व्यंग्य -सेकेंड हैंड का जलवा

पति महोदय के अगल, बगल में ताका झांकी अचानक बढ जाती है । अबतो फेसबुक और ट्विटर की कृपा से अड़ोस–पड़ोस में ताक–झांक करने की नौबत ही नहीं आती ।

छू कर किया गया प्रेम इस सेकेंड हैंड प्रेम को फस्र्ट हैंड वाले कभी मजा नहीं ले पाएगें । क्योंकि इस के लिए आंखो की शर्म और हया को उतारना पड़ेगा ।

पति या पत्नी अरब और खाड़ी मुल्कों की गर्मी में अपने खून और पसीना को जला कर उस के बदले में पैसे कमा कर घर भेजते हैं । पर यहां पर पति या पत्नी अपने सेकेंड हैंड पर न्यौछावर हो रहे होते है । बच्चे, परिवार और सम्बन्ध गया तेल लेने

बिम्मी शर्मा:फस्र्ट हैंड या नयां तो महँगा होता है इसी लिए हर तरफ सेकेंड हैंड का बोलबाला और जलवा है । फिर चाहे वह कोई सामान हो या प्रेम सम्बन्ध । जैसे लोग नयां मोटर साइकल न खरीद पाने पर पुराना या सेकेंड हैंड खरीद कर काम चलाते हैं । अब प्रेम भी वैसा ही हो गया है । आखिर मन में उठने वाली बलवती इच्छा को रोके भी तो कैसे ? प्रेम या सम्बन्ध की आग अपने आप तो बुझेगी नहीं । लिहाजा इस आग को बुझाने के लिए अगल–बगल से पानी (प्रेम) को मांग कर काम चलाया जाता है ।

Love-cartoon
घर में सुंदर पत्नी है, बच्चे भी माशाल्लाह अच्छे और काविल है । पर जैसे जैसे पत्नी शरीर से फैलती जाती है और बुढापे की ओर बढ़ती है । पति महोदय का मन भी फैलने लगता है । जब पति का मन फैलने लगे तब वह बेचैन हो कर बहकने लगता है । और उसका यह बहकना सेकेंड हैंड प्रेम के रूप में फैलने और फूलने लगता है । पति महोदय के अगल, बगल में ताका झांकी अचानक बढ जाती है । अबतो फेसबुक और ट्विटर की कृपा से अड़ोस–पड़ोस में ताक–झांक करने की नौबत ही नहीं आती ।

अब तो फेसबुक में हाय हेल्लो से बात बढ़ते–बढ़ते काफी के लिए ईनवाईट करने तक पहुंच जाती है । उसके बाद लगातार मिलना जुलना और होटल तक का रास्ता तय हो जाता है । तब शारीरिक क्षुधापूर्ति को प्रेम का नाम दे कर ढंक दिया जाता है और घर में बीबी को मालूम पड़ जाने पर या रास्ते में सेकेंड हैंड प्रेमी, प्रेमिका के मिलने पर एक दूसरे को भाई–बहन के रिश्तो सें नवाज कर पति या पत्नी को परिचय करवाया जाता है । छू कर किया गया प्रेम इस सेकेंड हैंड प्रेम को फस्र्ट हैंड वाले कभी मजा नहीं ले पाएगें । क्योंकि इस के लिए आंखो की शर्म और हया को उतारना पड़ेगा ।

पत्नी को जब पता चलता है अपने पति के आशिकाना मिजाज का तब वह “कहां जाएगी मछली मेरी ढडिया” वाले अंदाज में चुप रहती है । पति महोदय दिन भर जितना भी बाहर मुँह मारे आखिर में रात में तो अपने आशियाने में ही लौटेगा । फिर सभी श्री सम्पति तो पत्नीजी के नाम पर पति महोदय पहले ही कर चुके होते है । तब दूसरी औरत या प्रेमिका उतरन को कितने दिन पहनेगी और पसीने को बर्दाश्त करेगीं ? आखिर में लौट कर बुद्धु को अपने घर आना ही है । बच्चे और प्रापर्टी जब पत्नी जी के पास हो तो वह पति के सेकेंड हैंड प्रेम को लात मारती है ।

पति महोदय को यह कभी समझ में नही आता है कि पत्नी को उस से ज्यादा उसके द्वारा पैदा हुए बच्चे, पति के द्वारा पत्नी के नाम पर खरीदी हुई प्रापर्टी और अपने मायके से ज्यादा लगाव और प्रेम होता है । पर पति खुद को ही पत्नी के प्रेम का सब से बड़ा हिस्सेदार होने के भ्रम में जीता है । और जिस दिन प्रेम का यह भ्रम टूटता है तब वह सेकेंड हैंड प्रेम की खोज मे निकल पड़ता है । अब सोशल मीडिया से सस्ता और जल्दी कहां मिलेगा यह सेकेंड हैंड प्रेम ? तब वह फेसबुक मे सकली या नकली एकाउंट वाली लड़की को पटाने निकल पड़ता है । अपना दुखड़ा बता कर और अपने मगरमच्छी आंसू दिखा कर वह लड़की को पटाने की बडी जद्धोजहद करता है । यदि लड़की अच्छे घर की है तो पटेगी नही, इस सेकेंड हैंड प्रेमी को तवज्जो ही नहीं देगी । पर यदि लड़की सड़कछाप है और उसको प्रेम से ज्यादा पैसे से मतलब है तो यह सेकेंड हेंड प्रेम का डिब्बा अपने गत ट्रैक पर सरपट दौड़ने लगती है । हो सकता है लड़की का भी यह सेकेंड हैंड प्रेम हो ।

पति या पत्नी अरब और खाड़ी मुल्कों की गर्मी में अपने खून और पसीना को जला कर उस के बदले में पैसे कमा कर घर भेजते हैं । पर यहां पर पति या पत्नी अपने सेकेंड हैंड पर न्यौछावर हो रहे होते है । बच्चे, परिवार और सम्बन्ध गया तेल लेने । जितना इस देश को आर्थिक गति देने के लिए रेमिटैन्स खाड़ी देशों से यहां आ रहा है । उतना ही इस देश के सामाजिक और पारिवारिक गति का ब्रेक फेल हो रहा है । पति हो या पत्नी सेकेंड हैंड प्रेम का जलवा इन पर इतना छाया हुआ है कि समाज और नैतिकता रद्धी की टोकड़ी में अच्छे दिन आने का बाट जोह रही है ।
पुरुष हो या पति अपने दो पैरों पर खड़ी कोई लड़की दिखी नहीं की इनके अंदर प्रेम का किटाणु कुलबुलाने लगता है । लड़की थोडी सिसिंयर है तो अपनी पत्नी के साथ के सम्बंधो की खटास को बता कर पहले उसकी सहानुभूति लेते है । जब लड़की अच्छी दोस्त और हमराज बन जाती है तो उसी के सामने प्रेम का प्रस्ताव रखने में कोई संकोच नहीं करते । पुरुषों ने शायद जन्मजात संकोच नाम का वस्त्र पहना ही नहीं हैं । अब तो लड़की या शादी शुदा औरत भी अपनी अतृप्त इच्छाओं को पूरा करने में कोई संकोच नहीं करती । कई पत्निया भीं सेकेंड हैंड प्रेम का लुत्फ उठा रही है ।
जितने भी महिला मूक्ति की बाते हों और महिला अधिकार का नारा दे कर औरत सड़क पर आ जाए । पर ज्यादा तर इन्हीं महिला अधिकारवादियों ने किसी दूसरी महिला का हक छीना है । पुरुष सेकेंड हैंड है या किसी का पति है यह मालूम होने के बाद भी और उस मर्द से “तथाकथित”प्यार करने लगती है । इस तरह किसी सीधी सादी महिला का घर किसी दूसरी महिला के सेकेंड हैंड प्रेम के चलते उजड़ जाता है । और यही औरत महिला आरक्षण और कोटा के लिए सरकार से लड़ती है । यही औरत संपति मे बेटा और बेटी का समान अधिकार की बात करती है । यही नारीवादी महिला हिंसा का विरोध करती है और महिलाओं के लिए कड़े कानून बनाने की मांग करती है । और यही औरत किसी दूसरी महिला जो अपने परिवार में सुखी और संपन्न है, जो कानून और राजनीति नहीं जानती उसी औरत का भाग छीनने में रत्ति भर भी डर या संकोच नहीं करती । क्या यह भी एक किस्म की हिंसा नहीं है ? पर कौन इन से उलझे ? चित भी इनकी और पट भी इनकी ।

हमारे देश और और समाज में जिस तरह से सेकेंड हैंड प्रेम परवान चढ़ रहा है । वह दिन दूर नहीं जब पति, पत्नी और बच्चे खुशी–खुशी इसको स्वीकारेंगे । क्योंकि अब पति–पत्नी दोनों का ही गर्लफ्रैण्ड या ब्वाय फ्रेन्ड होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है । उंचे तबके में इस को सहजता से स्वीकार कर लिया गया है । गाँव देहात में भी पति या पत्नी की अनुपस्थिति में छुपा कर संबंध बन रहे है । नाते रिश्तेदारों से भरे परिवार के गृहस्थ सेकेंड हैंड प्रेम के लिए अपना र्फस्ट हैंड प्रेम और घरको तिलाजंली दे हैं । देह के क्षणिक सुख के लिए आत्मिक रिश्तो की मर्यादा भंग हो रही है ।
अधेड़ या अपनी पत्नी से चिढेÞ हुए पति या पुरुष फेसबुक मे किसी लड़की के अनलाइन होने का इस तरह से इंतजार करते है जैसे चुहे के बिल के बाहर बिल्ली उस को झपट्ने के लिए इंतजार करती है । कुछ मर्दो नें तो फेसबुक को मछली फंसाने का जाल ही बना रखा है जिस में वहअपने झूठे आंसू और भावनाओं को मछली यानी लड़की फसाने का दाना बनाकर फेसबुक की पोखरी में फेकते है । मछली यानी लडकी फंस गई तो ठीक है नहीं तो दूसरी लड़की को यही चारा फेकेंगे । लड़कियां भी सेकेंड हैंड प्रेम करने के मामले में पीछे नहीं है । वह भी यही सूत्र अपना कर लड़कों या किसी और के पति को फांसती और ऐश करती है । तो देखा न हमारे देश में कैसे सेकेंड हैंड प्रेम अपना जलवा दिखा रहा है । कंही यह सेकेंड हैंड प्रेम का“जलवा”किसी के परिवार में “हलवा”बन कर घुसे और समाज के बदहजमी और अपच का शिकार न बन जाए ।

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