वीरगन्ज भन्सार तस्करों का संसार !

अनिल तिवारी:वीरगन्ज भन्सार के पास एक किलो मीटर की दूरी में आधा दर्जन से ज्यादा चेकपोस्ट होने पर भी खुलेआम तस्करी हो रही है । अर्थ मन्त्रालय के लिए सब से ज्यादा राजस्व संकलन होने वाला वीरगञ्ज भन्सार कार्यालय क्षेत्र में यह तस्करी हो रही है । अर्थ मन्त्रालय और गृह मन्त्रालय दोनों के अर्न्तर्गत रहने वाले जनपथ पुलिस, सशस्त्र पुलिस और वीरगन्ज भन्सार कार्यालय के कर्मचारियों की टोली यह सब मिल कर एक किलो मीटर की दूरी में आधा दर्जन से भी ज्यादा जगहों में जाँच करते हैं । फिर भी तस्करी धडÞल्ले से हो रही है । यह काम वीरगन्ज भन्सार कार्यालय के भ्रष्ट कर्मचारी, तस्करों के साथ मिल कर आराम से कर रहे हैंं । भन्सार प्रमुख रामहरि आचार्य और राजस्व अनुसन्धान कार्यालय बारा पथलैया के प्रमुख सन्तोष श्रेष्ठ की मिलीभगत में यह काम हो रहा है ।
वीरगन्ज भन्सार कार्यालय द्वारा राजस्व असूली से ज्यादा ध्यान इस नाके से तस्करी अंजाम कराने मे दिया जाता है । राजस्व चुहावट नियन्त्रण करने के लिए नेपाल सरकार से मुख्य जिम्मेदारी दी गई सशस्त्र पुलिस पोस्ट की स्थापना वीरगन्ज भन्सार में की गई है । लेकिन सशस्त्र के डीएसपी वेणु पाठक को तस्कर से मिलने वाले मासिक नजराना के चलते यह नाका तस्करी के लिए उर्बर साबित हो रहा है । हरेक दिन सुबह पाँच बजे से आठ बजे तक और शाम को सात से रात्रि दस बजे तक टैम्पु, र्साईकल, ठेला और अपंगों के लिए टर््राईसाइकल में विभिन्न सामान तस्करी की जाती है । इसके अलावा वीरगंज के वडा नंं १९ में अवस्थित इनरवा नाका और बजार छपकैया के भकुवा नाका से भी दैनिक करोडÞों का कपडÞा, मोटरपार्टस्, मसाला, गुट्का, किराने का सामान, इलोक्ट्रोनिक सामान वीरगंज में अवैध रूप में प्रवेश पाते हैं । इनरवा और भकुवा पुलिस चौकी के प्रमुख तस्करों के साथ मिल कर खुलेआम तस्करी को अन्जाम देते हंै, ऐसा स्थानीय लोगों का आरोप है । इस धन्धे में सीमावर्ती भारतीय शहर रक्सौल निवासी रामाशंकर गुप्ता, गुड्डु अग्रवाल, छपकैया-२ निवासी मुन्ना साह, वडा नं. ३ निवासी अताउलहक राकी, वीरगन्ज १३ घडिअर्वा निवासी मदन यादव -रुन्चे) और हरिनारायण गुप्ता को कपडÞा, बर्तन, मोटरपार्टस् पाउडर दूध, इलोक्ट्रोनिक्स का सामान तस्करी के लिए लाईन दी गई है, ऐसा स्थानीयवासी का कहना है ।
इसी तरह अपंगोंं के टर््राईसाइकल, तागा और टैम्पु का प्रयोग कर हरेन्द्र पटेल, दिनेश यादव, विनोद साह, वीरेन्द्र पटेल, हरिन्द्र यादव, आदि लोगों को तस्करी के लिए लाइन दी गई है । इसी तरह भन्सार आसपास के जटाधारी, हरिन्दर, भिखारी, सुरेन्दर अनवतीलाल, मोलवी उर्फनुरैन, अरविन्द, प्रकाश आदि लोगों को गुट्खा, कपडÞा और खुदरा सामान की तस्करी के लिए लाइन मिली है ।
जिला पुलिस कार्यालय पर्सर्ााौर नारायणी अञ्चल पुलिस कार्यालय द्वारा बरामद की हर्ुइ ट्रकों द्वारा इस बात की पुष्टि होती है । एक वर्षके दौरान में वीरगञ्ज भन्सार कार्यालय से छुटी एक दर्जन से भी ज्यादा ट्रकों को जनपथ पुलिस ने अपने नियन्त्रण में लेकर पुनः चेक के लिए राजस्व अनुसन्धान पुलिस कार्यालय पथलैया में भेजा है । इस मामले में व्यापक राजस्व हेराफेरी करने वाले कतिपय तस्करों पर केस चल रहा है । इसके बारे में वीरगञ्ज भन्सार कार्यालय के प्रमुख रामहरि आचार्य से पूछे जाने पर उनका घिसा-पिटा एक ही जवाब रहता है- यह प्राविधिक गडÞबडÞी है ।
इतना ही नहीं भन्सार से छुटे ट्रकों का,े जनपथ से तस्करों के पक्ष मंे सशस्त्र पुलिस द्वारा अपने नियन्त्रण में लेने के बाद, जनपथ और सशस्त्र पुलिस में महासंग्राम चला था । लेकिन बाद में मामले को दबा दिया गया । तस्करों से प्राप्त सामानों का कागज सही करके महाशक्ति ट्रांसपोर्ट, जय बजरंगबली, पशुपति कैरियर से काठमांडू, नारायणगढ और पोखरा भेजा जाता है । जिस में पथलैया स्थित राजस्व अनुसन्धान कार्यालय के प्रमुख सन्तोष श्रेष्ठ और अधिकृत बुद्धि पन्त आदि ‘राष्ट्र सेवक’ कर्मचारियों का भरपूर सहयोग रहता है । इस तरह प्रत्येक दिन लाखों का राजस्व सरकारी आमदनी में नहीं आ रहा है । फिर भी अर्थ मन्त्रालय और राजस्व अनुसन्धान विभाग दोनों कान में तेल डाल कर और आँख बन्द कर आराम से सो रहे हैं ।

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