Thu. Sep 20th, 2018

वैद्य पक्ष का प्रचण्ड पर १८ आरोप

माओवादी अध्यक्ष मोहन वैद्य किरण ने पार्टीअध्यक्ष प्रचण्ड पर १८ आरोपों की एक फेहरिस्त तैयार की है । प्रचण्ड के खिलाफ गए आरोपों को मोहन वैद्य ने पार्टर्ीीे जिला स्तर तक के कार्यकर्ताओं को भेजा है । अपने आरोप में मोहन वैद्य ने कहा है कि प्रचण्ड राष्ट्रवाद के खिलाफ जाते हुए आत्मर्सपणवादी बन गए हैं । पिछले महीने ही मोहन वैद्य द्वारा तैयार किए गए इस आरोप पत्र को ‘अध्यक्ष प्रचण्ड में देखे गए विचलन’ नाम दिया हुआ है । वैशाख महीने से ही इस आरोप पत्र को देश भर में आयोजित वैद्य समर्थित कार्यकर्ताओं के गोपनीय प्रशिक्षण के दौरान वितरित किया गया है । मोहन वैद्य ने प्रचण्ड पर लडाकु समायोजन के नाम पर शिविर को खाली करने और माओवादी को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है । मोहन वैद्य ने पार्टीअध्यक्ष प्रचण्ड पर जो १८ आरोप लगाए है, वह इस प्रकार हैः-

१. दर्शन में संग्रहवादी ।
२. राजनीति में मध्यपन्थी अवसरवादी होते हुए दक्षिणपंथी सुधारवादी की तरफ उन्मुख होना ।
३. प्रधान अन्तरविरोध भारतीय विस्तारवाद की दलाल पँूजीपति वर्ग के स्पष्ट होने के बाद भी व्यवहार में उसका कार्यान्वयन नहीं होना ।
४. राष्ट्रीय स्वाधीनता के नारा को आन्दोलन का मूल केन्द्रविन्दु बनाने के बदले उसको दरकिनार करना ।
५. संयुक्त वामपंथी मोर्चा देशभक्त और गणतन्त्रवादी शक्तियों के साथ गठजोड करने के पार्टर्ीीे आधिकारिक निर्ण्र्ााको नजरअंदाज करते हुए भारतीय विस्तारवाद परस्त और उनके दलालों से सांठगांठ रखना ।
६. जनव्रि्रोह को कार्यदिशा और शान्ति तथा संविधान को कार्यनीति बनाने के पार्टर्ीीे निर्ण्र्ााके विपरीत सिर्फशान्ति और संविधान को ही अपनाने की ओर अग्रसर
७. संविधान निर्माण में जनता का संघीय गणतंत्र तय किए जाने के पार्टर्ीीे निर्ण्र्ााके विपरित व्यवहार में सिर्फलोकतान्त्रिक गणतन्त्र को ही प्रमुखता देते हुए उसे लागू करने के लिए हमेशा प्रयासरत रहना ।
८. जातीय स्वायत्ता के संघीय प्रणाली में जाने के बावजूद व्यवहार में एकात्मक शासन प्रणाली के लिए लाँबिंग करना । आत्मनिर्ण्र्ााके अधिकार को नजरअंदाज करना ।
९. र्सार्वभौम जनता की मान्यता अनुसार जनप्रतिनिधि को अधिकार संपन्न बनाने के बदले संसदीय दलों के चंगुल में फंसकर दो सदनात्मक व्यवस्था पर सहमति करना । न्याय प्रणाली में जनप्रतिनिधियों की पहुँच कमजोर बनाना आदि ।
१०. राज्य के हरेक अंगों में मधेशी दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी जनजाति महिला उत्पीडित वर्ग को समानुपातिक आधार पर राज्य के अंग में समावेश करने के बदले सिर्फअपने पक्षधर लोगों को ही फायदा पहुँचाना ।
११. खुला सीमाना के कारण विदेशी नागरिकों के नेपाली नागरिकता देने के विषय पर ढील देना, जिस कारण लाखों भारतीय नागरिकों द्वारा गलत तरीके से नागरिकता हासिल करना ।
१२. राज्य के बडे पदों पर दूसरे संसदवादी शक्तियों के तर्ज पर ही नियुक्ति प्रक्रिया को प्रश्रय देना ।
१३. पार्टर्ीीीति के विपरीत विदेशी पूँजी लगानी को बढावा देना और सरकार का नेतृत्व करते समय कई राष्ट्रघाती विधेयक को संसद में लाना ।
१४. सत्ता पाने की लालच में शिविर में रहे लडाकुओं के भविष्य से खिलवाड करना । सेना समायोजन के नाम पर लडाकुओं की सुरक्षा हटाने और र्रि्रुपिंग कर पार्टर्ीीो हथियार और सैन्य विहीन बनाना ।
१५. अपर कर्ण्ााली और अरुण-३ जैसे अतिमहत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना को भारतीय कंपनियों के हाथों सौंपना ।
१६. पार्टर्ीीे अंतर्रर्ाा्रीय संबंध को ठेस पहुँचाते हुए भारतीय खुफिया एजेन्सियों के साथ गुप्त रुप से सांठगांठ रखना ।
१७. आत्मकेन्द्रित व्यक्तिवादी प्रवृति हावी होना । पार्टर्ीीें अपने ही कारण दुश्मनों की संख्या बढाना । और अपने शत्रुओं पर भौतिक, शारीरिक आक्रमण करवाना । प्रचण्ड में फासिस्ट सोच हावी होना ।
१८. पद पैसा और प्रतिष्ठा के लिए किसी भी हद तक जाना । पार्टर्ीीे आर्थिक कारोबार को अपने ही कब्जे में रख कर भ्रष्टाचार में लिप्त रहना । पार्टर्ीीे सभी आन्तरिक साधन स्रोत पर एकतर्फी ढंग से दुरुपयोग करना ।

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