विपक्षी पार्टियां देश की राजनीति को भंवर में रखकर अपनी रोटी सेंक रही हैं : अर्जुन थापा

arjun-thapa
अर्जुन थापा, काठमांडू ,१४ पुस | संघीय गठबन्धन के ३ सूत्री सम्झौते के तहत दाहाल के नेतृत्व में सरकारी बनी है । उनमें से एक समझौता संविधान संशोधन करने की बात थी । हालांकि, सरकार द्वारा पंजीकृत विधेयक में मधेश की मांगों का पूर्ण सम्बोधन न किया गया हो, परन्तु आंशिक रुपसे सम्बोधन किया गया है । इस पंजीकृत विधेयक को लेकर विपक्षी पार्टियां प्रतिरोध में उत्तरी हुई हैं और संसद की कार्यवाही भी स्थगित की है । इस मसला को लेकर खासकर विपक्षी पार्टी तथाकथित राष्ट्रवादी छवि दिखाने के लिए देश की राजनीति को भंवर में रखकर अपनी रोटी सेंक रही है । गौरतलब बात यह है कि विपक्षी पार्टी जब सत्ता में थी, तो उसने भी इसी प्रस्ताव को दिल्ली दरबार से अनुमोदन करवाकर लायी थी ।
जब–जब मधेश के अधिकार की बातें सामने आती हैं, सारा दोष भारत के ऊपर मढ़ दिया जाता है । मधेश के विकास की बातें मधेश न होकर भारत के हिस्से में चली जाती है । मधेश का आन्दोलन भारत का आन्दोलन हो जाता है । एमाले सत्ता से बाहर आने के बाद ऐसे ही बेतुकी आरोप लगाते रहते हैं । आज एमाले जिस नीति के साथ आगे बढ़ रहा है, लगता है कि ये अपने ही बनाए संविधान को विफल करने की कोशिश में हैं ।
जहाँ तक मसला है, संविधान संशोधन विधेयक और चुनाव संबंधित विधेयक को, हमारी मान्यता है कि दोनों विधेयक आपसी विमर्श व सहमति से पारित किया जा सकता है । अगर एमाले इससे एक कदम पिछे हटते हैं, तो वह देश के हित में राष्ट्र घात सिद्ध होगा ।
इसी प्रकार देश में चुनाव होना अति आवश्यक है । लेकिन अभी की स्थिति में चुनाव होने की संभावना नहीं दिखाई दे रहा है । हां, पंजीकृत विधेयक पारित होने के पश्चात् संसदीय चुनाव होने की संभावना है । अगर यह चुनाव भी संविधानतः निर्धारित समयावधि में नहीं हो सका, तो संविधान की वैद्यता समाप्त हो जाएगी ।
(अर्जुन थापा संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के केन्द्रीय सदस्य हैं ।)
Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz