व्याकुल मन : मनीषा गुप्ता

 
#आज मन जाने क्यों बहुत असहज सा होकर हजारो सवालों से घेर कर बैठ गया मुझ को #######
क्या हैं ग्रह , क्या हैं नक्षत्र
क्या है धर्म क्या है अधर्म
सच क्या है और झूठ है क्या
किसे कहते हैं विश्वास
और क्यों होता है अविश्वास
क्या होती है अमीरी और
किसे मिलती है गरीबी
क्या है कर्म क्यों बनाते
हैं विक्रम ……………..
क्या भगवान् सच में एक शक्ति है
जिस तक हमारी बात पहुँचती है
तो क्यों दुःखों से निकलने की
राह नहीं होती ……………
और गर हमें वही मिलता है
जो कर्म हम करके आते हैं
तो फिर क्यों हम भगवान् के
आगे हाथ फैलाते हैं ……….
जीवन की डोर जिस संग बंधती है
वो हमारा भाग्य होता है ………..
वो भाग्य कौन बनाता है ………….
जिस बचपन को संवारने में जीवन
गुज़र जाता है ……………………..
क्यों बुढ़ापे में वो बचपन हाथ छोड़
जाता है …..………………………..
क्यों कहीं खुशिओं की भरमार होती है
और कहीं दुःख की पीड़ा अश्को से रोती है
क्यों सपने हमारे जीवन का हिस्सा बनते है
तो क्यों उनको पूरा करने की डोर नहीं होती
क्यों कोई दूर होकर भी पास होता है तो क्यों
कोई पास होकर भी सिर्फ एहसास होता है
क्यों हमारी चाहते असीमित होती हैं ……
क्यों हमें खुद पर विश्वास नहीं होता है ……
क्यों प्रश्न जिंदगी का हिस्सा बनते हैं ………..
जब उनका कोई जबाब नहीं होता है……….
#######सच कहूँ ##########
#आज लगता है जैसे चारो तरफ सिर्फ एक भ्रम
है जो संग अपने बहा कर ले जा रहा है पर ऐसा न
हो उस संग बह कर इतना दूर निकल जाएं की
वापसी की राह आँखों से ओझल हो जाए …..#
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