शिक्षा में परिवर्तन होना आवश्यक : हेमन्तराज काफ्ले

 हेमन्तराज काफ्ले (लेखक)

हेमन्तराज काफ्ले (लेखक)

शिक्षा सभी प्रकार की बिकास की प्रमुख दरवाजा है । स्तरीय और ब्यवहारिक शिक्षा के बिना समाजिक परिवर्तन की कल्पना कर नही सकेगें  । ऐसैै मानव जीवन को उन्नत बनाते हुयें देश को आवश्यक योग्य जनशक्ति उत्पदान करना और ब्यक्ति समाज और राष्ट्र की आवश्यकता  परिपूर्ति करना मूल माध्यम के रुप में शिक्षा होने के नाते शिक्षा को समुचित बिकास न होने से शिक्षा में एक आयाम आना चाहिए । प्राचीनशैली के पढन्ते बिद्या घाउन्त खेती कह की कहावत को अन्तय करना चाहए । अब पढकर कुछ भी नही होगा और कुछ नही होगा ब्यवहारिक शिक्षा, प्राबिधिक शिक्षा की आवश्यकता है ।
नेपाल में गरिबी , भौगलिक बिकट अन्धविश्वास, रुढिवादी समाजिक सा“स्कृतिक , धार्मिक चेतना की कमी आदि कारणों से शिक्षा प्रत्येक कोने कोने में अभी तक नही पहु“ची है । शिक्षा में परिवर्तन आया है कहकर सरकार ने जितना बिगुल बजायें तो भी हमारे देश में शिक्षित वा साक्षर की संख्या कम है । यदि देश बनाना है तो देश में कुछ परिवर्तन लाना है तो शिक्षा सभी की पहु“च होना चाहियें और शिक्षा ने मात्र देश की मुहार बदल सकती है ।
अभी की शिक्षा बिभाजित हुआ है , धनी और गरीब शिक्षा यह कैसे कहे सरकार ने प्रदान किया शिक्षा एक गरीब शिक्षा जैसे रहा है । धनी शिक्षा कहने का मतलब धन होनेवालों केवल अपने सन्तन को बिदेश में अध्ययन करने के लियें बाहर भेजते है । हजारौं बिद्यार्थी भारत , अमेरिका अस्ट्रेलिया जापान , कोरिया , ब¨लादेश अध्ययन करने के लियें गयें है । वो लोग धनी के सन्तान है जो नेपाल की शिक्षा के उपर बिश्वास नही करते है दूसरे मुलुक में अध्ययन करने के लियें भेजना  यह देश की शिक्षा क्षेत्र की बहुत बढी चुनौती है । फिर देश में भी वो बिदेश पढकर आयें हुययें लोग सिर्फ बिभिन्न सरकारी निकायों में ही नौकरी पाते है । इसे क
क्या दिखाई पडता है हमारे देश की शिक्षा में सरकार को भी भरोसा नही है । युवाओं को कुण्ठित भयवित बनाने की यह शिक्षा है शैक्षिक बेरोजगार हमारे देश की कहुत बढी समस्या है लाखौं लाख बिद्यार्थीयों उच्च शिक्षा पास करे भी है , वो लोगों को कही न कही ब्यस्थापन करना चाहिए यह राज्य ने सोचना जरुरी है लेकिन मात्र देश में बेरोजगारों का मुख्य कारण यह शिक्षा ही है । शिक्षा में जब तक परिवर्तन नही आएगा  तब तक देश ने कोई भी बिकास नही कर पाएगा । हमारे देश ने लागू किया पाठयक्रम समय अनुकुल परिवर्तन नही होती है । यदि कुछ करना है तो युवाओं को भुलाने की शिक्षा नही देना चाहिए । युवाओं को शैक्षिक बेरोजगार बनाकर हुछ भी नही होगा इस समय पर युवा निराश है ।
नेपाल से स्नातक , स्नातकोत्तर कियें है  लेकिन युवाओं ने खँडी मुलुक में जोखिमपूर्ण काम कर रहे है , राज्य ने कैसा स्नातक कैसा  स्नातकोतर शिक्षा दियें है १५वा“ बर्ष तक अध्ययन किया अपने देश में रोजगार मिलेगा लेकिन प्रत्येक युवाओं ने दुःख पाते है शिक्षा की स्तर देखकर बौदिक प्रागीकों ने भी निराश रहे है । अब के समय अनुकुल को शिक्षा लागुू करना जरुरी है बोडिङ्ग और सरकारी बिद्यालय कहकर  शिक्षा को बिभाजित करना नही चाहिए । बोडिङ्ग स्कुल और सकारी बिद्यालय की पाठयक्रम एक ही होना चाहिए । सरकारी बिद्यालयों में राजनीतिक के कारण चरम रुप लिया है । यह स्थानीय ब्यवस्थापन  समिति के निर्णय से लेकर शिक्षक छनौट परिक्रिया में भी राजनीतिक है । सरकारी बिद्यालय ने तो निरक्षर उत्पादन कर रही है देश की प्रवेशिका परिक्षा मैं देखा जायें तो ५० प्रतिशत अधिक बिद्यालय तो नील हुयें है ।  गुणस्तरीय शिक्षा कहकर  बोर्डिग स्कूल की भी अपनी कमजोरी रही है । पडन्ते बिद्या, नकल चोरन्ते बिद्या है संस्थागत बिद्यालय में सामान्य निबेदन, तमसुक, भरपाई जैसे को लिखना भी नही आता है वो बिद्यार्थीओं को यह पढन्ते बिद्या को हम लोगों को सैद्धान्तिक ब्यवहारिक बनाना एकदम जरुरी रही है । सरकारी बिद्यालय को तो  सरकार ने १० वर्ष के लियें निजीकरण कर देना चाहिए लगानी सरकार की संस्थान जैसे सरकारी बिद्यालयों की उसी तरह की बिकास होती लेकिन एकदम जटिल अवस्था में रही है सरकारी बिद्यालय की शैक्षिक गुणस्तर एकदम सून्य है । इतना राज्य की लगानी लगी है लेकिन बालु की पानी हुआ है । सरकारी बिद्यालय की स्थिति सुधार करना है तो  जिला शिक्षा कार्यालय ने बिशेष शिक्षा अभियान लागू करना पडेगा और बिद्यालय की गुणस्तर मापन करने के लियें एक अलग निकाय बनाना चाहिए बिद्यालय में बिद्यार्थी भर्ना से लेकर शैक्षिक सत्र अन्त्य तक जिला शिक्षा कार्यालय ने नियमित बिद्यालयों की अनुगमन करना पडेगा , शिक्षा एक चुनौती होते ही आया है ।
संसार परिर्वतनशील है समय परिर्वतन होती है उसी तरह शिक्षा में भी परिर्वतन होना जरुरी है प्राविधिक ज्ञान पाठ्यक्रम में ही  रखना जरुरी है मोबाइल, मोटरसाइकल, कार, कम्प्यूटर, घडी, टेलिभिजन मम्र्मत करना जैसे  अत्यावश्यक सम्बन्धी की ज्ञान अब प्राविधिक ज्ञानों से कम करने के लियें एक अचुक मन्त्र बनेगी । अब शिक्षा में परिर्वतन लाने के लियें सभी जगाह से हाथ में हाथ का“ध में का“ध रखकर सहयोग करेंगें तब मात्र शिक्षा आगे बढेगी अन्यथा हमारे युवा इसी शिक्षा में सिमित रहेंगे और देश की शैक्षिक बेरोजगार कभी नही अन्त्य होगी , इस लियें शिक्षा में परिर्वतन होना एकदम जरुरी रही है ।
हेमन्तराज काफ्ल्े
प्रिसिन्पल
समावेशी हाई स्कूल
नेपालगन्ज उप–महानगरपालिका–५ बसपार्क रोड, नेपालगन्ज

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: