वैकल्पिक ‘नयी शक्ति’ पीछे क्यों ?

इस निर्वाचन में नयां शक्ति नेपाल, विवेकशील नेपाली और साझा पार्टी ने अपने को वैकल्पिक शक्ति कहते हुए निर्वाचन में भागीदारी जतायी थी । इन तीन समूहों में से नयां शक्ति पार्टी नेपाल ने प्रायः अधिकांश क्षेत्रों में उम्मीदवारी दी थी ।

पहले चरण के स्थानीय निर्वाचन सम्पन्न हो चुका है, जल्द ही दूसरे चरण के निर्वाचन होने जा रहा है । निर्वाचन के साथ–साथ राजनीति में नयी वैकल्पिक शक्ति की बहस भी आगे बढ़ रही है । गणतन्त्र स्थापना और संविधान जारी होने के बाद एक सशक्त समूह राजनीति में देखने को मिल रहा है । कहा जाता है कि अब पुरानी राजनीतिक शक्ति देश को आगे नहीं बढ़ा पाएगी, इसके लिए वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति की आवश्यकता है । ऐसे दावा करने वाले समूह भी पहले चरण के स्थानीय निर्वाचन में भाग लिए । अपने को नयी वैकल्पिक शक्ति दावा करने वाले का मानना था कि नयी शक्ति ही देश को आर्थिक रूप में मजबूत बना सकती है । उनका यह भी कहना था कि भ्रष्टाचार मुक्त समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए भी वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति की आवश्यकता है । इसीलिए पहले चरण में हुए निकाय चुनावों में तीन ऐसे समूह भी निर्वाचन में शामिल हुए, जो अपने को नयी शक्ति के रूप में दावा कर रहे थे । लेकिन उनके पक्ष में उत्साहजनक परिणाम देखने को नहीं मिल सका । अर्थात् अपने को वैकल्पिक राजनीति बताने वाले जो तीन दल थे, उन सभी को जनता ने इन्कार किया । आखिर क्यों ?
पहले चरण के निर्वाचन ३ प्रान्तों के ३४ जिलों में सम्पन्न हुए । उनमें से सबसे ज्यादा दिलचस्प और बहस का चुनाव था– काठमांडू महानगरपालिका का । इस निर्वाचन में नयां शक्ति नेपाल, विवेकशील नेपाली और साझा पार्टी ने अपने को वैकल्पिक शक्ति कहते हुए निर्वाचन में भागीदारी जतायी थी । इन तीन समूहों में से नयां शक्ति पार्टी नेपाल ने प्रायः अधिकांश क्षेत्रों में उम्मीदवारी दी थी । लेकिन विवेकशील नेपाली और साझा पार्टी का ध्यान सिर्फ काठमांडू महानगरपालिका और उपत्यका के कुछ स्थानीय निकायों में ही था । विवेकशील और साझा पार्टी की चाहत थी कि काठमांडू उपत्यका में उनकी बहुलता स्थापित हो । लेकिन ऐसा नहीं हुआ । हां, नयां शक्ति पार्टी नेपाल की तुलना में काठमांडू में विवेकशील और साझा पार्टी को ज्यादा मत मिला । जिसे देखकर आश्चर्य मानने वाले भी बहुत हैं । विवेकशील और साझा जैसे गैर–राजनीतिज्ञ समूह द्वारा गठित नयी पार्टी को जितना मत मिला है, उसकी तुलना में पूर्वप्रधानमन्त्री तथा राजनीतिज्ञ समूह द्वारा गठित नयां शक्ति पार्टी को कम ही मत मिला है । संक्षेप में परिणाम ऐसा आया कि राजनीति में नयी वैकल्पिक शक्ति की खोज और बहस करने वालों के पक्ष में निर्णायक मत नहीं मिल सका । पुरानी राजनीतिक शक्ति ही निर्णायक बन गयी । इसे देखते हुए विश्लेषकों ने कहा है कि राजनीति में नया विकल्प खोजने का समय ही नहीं आया है । ऐसे लोगों को मानना है कि जब तक मतदाताओं की चेतना में वृद्धि नहीं होगी, तब तक कोई भी वैकल्पिक शक्ति राजनीति में उभरने वाली नहीं है । लेकिन इसके विपरीत मत रखनेवाले भी लोग हैं । जिनका कहना है कि राजनीति में सबसे ज्यादा मायने राखने वाले क्षेत्र काठमांडू महानगरपालिका में परम्परागत शक्ति के साथ नयी शक्ति ने जो प्रतिस्पर्धा की है, इससे साफ है कि जनता विकल्प चाहती हैं ।

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