व्यंग्य ,भोले, कुछ ऐसे बोले

मुकुन्द आचार्य:आप हम सभी ने पढÞा होगा- आदमी एक सामाजिक प्राणी है । लेकिन जहाँ तक मेरे तजर्ुर्बे का ताल्लुक है, मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि आदमी सिर्फऔर सिर्फखुदगर्ज प्राणी है । और कुछ भी नहीं । पढÞी हर्ुइ हर बात सच नहीं होती ।
औरों की तो मैं नहीं जानता, लेकिन मैं अपनी खुदगर्जी के लिए करीब-करीब हर रोज भोले बाबा को मस्का मारता हूँ । उनके मंदिर में जा कर अपनी तसल्ली के वास्ते कुछ पूजा पाठ कर लेता हूँ ।
इसी दौरान कुछ दिनों से मैं देख रहा था, बाबा भोलेनाथ आँखे बन्द कर ध्यान करते रहते हंै । जैसे हमारे सांसद सदन में सोते हुए टीभी में दिखते हैं । भोलेपन के चक्कर में मैं पूछ बैठा- बाबा, आप तो खुद देवों के देव महादेव हैं ! फिर आप किस का ध्यान करते है, मुझे बताइए ! कुछ देर तक तो वे समाधि में ही बैठे रहे । न कुछ बोले न थोडÞा सा डोले । मैंने कुछ ऊंची आवाज में अपना सवाल फिर दुहराया । अब की बार उनकी देह में कुछ हलचल सी हर्ुइ । उन्होंने अपने लाल-लाल नेत्रों से मुझे घूरा । फिर बोले, तूँ निरा मर्ूख ही रह गया । मैं किस का ध्यान करूँगा रे बेवकूफ ! मैं एक आधुनिक महायज्ञ में शरीक होने गया था । रात भर सो नहीं पाया, इसीलिए यहां बैठा-बैठा झपकी ले रहा हूँ । तुझे क्या तकलीफ है जा भाग यहाँ से ! भगवान होने में भी बडÞी दिक्कत है ! लोग आराम से सोने भी नहीं देते । मैंने हाथ जोडÞ कर अदब के साथ पूछा, मेरे मालिक ! आप किस महायज्ञ की बात कर रहे हैं – जरा इस चेले को भी बताते तो बडÞी कृपा होती । प्रभो ! मैं मूढÞ मति हूँ ।
भोले शंकर ने अपनी जटा खुजलाते हुए कहा- तुझे कुछ भी पता नहीं, आधुनिक महायज्ञ के बारे में – तूँ अन्न खाता है कि घास चरता है –
मैं बोला, सरकार ! मैं पिछले कुछ वर्षो से शुद्ध शाकाहारी हो गया हूँ । हो सकता है, उसी से दिमाग कुछ कमजोर हो गया हो । बताइए न यह आधुनिक महायज्ञ किस चिडिÞया का नाम है ! यह कहाँ रहती है – और क्या खाती-पीती है –
बाबा ने समझाने के मूड में कहा- देख भोले बाबा का भोला भक्त ! यह महायज्ञ ब्राजील नामक देश में हो रहा है । इस महायज्ञ का नाम है- विश्वकप फुटबाँल, २०१४ । ब्राजील के रियो दि जेनेरियो नामक पवित्र भूमि में यह फुटबाँल का महायज्ञ धूमधाम के साथ संपन्न होने जा रहा है । इस में गोलों की बारिश होती है । इस बारिश से महायज्ञ की आग और धधकती है । अरे चपाट चेला, तुझे क्या बताऊँ । सारी दुनियाँ अपने-पराये दूर्रदर्शन में दिन रात फुटबाँल के इस खेल को देखने की प्रतिस्पर्धा में मगन है ।
अपना आसन सहज करते हुए बाबा बोले- एक बात और सुन लो बेटा ! बीसवीं बार की यह विश्वकप फुटबाँल प्रतियोगिता है । इस फुटबाँल के कुम्भ मेले में संसार के ३२ राष्ट्र सहभागी हो रहे हैं । इस संस्करण के चैम्पियन को तीन अर्ब ३२ करोडÞ ५० लाख, उप विजेता को दो अर्ब ३७ करोडÞ ५० लाख और तीसरे नम्बर पर आने वाली टीम को दो अर्ब नौ करोडÞ रूपये पुरस्कार मिलेगी ।
बाबा तो छुपे रुस्तम निकले । उनका तो फुटबाँलीय ज्ञान देख कर मैं तो हैरान रह गया । आँख फाडÞे, मुँह बाये उनको देखता-सुनता रहा । मेरी हैरानी को ताडÞते हुए बाबा फिर चालू हो गए- फुटबाँल का बुखार मुझे भी बुरी तरह तबाह कर रहा है । इस बुखार में रात भर नींद नहीं आती और दिन में कोई काम में मन नहीं लगता । रात-रात भर जग कर मैच देखता हूँ और दिन भर उ+mघता रहता हूँ । क्या करें कलयुग जो है । जैसा युग होता है न, हमें भी उसी माहौल में जीना पडÞता है । भगवानगिरी भी कांटो का ताज है । इसीलिए तो लोग भगवान बनना नहीं चाहते हैं । भगवान को दूर से ही नमस्कार करते हुए चल देते हैं । सडÞता रहे भगवान मन्दिर में, अपनी बला से ! मेरी उत्सुकता और बढÞ गई । मैंने पूछा, प्रभो ! फुटबाँल फीभर -फुटबाँल का बुखार) के बारे में मुझ अज्ञानी को कुछ और ज्ञान देने की कृपा करें भोलेनाथ !
भगवान खीझ कर फट पडÞे, देख वृद्ध बालक ! अब मुझे ज्यादा तंग मत कर । काठमांडू में चारों ओर नौजवान, बूढÞे, बच्चे अपनी-अपनी मनपसंद टीम की जर्सर्ीीहन कर घूम रहे हैं । रात-रात भर जग कर फुटबाँल मैच देख रहे हैं, और ऐश कर रहे हैं । और तू है कि यहाँ बैठ कर मुझे तंग कर रहा है । जा, टाइम बर्बाद मत कर, कहीं जा कर मैच का लाइभ प्रसारण देख !
मैंने मस्का मारा, प्रभु जी । मैं ठहरा नन्हा मुन्ना बालक । मुझे पता नहीं कहा क्या दिखाया जाता है । मैंने तो सुना है इस महानगरी में पैसे खर्च करने पर बहुत कुछ देखने को मिलता है ।
भोले फिर बोले, फुटबाँल देखना हो तो बसंतपुर दरबार स्क्वायर, ललितपुर का कृष्णमन्दिर, मैतीदेवी मन्दिर, कुपण्डोल का प|mेन्डस क्लब, जावलाखेल का भनिमंडल चौक और ओ टु स्पोर्टस बार एन्ड लाँज- तुम्हें जहाँ सुविधा हो, वहाँ जा कर इस फुटबाँल महायज्ञ का दर्शन कर पुण्यलाभ कर सकते हो । अब तो मेरा पीछा छोडÞो । जाओ, भागो चिपकू मत बनो यार । मेरा भेजा प|mाई कर के खाओगे क्या ! जल्दी फूटो यहाँ से । मुझे थोडÞी देर सोने दो ! मेरी वजह से भोले अब तोप के गोले होने वाले थे । इसीलिए मैं भी वहां से उडÞन छू हो गया । अकेलेपन का फायदा उठाते हुए बाबा फिर न्रि्रादेवी से अठखेली करने लगे । लगता है, नेपाल में डेंगू से भी घातक बुखार फुटबाँल का है ।

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