Sun. Sep 23rd, 2018

वीनस का यह नजारा, जिंदगी में नहीं दिखेगा दोबारा!

आसमान में सबसे ज्यादा चमकने वाले ग्रह वीनस (शुक्र) का एक खूबसूरत नजारा दिखने वाला है। अगर आपने 6 जून को मिस कर दिया, तो जिंदगी में इसे दोबारा नहीं देख पाएंगे। 6 जून को वीनस ट्रांजिट है। यानी चमक बिखेरता यह ग्रह इस दिन आपको सूरज की डिस्क के ऊपर दिखेगा। दरअसल, यह ग्रह इस दिन सूरज और हमारी पृथ्वी के बीच से गुजरेगा। वीनस हमारे चेहरे की ओर होगा। लिहाजा, सूरज के सामने यह काले डॉट के तौर पर नजर आएगा। इस रेयर इवेंट को कवर करने के लिए दुनिया के एस्ट्रनॉमी लवर्स तैयारी में जुटे हैं। दिल्ली के उत्सुक लोगों के लिए नेहरू प्लैनेटेरियम भी कुछ वर्कशॉप्स के साथ तैयार है।

चंद्रमा के बाद आसमान में सबसे ज्यादा चमकने वाला ऑब्जेक्ट वीनस है। हालांकि, इसका डायमीटर 6 गुना ज्यादा है लेकिन पृथ्वी से इसकी दूरी काफी है। इसके चलते यह काफी छोटा दिखाई देता है। नेहरू प्लैनेटेरियम की डायरेक्टर डॉक्टर रत्नाश्री कहती हैं, यह सूरज के काफी पास है। यह सौ साल में दो बार सूरज के सामने से गुजरता है। सूरज के ऊपर यह एक छोटे से काले बिंदु के रूप में दिखता है। पिछला वीनस ट्रांजिट 2004 में हुआ था। इस शताब्दी का दूसरा ट्रांजिट 6 जून को होगा। इसके बाद यह नजारा 2117 में ही देखा जा सकेगा। यानी इस बार आपने इसे मिस किया, तो फिर अपनी जिंदगी में दोबारा इसे नहीं देख पाएंगे।

करें अपनी तैयारी: इस अनोखी आसमानी घटना से लोगों को रूबरू कराने के लिए नेहरू प्लैनेटेरियम और विज्ञान प्रसार ने वर्कशॉप्स का इंतजाम किया है। एस्ट्रनॉमी लवर्स और खासकर स्कूली व कॉलेज के बच्चों के लिए ये वर्कशॉप्स हो रही हैं। इनमें इस इवेंट के पीछे छिपे साइंस के बारे में एस्ट्रनॉमी एक्सपर्ट्स बताएंगे। डॉक्टर रत्नाश्री बताती हैं, पहली वर्कशॉप सोमवार को हुई। हमारे पास ढेरों बच्चे पहुंचे। उन्हें इस तरह से ट्रेन किया जा रहा है कि वे अपने स्कूलों में खुद इक्विप्मेंट लगा सकें। सूरज की तरफ सीधे नहीं देखना चाहिए इसलिए सोलर फिल्टर वगैरह की मदद ली जाएगी। डायरेक्टर ने बताया कि हमारी तय वर्कशॉप के बाद रेस्पॉन्स बढ़िया रहा तो हम और भी वर्कशॉप कर सकते हैं।

जाएं ऐतिहासिक इमारतों पर: अफ्रीका और साउथ अमेरिका के अलावा यह नजारा दुनिया के ज्यादातर कोने से दिखाई देगा। सुबह-सुबह होने वाले इस नजारे का गवाह बनने के लिए आप दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों में जा सकते हैं। इससे यह अनोखा नजारा ऐतिहासिक इमारतों की आड़ में कैमरे में भी कैद हो सकेगा। कई जगह वीनस ट्रांजिट सूरज उगते ही दिखने लगेगा। फटॉग्रफी के शौकीनों के लिए भी यह बढ़िया मौका है। एस्ट्रनॉमर्स बताते हैं, इससे पहले यह इवेंट 8 जून 2004 को देखा गया। यह 1874 में भी भारत में दिखा।नवभारत टाइम्स |

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