वैदेशिक रोजगार से श्रीमान् श्रीमती के बीच सम्बन्ध विच्छेद होरहा है

हेमन्त राज काफले

हेमन्त राज काफले

हेमन्त राज क्फ्ले, नेपालगंज,३० अगस्त |वैदेशिक रोजगार को नेपाल के एक प्रमुख आय श्रोत के रूप में पाया जाता है । हमारे देश के युवा विदेश न जायें तो कोई उपाय भी नही है । युवाओं के लियें कोई विशेष योजनाए“ सरकार ने नहीं बनायी है । स्वरोजगार के नाम में अधिक लोभ लालच युवाओं का बा“टा जाता है लेकिन तो भी प्रभावकारी नही बन पाया । वैदेशिक रोजगार से मुलुकों विप्रेषण मार्फत ज्यादा टेवा पहु“चा है लेकिन अब यह वैदेशिक रोजगार के कारण से हजारों घर बर्बाद हो चुके हैं । हजाराें श्रीमान् श्रीमतियों का सम्बन्ध विच्छेद हुआ है । दैनिक सम्बन्ध विच्छेद होता रहता है, सम्बन्ध विच्छेद करने वाले अदालत पहु“चते रहते हंै जिस के कारण बना है केवल वैदेशिक रोजगार ।

वैदेशिक रोजगार ने श्रीमान् श्रीमती के बीच सम्बन्ध विच्छेद से सम्पूर्ण घर परिवार और अपने नजदीक के लोग भी चिन्तित रहते है । अपने देश में रोजगार न पाने के नाते भी अपने सुन्दर भविष्य के सपना के साथ परिवार का भरण पोषण करने के लियें विदेश जाते हैं उस के बाद अधिकतर श्रीमती सास ससुर को त्यागकर या उन लोग के साथ रहना नहीं चाहती है फिर वो लोग बाहर निकलकर शहर में रहना अच्छा मानती है । और शहर के जीवन के साथ घुलमिल जाती है साड़ी ब्लाउज के जगह में जीन्स का पैन्ट लेडिज टीसर्ट और विभिन्न प्रकार के आधुनिक फैशन के कपड़े पहना पसन्द करती है और शहर के जीवन के साथ घुलमिल जाती है । श्रीमान के भेजे रुपैया“ से मौजमस्ती करती है बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाती है जिससे बच्चे बिगड जाते हैं । कभी फिल्म हाल तो कभी होटल रेष्टुरेन्ट और कटेजों में दौड़ती रहती है । कभी कभी शहर के लड़के जो बेरोजगार हैं जिस को पैसे की आवश्कता है वो उन लोगों के साथ फंस जाती है । और उन युवाओं के साथ अफ्ना दिन व्यतीत करने लगती है । कुछ महिलाए“ तो वैसे लड़कों को समाज में दिखाने के लियें divorceभाई भी मानती है और वही लडकों के साथ अच्छी तरह से दिनचर्या बिताने लगती है ऐसी घटनाए“ एक के बाद दूसरा करके सार्बजनिक होती रहती है, यह बातें समाज के लियें अच्छी नही है । श्रीमान् विदेश की ५० डिग्री तापक्रम में समय में खाना ना खाकर भूखा रहकर परिवार के सुन्दर भविष्य के लियें सपना देखते हुए काम करता रहता है, वह किस के लिये एकबार सोचना चाहिये उसी परिवार के लिये , लेकिन इधर श्रीमती तो अनावश्यक अनाहकों में पैसा खर्च करती है और विभिन्न पर पुरुषों के साथ मन बहलाती है । कहने का मतलब यह है कि सभी महिलाए“ ऐसी कदापि नहीं होती है । किन्तु दिन प्रतिदिन घटनाए“ ऐसी बढती जा रही है इस लिये कह रहा हूं । महिला मात्र बिगड़ी नहीं हैं यहा“ तो हजारों घर बरबाद हुये हंै दिन प्रतिदिन पत्रिका में पढ्ते आ रहें है एक अभी की बात है एक सामाजिक अभियन्ता के रूप में परिचित दान बहादुर शाही की श्रीमती रुक्मा कुमारी शाह (रुवी ) को क्या कमी थी, खुशियाली पूर्ण जीवन परिवार में रहकर वो अपना जीवन बिता रही थी, दान बहादुर शाही मलेसिया होते हुयें सिगांपुर पहु“चा बेचारा आर्थिक आय आर्जन मनग्य किया सम्पूर्ण घर जगह श्रीमती के नाम में कर दिया, श्रीमती को प्राण मान रहा था श्रीमती को दान बहादुर अधिक बिश्वास करते थे लेकिन आज वही श्रीमती धोखा दे दी दान बहादुर को कैसा हो रहा है उस का दिल रो रहा एकबात और है जब श्रीमान् का दिल रोएगा तो वो श्रीमती कभी भी खुशहाल नही रह सकती ? क्या दूसरे मुलुक में दानबहादुर को काम करने में कठिन नही हुई होगी कैसी दुःख मुसीबत उठानी पड़ती है? किस चीज की कमी थी दान बहादुर में ? और इसी तरह २० बर्ष पुराना श्रीमान् श्रीमती का सम्बन्ध क्षण भर में राख हो गया । बा“के जिला खजुरा के सोमन बहादुर पाण्डेय के साथ विवाह कर लिया रुबी ने । यह तो एक मात्र उदाहरण है ऐसे उदाहरण हजारों हंै हमारे समाज में । ऐसे परिवार– परिवार बीच का सम्बन्ध ही तोड़ दिया वैदेशिक रोजगार ने । इसी तरह दिन प्रति दिन परिवार के सदस्यों को चिन्तित बनायें तो बेटा बेटियों को मानसिक तनाव में रखें तो भी सम्बन्ध विच्छेदों से विकराल रूप ले सकता है । ऐसी समस्याए“ अभी तक तो प्रत्येक गँ“व–गा“व में होती रहती है । कितनी श्रीमती बेपत्ता हुई है कितनी श्रीमतियों ने आत्महत्या की है । कुछ क्षणिक के लियें बर्षो वर्ष के पुराने जुड़ हुए सम्बन्ध एक क्षण भर में ही किसी के बहकावे में टूट जाता है ऐसी समस्याए“ समाज में बढ्ने न देने के लिए बिशेष तो विदेश रहने वाले श्रीमान् को अपनी श्रीमती के सम्पर्क में रहना पड़ता है । वर्ष में एक बार हो सके तो भी घर आना चाहियें । हो सके तो श्रीमती को अकेले ही कमरे में किरायें पर रखना नही चाहियें अपने परिवार माता पिता के साथ घर पर ही रखना चाहियें । यह वैदेशिक रोजगार के कारण से किसी किसी का तो घर बरबाद न हो इस लियें सभी लोग अपने अपने जगह से ऐसी सामाजिक विकृतिया“ को समाज में बढ्ने न देने के लियें और समाज परिवार को मर्यादा लांघकर कोई भी नाजायज काम न करें । समाज सुधार उस के बाद सम्पूर्ण परिवारों को खुशी बनाए“ और ऐसे सम्बन्ध विच्छेद जैसी विकृतिया“ को अन्त करने के लियें हम सभी लोगों को जुटना आवश्यक हैं ।

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