वीपी सिर्फ ‘राजनीतिज्ञ’ ही नहीं, ‘समाज के रुपान्तरक’ भी: महामहिम रञ्जित रे

DSC02426काठमांडू, २५ भाद्र । वीपी कोइराला भारत–नेपाल फाउन्डेशन और नेपाली लेखक एशोसिएसन के संयुक्त आयोजन में ‘वीपी कोइराला लेक्चर सिरिज– २०१३’ का आयोजन किया गया है । सोमबार को नेपाल–भारत लाइबेरी के सभाकक्ष में आयोजित उक्त कार्यक्रम में वीपी कोइराला के साहित्यिक और राजनीतिक योगदान तथा उनके व्यक्तित्व और जीवन के बारे में चर्चा–परिचर्चा की गयी । प्रमुख अतिथि तथा नवागन्तुक महामहिम भारतीय राजदूत रञ्जित रे द्वारा स्व. वीपी के तस्वीर पर मल्यापर्ण करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया था ।
कार्यक्रम उद्घाटन करते हुए महामहिम राजदूत रञ्जित रे ने वीपी कोइराला के साहित्यिक और राजनीतिक जीवन के अन्तरसम्बन्ध का विश्लेषण करते हुए कहा– ‘यह आश्चर्य की बात है कि इतने बड़े राजनीतिज्ञ होते हुए भी वीपी के साहित्यिक लेखनी में कोई भी राजनीतिक विचार और दृष्टिकोण दिखने को नहीं मिलता है ।’ महामिहम राजदूत रञ्जित रे का यह भी मानना है कि वीपी अपने साहित्यिक लेखन से सामाज और रुढीवादी सामाजिक संस्कृति में सकारात्मक रुपान्तरण चाहते थे । इसलिए वीपी का साहित्यिक कृति में समाज और संस्कृति के बारे में जितना गहन विचार और विश्लेषण है, वहाँ राजनीतिक विचार नहीं मिलता है ।
इसीतरह कार्यक्रम कें प्रमुख वक्ता प्रोफेसर डा. जयराज आचार्य ने भी वीपी कोइराला का व्यक्तित्व, उनके बाल्यकाल, प्रौढ अवस्था, साहित्यिक और राजनीतिक जीवन आदि के बारे में विस्तृत रुप में प्रकाश डाला । विशेषतः वीपी कोइराला द्वारा रचित, ‘मोदिआइन’, ‘तीन घुम्ती’, ‘नरेन्द्र दाई’, ‘सुम्निमा’ लगायत आदि कृतियों को लेकर उनके साहित्यक जीवन पर प्रो. डा. आचार्य ने विशेष रुप में व्याख्या किया । वीपी का बाल्यकाल, वीपी और भारतीय राजनेता के बीच की शरुआती सम्बन्ध, उनके संघर्षपूर्ण जीवन, भारतीय स्वतन्तत्रता में वीपीका योगदान आदि विषय में चर्चा करते हुए डा. आचार्य ने कहा कि वीपी एक सिर्फ राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक सामाजिक और सांस्कृतिक रुपान्तरण के एक क्रान्तिकारी योद्धा भी थे ।
DSC02410वीपी और आचार्य के बीच विभिन्न समय में हुए बातचित को स्मरण करते हुए आचार्य ने कहा कि उन का हर साहित्यिक कृति कोई न कोई रुप में वास्तविक जीवन पर आधारित हैं । यहाँ तक कि वीपी का कुछ साहित्यिक कृतियों में रहे पात्र और स्थान भी वास्तविक हीं है । कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आचार्य का वक्तव्य और वीपी सम्बन्धी विषयों को लेकर सहभागियों के साथ प्रश्न–उत्तर कार्यक्रम किया गया था । DSC02397
विभिन्न क्षेत्र के लेखक, प्रोफेसर, कुटनीतिज्ञ, साहित्यकार, पत्रकार आदि विविध क्षेत्र से जुटे गन्य–मान्य लोगों की उपस्थिति थी तथा उक्त कार्यक्रम में स्वागत मन्तव्य प्रोफेसर गोविन्द भट्टराई ने दिया था ।इस अवसर पर वीपी कोइराला भारत–नेपाल फाउन्डेशन के सचिव तथा PIC के प्रथम सचिव अभय कुमार ने कार्यक्रम के वारे मे प्रकाश डाला ।DSC02405

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