वैदेशिक रोजगार-अवैध यौन-सम्बन्धर्-गर्भपतन

विनय दीक्षित:सरकारने १२ हप्ता तक के गर्भपतनको कानूनी मान्यता तो दी है लेकिन अगर गर्भ ही अवैधानिक हो तो इस पर कई सवाल उठते हैं, कहीं सरकारी नीतिका दुरूपयोग तो नहीं हो रहा – या सरकारको जनसंख्या नियन्त्रण के लिए इससे बेहतर कोई रास्ता दिखाई नहीं देता – बाँके जिला का विकट माना जानेवाला राप्तीपार क्षेत्र, जहाँ ९ गाबिस हैं, बाँके जिला की करिब १ तिहाई जनसंख्या इस क्षेत्र में रहती है, जहाँ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सुरक्षा एक बडÞी चुनौती है। सरकार के ये बाध्यात्मक निकाय सभी गा.बि.स. में मौजूद हैं लेकिन पुलिस के अलावा बाँकी सभी की सेवा लज्जास्पद है।    abortion
स्थानीय क्षेत्र में रोजगार के लिए लम्बे अरसे से लोग भारतको अपना पहला स्थान मानते हैं, भारत के पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखण्ड और महाराष्ट्र में इस क्षेत्र के काफी युवा विभिन्न गैरसरकारी नौकरियों में आवद्ध हैं, लिहाजा बढÞती मंहगाई और सामाजिक तौर पर प्रतिस्पर्धा ने अब लोगों को तीसरे मुल्क अर्थात् दर्ुबई, मलेशिया, कोरिया, सउदी अरब, कतार जैसे देशों में काम करने पर मजबूर कर दिया।
पुराने जमाने में महिलाओं को घर के कामों की जिम्मेवारी दी जाती थी लेकिन अब समानता का जमाना है, महिलाएँ भी कदम से कदम मिलाने के लिए आतुर हैं, और पिछले दिनों में महिला अधिकारकर्मियों ने महिलाओं को आगे बढÞाने का उत्साहजनक काम किया और महिलाएँ भी विभिन्न निकायों के साथ साथ विदेशों में भी दिखाई देने लगीं। इसके कुछ सकारात्क पक्ष हैं तो कुछ नकारात्मक।
महिलाएं प्रगति करें यह बुरी बात नहीं है, लेकिन विना यौन शोषण विदेशों से महिलाएँ सुरक्षित अपने घर वापस आ जाएँ, यह उतना ही कठिन है जितना रेत में पानी ढूंढÞना। खैर यहाँ बात है- उन महिलाओं की जिनके पति काम के सिलसिले में भारत या अन्य देशों में हैं।
जिले का नरैनापुर, कालाफाँटा, लक्ष्मणपुर और कटकर्ुइंया गा.बि.स., यहाँ के ज्यादातर लोग रोजगार के लिए भारत में हैं या अन्य किसी देशों में, जिसमें कटकर्ुइंया और लक्ष्मणपुर के किसी-किसी गाँव में तो युवा ढूँढने से भी नहीं मिलते। पूरा गाँव विदेशों में हैं। बाँकी बची हैं सिर्फखेती करती महिलाएँ, बकरियाँ चराते बच्चे और दमे या अन्य रोग से ग्रस्त बीमार बुजर्ुग। बहुत कम ऐसे परिवार की तादाद है जो शिक्षित हैं और स्थानीय स्तर में कुछ कर रहे हैं।
यह सभी गा.बि.स.मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, यहाँ पर अशिक्षा की दर्दनाक अवस्था है। नेपाली गाँव होने के बावजूद भी इन गाँवों में नेपलीपन नहीं दिखता। राजनीतिक चर्चा से लेकर रिश्तेदारी और बाजार भी भारत का ही उपयोग करते हैं। भारत में अगर कोई चुनाव हो तो यहाँ की गलियों में चुनाव निशान के पोष्टर लगे रहते है, लिहाजा कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास भारतीय नागरिकता भी है।
इस क्षेत्र में सामान्य बीमार होना ठीक है लेकिन कोई जटिल या आपातकालीन समस्या हो तो लगभग उस मरीज को मृत्यु के सामने घुटना टेकना ही पडÞता है।
एक चिकित्सक ने हिमालिनी से बताया कि गर्भपतन की सम्पर्ूण्ा ब्यवस्था मौजूद नहोने के कारण जब महिलाओं को यह सुझाव दिया जाता है कि वे किसी बडÞे अस्पताल में जाएँ तो वैसी महिलाएँ सामाजिक छबि बिगडने के खतरे के कारण कहती हैं- रूपये जितना लगे मै लगाउँगी लेकिन यहीं समस्या का निदान कीजिए।
स्थानीय चिकित्सकों के अनुसार इस क्षेत्र में बीमार होने का बहाना बनाकर महिलाएँ डाक्टरों के यहाँ पहुँचती हैं और डाक्टरों से बताती हैं कि उनकी समस्या क्या है। भारत श्रावस्ती जिला गुलरा चौराहा पर क्लिनिक संचालन कर रहे एक चिकित्सक ने बताया कि प्रतिदिन ३/४ महिलाएँ उसके पास आती हैं- जिन का गर्भपतन कराना पडÞता है।
भारतीय सीमा से जुडÞे होने के कारण कई महिलाएँ यह सेवा घर पर ही लेती हैं, भारतीय क्षेत्र से दैनिक इन गावों में भारतीय चिकित्सक भी घर-घर उपचार करने आते हैं, जिनके पास न तो चिकित्सा क्षेत्र की ड्रि्री होती है और न ही लम्बा अनुभव।
बेरोजगार भारतीय युवा किसी डाक्टर के यहाँ कुछ दिन सहायक के रूपमें काम करते हैं और बाद में जनता उन्हे भी डाक्टर कहने लगती है। ज्यादा कमाई के चक्कर में वे नेपाल के गाँवों में अपनी सेवा देने प्रतिदिन भारतीय क्षेत्र से ही पहुँच जाते हैं, जिसकी डिमाण्ड ज्यादा है। वह किसी के घर में ही अपना अवैध क्लिनिक खोल लेता है, पुलिस से साँठगाठ कर अपना काम करता है।
कालाफाँटा निवासी हरिवंश मौर्य ने कहा- इस तरह उपचार करने वाले चिकित्सक उपचार के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण भी करते हैं, लेकिन विषय सहमति और आवश्यकता का होने के कारण घटना प्रकाश में नहीं आती है। मौर्य ने बताया कि महिलाएं ज्यादातर मुस्लिम होने और यौन शिक्षा का ज्ञान नहोने के कारण असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाती हैं, जिसके कारण गर्भवती होती हंै। डाक्टरों को भी लगता है कि उपचार कराएगी नहीं तो जाएगी कहाँ, और ३ से ५ हजार भारतीय रूपए लेकर उनका गर्भपतन किया जाता है।
इस क्षेत्र से नेपालगंज नगरपालिका करीब ५६ किलोमीटर की दूरी पर है, नेपालगंज स्थित केयर हस्पिटल, भेरी अंचल अस्पताल जैसे कई जगह गर्भपतन का काम होता है, जहाँ सस्ता और सुरक्षित भी होता है, लेकिन रास्ते और सुविधाओं के अभाव में महिलाएं भारतीय क्षेत्र में असुरक्षित गर्भपतन सेवा लेती हैं।
नेपालगंज स्थित मेडिकल संचालक राकेश बहादुर श्रीवास्तव ने बताया कि इस तरीके से किया गया गर्भपतन खतरनाक होता है। इसकी दवाईयो के कारण महिला के स्वास्थ्य पर गहरा असर होता है, जिसे रिप्लेसमेन्ट करने के लिए सही जगह और सही उपचार की जरूरत होती है।
श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार ने १२ हफ्ते के गर्भको पतन करने के लिए कानूनी मान्यता दी है लेकिन भ्रूण चेक करना वैधानिक नहीं है, भू्रण चेक करने की ब्यवस्था नहीं है।
कालाफाँटा में क्लिनिक संचालन कर रहे चिकित्सक विश्राम रैदास ने बताया- पति बाहर होने के कारण यौन चाहना स्वरूप एक ही महिला से कई पुरुष या कई महिला का एक ही पुरुष से अवैध यौन सम्बन्ध बनाने के कारण एच.आई.भी. के केस भी बढÞते जा रहे है।
रैदास ने बताया- असुरक्षित यौनजन्य क्रियाकलाप के कारण यौन सम्बन्धी समस्याएँ तो आम हैं। पूरे क्षेत्र में पचास से अधिक महिलाएँ और पुरुष एच.आई.भी.की चपेट में हंै लेकिन सही जगह में उपचार न लेने के कारण स्वास्थ्य-अवस्था लगातार बिगडÞ रही है।
नेपालगंज जाने की हिदायत दी जाती है तो महिलाएँ भारत स्थित भिन्गा या बहर्राईच चली जाती हैं। इन मामलों में उपचार से ज्यादा गोपनीयता को ग्राहृयता दी जाती है, कई महिलाएँ जो डेन्जर जोन में हैं उन्हें बहर्राईच रेफर किया जाता है -रैदास ने बताया।
गा.बि.स. के रर्ेकर्ड अनुसार भारत तथा खाडी देशों में नरैनापुर, कालाफाँटा, लक्ष्मणपुर और कटकर्ुइंया गाबिस से क्रमशः २ सौ ९०, ३ सौ ८५, ३ सौ ५० और ४ सौ ६६ लोग बस कर काम कर रहे हैं।

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