शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयासरत हैं : डा.सावित्री मैनाली

पढ़ने वाले छात्रों के लिए विश्व में प्रचलित परीक्षा प्रणालियों में सेमेस्टर प्रणाली सबसे बेहत्तर प्रणाली है । त्रिभुवन विश्वविद्यालय में वि.सं. २०३० से २०३६ तक यह प्रणाली चली । तत्पश्चात् पुनः वार्षिक प्रणाली लागू हुई । वार्षिक प्रणाली के दौरान छात्रों को राजनीति के प्रति ज्यादा रुचि थी । जबकि सेमेस्टर प्रणाली में राजनीति करने का मौका ही नहीं मिलता है । क्योंकि हर छह महीने में परीक्षा होती है । इसके साथ–साथ इसी अवधि में उन्हें टर्म पेपर के अतिरिक्त अन्य तैयारियां भी करनी पड़ती हैं । उनके पास राजनीति करने का वक्त ही नहीं मिलता है । यह प्रणाली छात्रों को ही नहीं बल्कि शिक्षकों को भी ज्यादा सिन्सेयर व अनुशासित बनाती है । मुझे लगता है कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में यह प्रणाली बहुत कारगर सिद्ध होती है ।

प्रो.डॉ. सावित्री मैनाली
विभागाध्यक्षा
इतिहास, संस्कृति व पुरातत्वकेन्द्रीय विभाग, त्रि.वि.

सेमेस्टर प्रणाली हेतु वार्षिक पाठ्यक्रमों को जिस प्रकार से परिमार्जित करना चाहिए था, उतना नहीं कर पाए । इसकी वजह है, समय का अभाव । हमें बहुत कम समय में पाठ्यक्रम का निर्माण करना पड़ा । फिर भी यह पाठ्यक्रम अधिक उपयोगी है । आवश्यकतना अनुसार आगामी दिनों में परिमार्जित किया जा सकता है । अभी सवाल उठ रहा है कि विश्वविद्यालय कैम्पस के मानवीकि संकायों में छात्रों की संख्या में परिमितता है । सच में कह जाए तो त्रि.वि. से अन्तरस्नातक हटा दिया जाना तथा १०+२ में ज्यादातर टेक्निकल व वोकेशनल विषय होने की वजह से छात्रों की संख्या में न्यूनता दिखाई देती है । लेकिन हमारे विभाग के पाठ्यक्रम में संस्कृति, इतिहास, कला, पुरातत्व, एथ्नोग्राफी, फिलोसॉफी और टुरिज्म जैसे विषयवस्तु शामिल करने की वजह से अधिकांश छात्र आकर्षित हुए हैं । साइन्स, मैनेजमेन्ट से एम.ए. उत्तीर्ण किए विद्यार्थी और नेपाल सरकार से रिटायर्ड कर्मचारी भी कल्चर विषय पढ़ने के लिए आते हैं । खासकर वे नेपाल की संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, एथ्नोग्राफी व टुरिज्म प्रति आकर्षित होकर इस विभाग में अध्ययन करने हेतु आते हैं । फिलहाल इस विभाग में ५०–६० छात्र हैं, हर सेमेस्टर में १५–२० के अनुपात में हैं, जबकि वार्षिक परीक्षा प्रणाली के तहत सञ्चालित प्रथम वर्ष में १५–२० छात्र होते थे ।
मैं संस्मरण कराना चाहुंगी कि अन्तरस्नातक फेज आउट होने से पूर्व भी ५०–६० छात्र होते थे । इस हिसाब से देखा जाए तो संस्कृति विभाग में कभी भी छात्रों की संख्या में कमी नहीं हुई । सेमेस्टर प्रणाली में कमी कमजारियों के बावजूद भी हम शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयासरत हैं । अंत में मैं कहना चाहुंगी कि सेमेस्टर प्रणाली में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करने हेतु शिक्षक एवं विश्वविद्यालय परिवार को गहनता से आगे बढ़ने की आवश्यकता है ।

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