वीरगंज को स्वीटजरलैंड बनाने का वादा तो नहीं करुगां, पर विकास की ताला जरुर खोलूंगा : रहबर

 

रहबर अन्सारी “रहबर”

राह दिखाने के “राह” में रहबर, वीरगंज में सबसे कम उम्र के मेयर के उम्मीदवार

बिम्मी शर्मा, वीरगंज | वह अपने नाम जैसा ही काम करना चाहते हैं । रहबर अन्सारी “रहबर” बन कर वीरगंज के विकास का नेतृत्व चुनाव के माध्यम से लेना चाहते हैं । आगामी आश्विन दो गते (सेप्टेम्बर १८ तारिख) को प्रदेश नंबर दो अंतर्गत वीरगंज महानगर के होने वाले निर्वाचन में माओवादी केंद्र के उम्मिदवार के रुप में रहबर भी सहभागि हो रहे हैं । रहबर एक उर्दु शब्द है जिसका अर्थ होता है गाईड, लिडर या मार्गदर्शक । शायद नाम के प्रभाव के कारण ही रहबर बचपन से लिडर बन्ने का सपना पाल कर बडे हुए हैं । पर्सा जिले में माओवादी केन्द्र का प्रभावकारी असर नहीं हैं फिर भी पार्टी के जिला कमीटि सदस्य होने के साथ ही रहबर को गत भाद्र २ गते के निर्णय से उन्हे वीरगंज महानगरपालिका के मेयर के उम्मिदवार घोषित किया गया है । अपनी पार्टी प्रति अन्य लोगों के आमधारणा के बारे में रहबर कहते हैं “स्थानीय चुनाव में पार्टी से ज्यादा महत्व व्यक्ति को दिया जाना चाहिए, ईस में उम्मिदवार की योग्यता और क्षमता की परख होनी चाहिए । ” रहबर माओवादी केन्द्र अंतर्गत मुस्लिम मूक्ति मोर्चा के केन्द्रिय सदस्य भी हैं ।
रहबर वीरगंज के अपने मतदाताओं को मेट्रो और मोनो रेल का सपना नहीं दिखाते हैं । वह तो वीरगंज शहर की सडक, गल्ली और बजार की गंदगी कैसे व्यवस्थापन कर सकते हैं उस तरफ अपनीे ध्यान केन्द्रित करना चाहते हैं । राजनीति मे ही अपना भविष्य बनाने के लिए रहबर ने पढाई भी पोलिस मेकिगं संबधं मे ही किया है । रहबर राजनीति में आज आ कर कल खत्म हो जाने वाले पानी का बुलबुला जैसा बनना नहीं चाहते । वह तो राजनीति के लंबी रेसका घोडा बनना चाहते हैं । सात साल पहले माओवादी में प्रवेश करने वाले रहबर अभी उसी पार्टी कि तरफ से नेपाल का सबसे बाद का और छोटे महानगरपालिका के उम्र में सबसे छोटे मेयर के रुप में वीरगंज के मतदाताओं से प्रत्यक्ष मिल कर अपने भिजन के बारे में जानकारी दे रहे हैं ।
३१ वर्षीय रहबर अन्सारी का कहना है “ मुझे भाटे दे कर जिताओगे तो मैं वीरगंज शहर को पूरा बदल कर स्विटजरलैण्ड बनाने का वादा मैं नहीं करुगां । पर वीरगंज के विकास में लगा ताला अपने भिजन और कार्य से जरुर खोलुगां । अगर मैं जीत गया तो मेरा ध्यान वीरगंज और ईस क्षेत्र के कृषि में सुधार और वैज्ञानिकी करण करने कि तरफ होगा ।” यदि वह मेयर में निर्वाचित हो गए तो पर्सा जिला के खेतों को वीरगंज महानगर खुद एक साल के लिए ठेके में ले कर खेति करने कि उनकि योजना है । अपना परिचय “शोसल इन्टरप्रयोन्र” के रुप में देने वाले रहबर नें सात सात पहले वीरगंज के गंडक में ‘गंडक अस्पताल’ खोल कर अपने खुद के व्यवसाय का शुरुवात किया था । उससे पहले चितवन के मेडिकल कलेज में उन्होनें डेढ साल काम कर के अनुभव बटोरा था । वीरगंज मे उनका अस्पताल एक सौ बेड का है । अपने अस्पताल का स्वास्थ्य कर (हेल्थ टैक्स) सरकार को नियमित रुप से हर साल देते आ रहे हैं रहबर । रहबर के अब्बु भी डाक्टर हैं । यदि चाहते तो वह खुद भी डाक्टर बन सकते थे पर उन्होने अलग रास्ता चून कर अपना भविष्य राजनीति में जा कर नेता बनने कि ठानी । रहबर के बिचार में अयोग्य और अन्य पेशा या सीप से अनजान और बेरोजगार लोग राजनीति में आने के कारण ही देशका सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील यह क्षेत्र बदनाम हो रहा है । ईसी लिए राजनीति के प्रति अभी तक देश के नागरिकों के मन में कायम परम्परावादी सोच और वितृष्णा को रहबर योग्य लिडर बन कर बदलना चाहते हैं ।
युरोप के सेन्ट्रल युरोपियन बिश्वविद्यालय से पब्लिक पोलिसी एण्ड गवर्नेन्स में मास्टर्स करने वाले रहबर ओएफआइडी ( इँक्ष्म् ) के नेपाल से सेलेक्ट होने वाले दुसरे स्कलर भी है । ओएफआइडी ने दुनिया भर से आवेदन देने वाले २० हजार नागरिकों में से सिर्फ विद्यार्थियों को सेलेक्ट करता है । पढाई और विभन्न तालिम के सिलसिला में रहबर अब तक १९ देश घूम चूके हैं । विभिन्न देश घुमते हुए रहबर ने यहां के शासक और मेयर से भेंट कर उनकि देश विकास संबंिध नीति के बारे में गंभीर छलफल भी किया था । रहबर कहते है कि यदि वह वीरगंज के मेयर पद में जीत जाएगें तो वह उसी अनुसार यहां के विकास की नीति अवलम्बन करेगें ।
काठमाडू के ग्यालेक्सी स्कुल से एसएलसी पास करने के बाद रहबर ने भारत के पुना मे स्थित सिम्बोसिस ईंस्टिच्यूट से बिबिए किया है् । शर्मिले स्वभाव के रहबर वीरगंज महानगर के मेयर का अन्य प्रत्याषियों से प्रचार, प्रसार में पिछे दिखते हैं । ईस पर वह कहते है “मैं शोसल मीडिया में ज्यादा प्रचार, प्रसार में बिजी नहीं हु पर फिर भी मै अपने मतदाताओें के सिधे संपर्क में हुं । मैं प्रचार से ज्यादा क्वालिटी टाइम और काम करने में बिश्वास करता हुं ।” बाढ से परेशान पर्सा जिले के विभिन्न गावँ मे मेयर के अन्य उम्मिदवार खुद के द्धारा बांटे गए राहत सामग्री का प्रचार जिस तरह से फेसबुक में कर रहे हैं रहबर उससे अलग है । इस बारे में वह कहते हैं “मैं भी राहत बांटने गावँ, गावँ जाता हुं, पर वह मेरा व्यक्तिगत सहयोग है । ईस को मैने अपने राजनीतिक दल और चुनाव को ईस से जोडा नहीं है ।”
गर्भवती महिलाओं की दयनीय अवस्था के प्रति अत्यंत संवेदनशील रहबर ने वीरगञ्ज का मतदातओें ने अगर मेयर में खुद को निर्वाचित किया तो ईन गर्भवती महिलाओं को अस्पताल या अन्य जगहों मे जाने, आने के लिए सुविधायुक्त निशुल्क सवारी साधन को व्यवस्था करने का प्रयास करने की बात कही । यदि रहबर जितते हैं तो वृद्धभत्ता बढाने से ज्यादा वृद्धवृद्धओं को मिलने वाले भत्ते की रकम उनके घर में ही पहुंचाने का प्रवंध करेगें । वह बडे, बडे कामो को करने से ज्यादा ध्यान छोटे और जल्दि पूरा होने वाले कामों को करने और निबटाने मे समय देने की बात करते हुए रहबर अपनी आगामी योजनाओं की गठरी धिरे धिरे खोलते हैं । आकर्षक व्यक्तित्व के धनी रहबर धिरे से मुस्कुराते हुए कहते हैं “करना चाहो तो कोई भी काम असंभव नहीं है, ईसीलिए यदि मैं मेयर में निर्वाचित हो गया तो वीरगंज महानगरपालिका की आयव्यय को पारदर्शी बनाने के साथ। साथ ईस शहर की अव्यवस्थित बाजार को भी व्यवस्थि करने का प्रयास करुगां । ” जिस के तहत सब्जी, फलफूल और मास, मछली के अबव्यस्थित बाजार को अलग, अलग करके व्यवस्थित बनाने की पहल करेगें । यीन बाजारों को सजा, सवांर कर ग्राहकों को कैसे आकर्षित किया जाय ईसकी भी उन व्यापारियों को तालिम देने की उनकी योजना है ।

वीरगंज बाजार से हरेकदिन मास, मछली की अव्यस्थित बिक्री और सफाइ से चार सौ टन कूडा निकलता है । ईन कूडों के कारण शहर का प्रदुषण बढ रहा हैं । ईस ओर चिंतित रहबर आगे अपनी योजना बताते हैं “ ईस कूडे महानगरपालिका गढ्ढा खोद कर उसमे ईसे गाड कर ईस से मल बना सकता है । यह मल किसानों को बिक्री कर के वीरगंज महानगरपालिका अपने लिए अतिरिक्त आम्दानी कर सकता है । ईस के अलावा वीरगंज शहर की गली सकंरी है जिस में उबड, खाबड सडक से यहां के नागरिकों को मुख्य बाजार और अन्य जगहों पर पहुंचने में ज्यादा वक्त लगता है और दिक्कत भी होती है । ईस बारे में भी रहबर कि योजना है “ईन गलियों को पार कर के बाजार तक पहुंचने मे लगने वाले १५ मिनेट के वक्त को घटा कर सिर्फ ४, ५ मिनेट में पहुंचाने के लिए ईन रास्तों का मर्मत करवा कर आसान बनवाउगां । सरकारी स्कुल में बच्चों को स्कूल समय में दोपहर के खाने की व्यवस्था नियमित रुप से करवाने की प्रयास करुगां । उसी तरह पर्सा जिला के विभिन्न मठ, मदिंर के पूजारी, मस्जिद के मौलवी और चर्च के पादरीयों को भी मासिक वेतन दे कर ईन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की संरक्षण करने की उनकी योजना है । रहबर कहते हैं“ यीन पूजारी, मौलवी और पादरीयों को सरकारी कर्मचारी की तरह मासिक वेतन की व्यवस्था करने से यह यीन पवित्र धार्मिक स्थलों की संरक्षण और ज्यादा जिम्मेदारी के साथ करेगें । ” रहबर की योजना रबर की तरह लंबे और खिंचने वाले न हो कर छोटे छोटे पर अनगिनत है ।
अभी तब वीरगञ्ज महानगर में मेयर के रुप में जिसने भी चुनाव जीता है उस ने ईस शहर के विकास से ज्यादा सिर्फ खुद के कमाने वाले साधन के रुप में ही प्रयोग किया है । मतदाताओं ने भी आर्थिक प्रलोभन मे पड कर मतदान करने के प्रति गंभीर रहबर कहते हैं “पहले खाना, नगद और विभिन्न प्रकार के उपहार और अपने मनपसंद उम्मिदवार के जितने पर पद और पावर से अपना मनचाहा करवाने कि सोच रख कर मतदान करने वाले मतदाता जब शिक्षित और योग्य हो जाते हैं । तब शहर और देश के विकास के महत्व को अच्छी तरह समझ लेते हैं तब सडक निर्माण, उद्योग स्थाप्ना और अपने लिए रोजगार देने कि योजना लाने वाले उम्मिदवार को ही अपना अमूल्य मत दे कर जिताने का प्रयास करेगें । हर सार्वजनिक और सरकारी निकाय में अपारदर्शी और अनियमित काम ज्यादा होने कि तरफ अपना ध्यान खिंचते हुए ईसको कम करने के लिए ठोस कदम बढाना चाहते हैं ।
यदि ईस के बाद भी मतदाता ने उन पर बिश्वास नहीं किया और वह हार गए तो भी खुद को हताश और निराश न बना कर आगे बढने जाने की अपनी योजना को बताते हुए रहबर आगे कहते हैं “मेरी पसंद और ध्यान नीति निर्माण में है, ईसी लिए निर्वाचन में पराजित हो भी गया तो वहां तक पहुंचने के लिए अपनी योजनाआें से नीति निर्माण तह को अपने कार्यों से प्रभावित करने कि कोशिश करुगां जिससे देश के नागरिककों का ज्यादा से ज्यादा भला हो । अंत मे रहबर हंसते हुए कहते है “मेंयर का यह चुनाव मेरी परीक्षा अवश्य है, पर यही मेरी अतिंम परीक्षा नहीं है । ” सूरज कि रोशनी चेहरे में भर कर जब रहबर यह कह रहे थे तब वह सच में “रहबर” जैसा ही लग रहे थे ।

 

रहबर अन्सारी “रहबर”

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