विप्पा सम्झौता राष्ट्रघात नही लगानी बढाने का माध्यम : बाबुराम भट्टराई

हेटौंडा, २४ माघ । एकीकृत माओवादी के उपाध्यक्ष तथा प्रधानमन्त्री बाबुराम भट्टराई ने कहा है कि सरकार मे रहकर ही प्रतिक्रान्ति रोकने मे वे सफल हुये हैं ।
‘अभी अगर सरकार मे नही रहते तो उनलोगों को अन्तर्राष्ट्रीय अदालत हेग मे ले जाने की तैयारी हो रही थी,’ उन्होने कहा कि पत्रकार डेकन्द्र थापा की हत्या की मुद्दा उसी योजनाअनुसार उठाया गया है ।’
हेटौंडा मे जारी सातवाँ राष्ट्रीय महाधिवेशन के बन्द सत्र मे प्रतिनिधि व्दारा सरकार की आलोचना होने के बाद जवाव देने के क्रम मे प्रधानमन्त्री भट्टराई ने स्वीकार किया कि जनआकांक्षा अनुरुप सरकार व्दार काम नही हयी है । उन्होने दाबी किया कि यद्दपि जनआकंक्षा अनुसार काम नही हो सकी है फिरभी सरकार मे रहकर पार्टी को कोइ घाटा नही हुआ है ।
उन्होने विप्पा सम्झौता के पक्ष मे बोलते हुये कहा कि विप्पा सम्झौता को राष्ट्रियता के साथ जोडकर नही देखना चहिये ।‘विप्पा को अतिरञ्जीत नही करना चहिये,’  । विप्पा सम्झौता राष्ट्रघात नही होकर लगानी बढाने का माध्यम मात्र होने का दावा किया। उन्होने कहा कि ऐसा सम्झौता और दुसरे देश के साथ भी होना चहिये । धोविघाट प्रकरण पर माफी मागने वाली संस्थापन पक्ष के अधिकांश प्रतिनिधि केमाँग के जवाव मे  उन्होने कहा कि उस प्रकरण को अभी लाना ठीक नही होगा वल्कि उससे सवक सिखना पडेगा । अग्नि सापकोटा ने विप्पा सम्झौता के विषय मे अभी पुरा बातचित नही होने की जानकारी दिया।
अध्यक्ष प्रचण्ड के ही नेतृत्व मे मजबुत टिम बनाकर अगे बढ्ने के लिये भट्टराई का जोड था ।

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