वीरगन्ज

भन्सार के दोषी कर्मचारियों पर कारवाही हो
वीरगन्ज। आर्थिक राजधानी के नाम से चिरपरिति वीरगन्ज में भन्सार के कर्मचारियों द्वारा बडे पैमाने पर राजश्व चोरी करने का रहस्य खुला है। ऐसे काम के लिए देश के विभिन्न स्थानों में सुरक्षित रुप से मालसामान पहुँचाने के लिए वीरगन्ज के दो दर्जन से ज्यादा टान्सपोर्ट लगे हुए है।
चोरी छीपे आनेवाले इन सामानों में सबसे बडÞा हिस्सा कपडÞे का होता है। विदेश से आयातीत सामान का भन्सार द्वारा जाँच कर सवारी साधान में टाँचा लगाने के बाद बीच में कोई उसे नहीं खोल सकता, इस नियम के चलते भन्सार के कर्मचारी ब्रहृमलूट मचा रहे हैं। वीरगंज भन्सार कार्यालय से जाँच के बाद शिलबन्दी कर छोडेÞ गए ट्रक में भन्सार कर्मचारियों की मिलीभगत में सामान का कम मूल्यांकन किया जाता है और इस तरह राजश्व की बडÞी ठगी होती है।
इसतरह लाखों का अवैध सामान मध्यमाञ्चल राजश्व अनुसन्धान इकाइ कार्यालय द्वारा बरामद होने पर भी उसे ऐसे ही छोडÞ दिया जाता है, इससे प्रमाणित होता है कि भन्सार और राजश्व आपस में मिलकर ही ब्रहृमलूट कर रहे हैं। भन्सार में शिलबन्दी किए हुए ट्रक से राजश्व घटाकर अवैध रुप में प्रज्ञापनपत्र में घोषित मात्रा से बहुत ही ज्यादा सामान बरामद होने की बात मध्य क्षेत्रीय इकाइ राजश्व अनुसन्धान कार्यालय के प्रमुख र्सर्ूय सेढर्Þाई बताते है।
वीरगन्ज भन्सार कार्यालय के प्रवक्ता लक्ष्मणसिंह श्रेष्ठ कहते हैं- सुराकी और शंका के आधार पर सुरक्षा निकाय और राजश्व कर्मचारी द्वारा भन्सार जाँच किए गए ट्रकों को भी जाँचते समय ट्रान्सपोर्ट मार्फ आए हुए ट्रक में राजश्व की गडÞबढÞी वाले सामान मिलते हैं। जानकारों का कहना है पशुपति रोड क्यारियर्स, महाशक्ति, विनोद, वजरङ्ग वली, अशोक और भारतीय आई.पी लगायत के ट्रान्सपोर्ट अघोषित रुप में राजश्व की गडÞबढÞी करते हुए माल सामान की ढुवानी करनेका ठेका लेते हैं।
विनोद रोडवेज और अशोक रोडवेज को तो बार बार दो नम्बरी धन्दा करने के कारण राजश्व अनुसन्धान पथलैया और काठमांडू ने ‘ब्लैकलिस्ट’ में रखा है। इतना होते हुए भी उन दोनों ने वीरगञ्ज भन्सार कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत में पशुपति रोड क्यारियर्स के नाम में अवैध रुप में सामान की ढुवानी जारी रखी है।
सरकारी गाडÞी का दुरुपयोग
वीरगन्ज। पर्सर्ााजल्ला में सरकारी कार्यालयों की गाडÞी का व्यापक दुरुपयोग हो रहा है। कोष तथा लेखा नियन्त्रण कार्यालय की गाडÞी हो या अन्य कार्यालय की गाडी शादी-विवाह, मदिरालय और होटलों में प्रायः देखी जाती है। सम्बन्धित निकाय द्वारा अनुगमन न होने के कारण ही सरकारी कार्यालयों की गाडÞी का अत्यन्त दुरुपयोग हो रहा है, ऐसा र्सवसाधारण का कहना है।
अपना रुतवा दिखाने के लिए सरकारी गाडी का दुरुपयोग प्रायः हो रहा है, इसे नियन्त्रण करना जरुरी है। भारतीय सीमा क्षेत्र में रौक्सल से सामान खरीदकर लाने के लिए, होटल में जाने आने के लिए, दिन हो या रात कार्यालय के अफसर लोग व्यापक रुप में गाडी का दुरुपयोग कर रहे हैं। सिर्फसरकारी काम में इन गाडियों का प्रयोग होना चाहिए था, लेकिन इन का अधिकतम प्रयोग निजी कामों में हो रहा है, तर्सथ इस ओर सम्बन्धित निकायका ध्यान जाना जरुरी है।
डाक्टर और प्याथोलोजी के बीच कमीशन का खेल
वीरगन्ज। वीरगंज में प्याथलोजी के डा. रामावतार खेतान, डा. अमरनाथ ठाकुर और डा. रामानन्द चौरसिया ही तीन डाँक्टर है, लेकिन ल्याव की संख्या ५० से अधिक है। और नेपाल हेल्थ प्रोफेशनल काउन्सिल काठमांडू से इजाजत लेकर ल्याब खोलने का क्रम जारी है।
सम्बन्धित चिकित्सक के अभाव में खुले हुए ऐसे बहुतसारे ल्याब है, जिनके रिपोर्ट अविश्वसनीय हैं। विश्वसनीय नहीं होने का कारण है दक्ष जनशक्ति का अभाव और पर्याप्त मात्रा में केमिकल का प्रयोग न होना भी है। नारायणी उपक्षेत्रीय अस्पताल में भी अभी एक भी प्याथोलोजिस्ट नहीं है। प्याथोलोजिस्ट के अभाव में ल्याब टेक्निसियन द्वारा रिपोर्ट बनाने पर समय-समय में ल्याब विवादित होता रहा है।
अस्पताल ने प्याथोलोजी चिकित्सक की माँग की थी, मगर अभी तक विभाग से किसी को नहीं भेजा गया है। विगत दो वर्षों से नाउक्षे अस्पताल में ल्याब टेक्नेसियन ही ल्याब चला रहे हैं। ल्याब टेक्निसियन का कहना है कि सम्बन्धित डा. ६० से ७० प्रतिशत तक कमीशन लेते हैं। वीरगंज में सञ्चालित ल्याव प्रयोगशालाओं से गलत रिपोर्ट आने का प्रमुख कारण यह भी है। ल्याब परीक्षण के बारे में सेवाग्राही में अज्ञानता और ल्याब रिपोर्ट के सम्बन्ध में कई  शिकायतें औपचारिक रुप से नहीं होने पर गैरकानूनी प्याथोलोजी आराम के साथ सञ्चालन हो रहे हैं।
यद्यपि वीरगन्ज में अत्याधुनिक ल्याब के लिए अन्तर्रर्ााट्रय समाजिक संस्था रोटरी क्लब ने प्रयास किया था, मगर डाक्टरों की माँग के अनुसार कमीशन न देने पर सम्पर्ूण्ा उपकरण एडभान्स मेडिकेयर -एएमसी) को भाडा में दे दिया गया है। नाउक्षे अस्पताल से सेवा निवृत्त वीरगन्ज के सबसे पुराने प्याथोलेजिस्ट डा. रामअवतार खेतान कहते हैं- सही उपचार के लिए सही परीक्षण रिपोर्ट आवश्यक है। और सही रिपोर्ट पाना रोगियों का अधिकार भी है।

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