शिक्षानुरागी एवं समर्पित समाजसेवी

प्रभात विक्रम थापा

समाज या राष्ट्र में समर्पित शिक्षानुरागी एवं समाजसेवी व्यक्तित्व का आगमन कभी कभी होता है । नेपाल राष्ट्र और समाज में कुछ समर्पित समाजसेवी हुए हैं । वर्तमान समय में समर्पित समाजसेवी के रुप में एक नाम आया है । उनका नाम है, श्री प्रभात विक्रम थापा । प्रभात विक्रम थापा मनमैजू गा.वि.स वार्ड नं. १ हिलेडोल निवासी पिता श्री धर्मबहादुर थापा, माता श्रीमती शोभा थापा -माइली) के सुपुत्र के रुप में २०११ वि.सं. जन्म लिया ।
श्री थापा ४६-४७ वसन्त पार कर चुके हैं । इस क्रम में थापा जी विभिन्न उतार-चढÞाव वाले संर्घष्ा को झेलते हुए -मीठे) अच्छे-कडÞवे अनुभवों को समेटते हुए, मानव जीवन के महत्व को समझते हुए अपने जीवन को र्सार्थक एवं सफल व्यक्तित्व पर्ूण्ा जीवन बनाने के लिए कौन सा कार्य उचित होगा – इस सर्न्दर्भ में विचार मन्थन करते हुए व्यक्ति, समाज, गाँव एवं राष्ट्र की उन्नति के लिए होने वाले काम और धर्मशास्त्रानुसार इस लोक में विद्या दान जैसे महत्वपर्ूण्ा कार्य को अंगीकार करते हुए गरीब, लाचार एवं मध्यम वर्गीय व्यक्ति को शिक्षादान करने का उद्देश्यपर्ूण्ा संकल्प करते हुए तीन वर्षसे क्षिक्षा दान न्यून शुल्क लेकर करते आ रहे हैं । थापा जी स्वयं शिक्षानुरागी हैं । शिक्षा व्यवसाय में उनको कुछ भी अनुभव नहीं था, इसलिए इस क्षेत्र में पाँव रखने के बाद उन्हें कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पडÞा पर वे हिम्मत नहीं हारे । २०६८ में उनका शिक्षा दान कार्य चौथे वर्षमें प्रवेश करने जा रहा है । नव वर्ष२०६८ में उनका शिक्षा दान कार्य चौथे वर्षमें आने के बाद शिक्षा प्रेमी थापा जी नई सोच लेकर आगे बढÞने की कोशिश करने जा रहे हैं । उनकी नई सोच एवं संकल्प को साकार करने की शक्तिर् इश्वर प्रदान करें, ऐसी पर््रार्थना है ।
उनकी नई सोच एवं संकल्प इस प्रकार है- नये वर्षके शुभ अवसर पर न्यूनतम मासिक शुल्क रु १०० लेकर गरीब, असहाय एवं मध्यवर्गीय जेहेन्दार बच्चों को पठन-पाठन -शिक्षादान) करने की योजना संचालन किया जाएगा । उनका कहना है कि शिक्षादान का उद्देश्य मात्र पास कराना नहीं है । अपितु शुभ प्रभात एकेडमी अध्ययनरत विद्यार्थी  -जो गरीब और आर्थिक विपन्न हैं) उत्तर्ीण्ा होकर अपने पैरों पर खडÞे हों सके, इसके लिए बच्चों को अनुशासित बनाते कडÞी मेहनत के साथ अध्ययन-अध्यापन कराया जा रहा है । उनका यह भी कहना है कि विद्यालय का प्रत्येक काम स्वयं करते हुए विद्यार्थियों के साथ आत्मीयता स्थापित करते हुए उनकी मनोभावनाओं को समझते हुए पढर्Þाई करने की प्रेरणा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक सामाजिक धार्मिक ज्ञान वृद्धि की शिक्षा दी जा रही है । थापा जी यहाँ के विद्यार्थियों को माता-पिता-गुरु पूजनीय हैं, मानव जीवन र्सवश्रेष्ठ जीवन है । जैसी शिक्षा का ज्ञान कराते हुए छात्र-छात्राओं को सफल-सक्षम बनाते हुए विद्यालय को आगे बढाने का काम कर रहे हैं । थापा जी की भविष्य में ±२ स्तर में भी निःशुल्क पढाने की योजना है ।
बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देकर आगे बढने और समाज, और राष्ट्र सेवा करने के प्रति कृतसंकल्पित है । वे अपनी इस योजना के पूरा करने के लिए विभिन्न दानदाता, दातृसंस्था, उनके साथ सम्बंध स्थापित कर अर्थाभाव को पूरा करके विद्यादान करने का उच्च लक्ष्य लिए हुए हैं । इनको निःस्वार्थ लक्ष्य पूरा हो, ऐसर्ीर् इश्वर से पर््रार्थना है । कुछ जेहेन्दार विद्यार्थियों को सभी आर्थिक सहयोग देकर आगे बढाने का काम कर रहे हैं । जैसे राजन पूडासैनी, प्रजुन बस्नेत, सिर्जना श्रेष्ठ, बासु देवकोटा को आर्थिक सहयोग दे रहे है । यह काम थापा जी का बहुत ही स्तुत्य है ।
थापा जी विद्यादान के क्षेत्र में ही प्रशंसनीय काम नहीं कर रहे हैं अपितु समाज के अन्य क्षेत्र में भी सहयोग करते आ रहे हैं । मंठ-मंदिर, भजन-कर्ीतन करने का गृह निर्माण आदि र्सार्वजनिक कार्य करते आ रहे हैं । काठमांडू, जीतपुर में सत्यदैवी मंदिर, बालाजु में विष्णुमती भजनगृह निर्माण करने के साथ साथ अन्य धार्मिक कार्यों में योगदान देते आ रहे हैं ।  धार्मिक कार्यों में योगदान गरीब व्यक्तियों की सहायता करने जैसी प्रेरणा उनेक पिता श्री धर्मबहादुर थापा जी बचपन से ही मिली तो है ही, उनके जीवन को नयाँ मोड देने का एक स्रोत है, वह है इस युग के जीवंत भगवान सत्यदैवी । जिनका प्रत्यक्ष दर्शन भक्तपुर में किया जा सकता है । इनकी हजारों प्रत्यक्ष लीला देखकर ही थापा जी जीवन्त सेवा कर्म में जुटे हुए हैं । सत्यदेवी भगवान दीन, दुखी, गरीब, रोगियों की सेवा करके अपनी लीला पर््रदर्शन कर रहे हैं । आज के व्यस्त समय में नेपाल के साथ साथ विदेश के लाखों लाख भक्तजन नया जीवन पाकर समाज में प्रेममयी सेवा कर रहे हैं । सत्यदैवी भगवान के बारे में पता करने के लिए भक्तपुर जाना होगा । ऐसा अनुभव थापा जी और उनके परिवार का है ।
१०० रुपये शुल्क के आधार पर विद्यालय को चलाएँगे इस प्रश्न के उत्तर में थापा जी का कहना है कि मेरे पास विभिन्न उपाय हैं । स्कूल का भाडÞा देना नहीं पडÞता है, मैं अपने मित्रों, भाइबन्धुओं, उद्योगपतियों, व्यवसायियों, विदेशी दाताओं के आगे हाथ फैलाकर पैसा जमा करुँगा, इन्हीं पैसों को विभिन्न स्थानों में सदुपयोग करुँगा, स्वयं व्यापार करके धनराशि को वृद्धि करते हुए गरीब एवं जेहेन्दार विद्यार्थियों को डाक्टर, इन्जीनियरिंङ आदि बनाने में सहयोग करके देश और समाज को उन्नति के मार्ग पर बढाने की कोशिश करता रहुँगा ।
इस कारण मै इस हिमालिनी पत्रिका के माध्यम से यह अनुरोध करना चाहता हूँ कि जिनको धर्म एवं मोक्ष की कामना है ऐसे बुद्धिजीवी व्यक्ति लोग इस पवित्र कार्य में सहयोग देकर गरीब बच्चों का अभिभावक बन मानवीय जीवन को र्सार्थक बनावें ।

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