३. जनशक्ति और व्यवस्थापनः मैं अपने मुलाजिमों से आवश्यकता से कुछ ज्यादा ही अपेक्षा रखता हूँ। मैं चाहता हूँ कम समय में वे ज्यादा कामों को अंजाम दें। मैं भूल जाता हूँ कि काम करने की गति सबकी एक जैसी नहीं होती। सबों में एक सी विशेषता नहीं होती। थोडÞे समय में ढÞेरों काम करना पडÞता है तो जो कोई भी झुंझला जाएगा। मेरे कर्मचारी भी जरूर मुझसे कभी कभार नाराज हो जाते होंगे। हताश हो जाते होंगे। इसलिए जनशक्ति को व्यवस्थित रखना बुहत जरूरी है। त्र
प्रस्तुतिः मुकुन्द आचार्य

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