शहीद बैंक, जल्द खाता खोलिये, क्या पता बाद में शहीद के कोटे में सिट मिले न मिले ?

shahid
बिम्मीशर्मा, वीरगंज , ३१ जनवरी | (व्यग्ंय.)  एक कहावत है “सारी खुदाई एक तरफ जोरु का भाई एक तरफ । ” यह कहावत नेपाल के तथाकथित शहिदों पर एकदम फिट बैठती है । शहीद का सही अर्थ जाने बिना ही सब लोग जोरु के भाई की तरह शहीद को शीर पर उठा कर चल रहे हैं । सारी दूनिया में जितने शहीद होगें उनसे कहीं ज्यादा सिर्फ अकेले नेपाल में ही होगें । तराजु पर तौल कर देख सकते हैं । आखिर में नेपाल के सभी शहीद अपने स्तर और हैसियत अनुसार तोल मोल के बोल वाले ही हैं । शहीद न हुए सट्टा या शेयर बजार हो गया जहां शेयर या सोना, चांदी के भाव की तरह शहीद का भाव चढ्ता और गिरता है ।
यह देश और कोई उपयोगी चीज उत्पादन करे न करे पर शहीद की खेती या उत्पादन करने में बिश्व में ही नंबर वान है । पहले ईस देश में शहिदों की खेती होती थी पर मौसम के प्रतिकूल होने और आंसूओं की बारिश न होने के कारण अब सभी शहिद कारखाना में उत्पादन होते हैं । जैसे छोटे, बडे सभी साइजों मे पहने जाने वाले कपडे उत्पादन होता है । उसी तरह हरेक साईज और चेहरा का शहीद कारखाना में उत्पादन हो कर विभिन्न दल के कार्यालय और नेताओं के घर में पहुंच जाते हैं । नेता पहले ईन रेडिमेड शहिदों को पहले खुद प्रयोग करते हैं । ईनसे अपना नाक, कानऔर मूंह पोंछते हैं । उसके बाद जनता का आंसू और खून चूसने के लिए ईन रेडिमेड शहिदों को किसी आंदोलन में शरिक कराते हैं । वहां पुलिस की गूलेली जैसी बन्दु की गोली से ढेर हो जाते हैं और बन जाते है शहीद । है ना शहीद बनना कितना आसान है ? और उस पर अलग से मिलेगी जय जयकार, आवभगत और नगद ईनाम । परिवार में किसी को सरकारी नौकरी में आरक्षण और सुविधा अलग से ।
देश में ईतने सारे बैंक है पर शहीद बैंक एक भी नहीं है । जब देश में शहीद धडल्ले से उत्पादन हो रहें हैं तो एक शहीद बैंक भी तो होना चाहिए न ? एक घर से जितने ज्यादा लोग शहीद हो कर शहीद बैंक में जमा कराएगें उस पर उतना ही ज्यादा ब्याज देगा शहीद बैंक । तब सभी घरों में शहीद होने के लिए अफरा तफरी मच जाएगी । शहिदों के लिए अगर बिमा करने की सुविधा भी होगी तो सोने पे सुहागा होगा । तब माता पिता अपने बच्चो को पढा, लिखा कर डाक्टर और ईन्जिनियर बनाने की बजाय शहीद बनाने और बनने पर जोर देगें । अपने बच्चों को आशिर्वाद में भी बडा हो कर शहीद बनना कह कर बलैया लेगें । स्कूल में शिक्षक भी शहीदों की कहानी, शहीद बनने पर मिलने वाला फायदों का एक लंबी लिस्ट बना कर गणित के पहाडे की तरह विद्यार्थीयों को रटाएगें ।
शिक्षक अपने विद्यार्थियों को शहीद बनने की ट्यूशन भी देगें । कैसे आराम से कम पैसों में शहीद बना जा सकता है उसका स्किम विभिन्न कंपनी निकालेगी और शहीद बैंक उन सभी का बिमा करवा कर शहीद परिवारों को अपने लक्ष्य के प्रति सुनिश्चित होने के लिए आग्रह करेगीं । लोग अपने बच्चो को शहीद बनवाने के लिए पैदा करेगें । दो की बजाय अब चार या छ बच्चे पैंदा होगें । मां, बाप का जीवन बिना कष्ट के ही बित जाएगा । कहां बुढापे में अपने बच्चों के कारण दर दर की ठोकर खाना और वृद्धाश्रम में जा कर रहना पड्ता था । अब कहां जवान बच्चे खुद शहीद हो कर मां, बाप को जिंदगी भर की खुशिंया देगें । मा, बापका सीना गर्व से चौडा हो जाएगा अपने शहीद बच्चो के कारण । पूरा टोल मोहल्ला ही शहीद बन कर न्यौछावर हो जाएगा अपने मां, बाप और देश के लिए ।
हमारे पडोसी देश भारत में रोटी और कपडा बैंक खूल चूका है । हम भारत की तरह रोटी और कपडा बैंक नहीं खोलेगें बल्कि उससे कहीं आगे बढ कर शहीद बैंक खोलेगें । जहां पर शहीदों का रक्त और उन के मां, बाप के आंसू जमा किए जाएगें । जिसके एवज में शहीद परिवारों को नगद इनाम के साथ, साथ अस्पताल में ईलाजऔर विद्यालय में शिक्षा निशुल्क दी जाएगी । शहिदोै को मूफ्त में या कम पैसे में शहीद बैंक घर बनवाने के लिए कर्ज देगी । उनके लिए वाहन भी मूफ्त में होगा । यह वाहन भले ही शववाहन जैसा दिखता हो पर यह शहीद भी तो कौन से जिंदा होते हैं ?
जिनलोगों को मेहनत करने, जीवन में संघर्ष करने और अपना हाथ, पैर चला कर गुारा करन में दिक्कत होती है उन्हे शहीद ही बन जाना चाहिए । क्योंकि शहीद बनने के बाद न खाना पडता है, न शौच जाना पडता है न अफिस ही जाना पडता है । बस किसी भिडभाड या आंदोलन मे जबरदस्ति घूष जाओ और पुलिस की गोली के आगे सीना तान कर खडे हो जाओ । उधर पुलिस गुस्से में अपनी बन्दुक का ट्रिगर दबाएगी और इधर आप जमिन पर ढेर हो गएऔर बन गए शहीद । है ना कितना आसान ? जिंदगी भर की किचकिच से मूक्ति और ढेर सारा इनाम अलग से ।
जब जिंदा थे तब माड खाने को भी नहीं मिलता था । जब शहीद बन जाने के बाद मिठाई. खाने को मिलेगा । रेवडियां बटेगीं, परिवार और खुद का नाम ईतिहास मे अमर होगा सो अलग । शिक्षा पूरी होने पर भी नौकरी नहीं मिलती, जिंदगी भर बेरोजगार रहना पड्ता है । पर शहीद की लाटरी लगते ही सारी परेशानी खत्म और बेरोजगारी से भी नाता टूट जाएगा । गर्मागर्म जलेबी की तरह गर्मागर्म शहद बनो और उसकी चाशनी में परिवार को डुबाओ और खुद चैन से सो जाओ हमेशा के लिए ।
ईसी लिए ईस देश में शहीद बैंक सबसे जरुरी है । करीब ७० लाख नेपाली विदेशो में हैं । अरब मूल्कों की तपिश झेल कर और ऊंट का पैखाना साफ कर के रहने से अच्छा है की अपने ही देश में खुशी से शहीद बनें । कम से कम यह देश मरने के बाद तो याद करेगा । विदेशों में किसी कारखाने में काम करते हुए किसी मेशिन से कुचले गए या किसी लरी के निचे आ गए तो कोई पुछने वाला भी न होगा ? कम से कम देश के लिए शहीद बनोगे तो स्वर्णाक्षर में नाम खुदेगा । नाम और दाम भी मिलेगा बिना काम किए ही । ईसी लिए शहीद बैंक खोल कर सभी को शहीद होने के लिए अपना खाता खोल लेनी चाहिए । क्या पता बाद में शहीद के कोटे में सिट मिले न मिले ? ईसी लिए जल्द करें ।

शहीद बैंक ! आप भी अपना खाता खोलिये, क्या पता बाद में शहीद के कोटे में सिट मिले न मिले ?

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