शिवरात्रि भगवान शिव और मां शक्ति के मिलन का महापर्व- कैसे करें महाशिवरात्रि व्रत

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महाशिवरात्रि : आचार्य राधाकान्त शास्त्री, २० फरवरी |

शिवरात्रि आदि देव भगवान शिव और मां शक्ति के मिलन का महापर्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जानेवाला यह महापर्व शिवरात्रि ,,
साधकों को इच्छित फल, धन, सौभाग्य, समृद्धि, संतान व आरोग्यता देनेवाला है।

महाशिवरात्रि 2017 :-

वर्ष 2017 में महाशिवरात्रि का व्रत 24 फरवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा।
महाशिवरात्रि कथा :-
वैसे तो इस महापर्व के बारे में कई पौराणिक कथाएं मान्य हैं, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार इसी पावन तिथि की महानिशा में भगवान भोलेनाथ का निराकार स्वरूप प्रतीक लिंग का पूजन सर्वप्रथम ब्रह्मा और भगवान विष्णु के द्वारा हुआ, जिस कारण यह तिथि शिवरात्रि के नाम से विख्यात हुई। महा शिवरात्रि पर भगवान शंकर का रूप जहां प्रलयकाल में संहारक है वहीं उनके प्रिय भक्तगणों के लिए कल्याणकारी और मनोवांछित फल प्रदायक भी है।

महाशिवरात्रि व्रत विधि :-
महाशिवरात्रि व्रत में उपवास का बड़ा महत्व होता है। इस दिन शिव भक्त शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करते हैं और रात्रि में जागरण करते हैं। भक्तगणों द्वारा लिंग पूजा में बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास और रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है।
पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भोलेनाथ की शादी मां शक्ति के संग हुई थी, जिस कारण भक्तों के द्वारा रात्रि के समय भगवान शिव की बारात निकाली जाती है। इस पावन दिवस पर शिवलिंग का विधि पूर्वक अभिषेक करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है। महा शिवरात्रि के अवसर पर रात्रि जागरण करने वाले भक्तों को शिव नाम, पंचाक्षर मंत्र अथवा शिव स्त्रोत का आश्रय लेकर अपने जागरण को सफल करना चाहिए।
महाशिवरात्रि 2017 :-
फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार को श्रवण नक्षत्र वरीयान योग में अति शुभ एवं सबके लिए अति दुर्लभ एवं शुभद संयोग:-

शिव यानि कल्याणकारी, शिव यानि बाबा भोलेनाथ, शिव यानि शिवशंकर, शिवशम्भू, शिवजी, नीलकंठ, रूद्र आदि। हिंदू देवी-देवताओं में भगवान शिव शंकर सबसे लोकप्रिय देवता हैं, वे देवों के देव महादेव हैं तो असुरों के राजा भी उनके उपासक रहे। आज भी दुनिया भर में हिंदू धर्म के मानने वालों के लिये भगवान शिव पूज्य हैं।
इनकी लोकप्रियता का कारण है इनकी सरलता। इनकी पूजा आराधना की विधि बहुत सरल मानी जाती है। माना जाता है कि शिव को यदि सच्चे मन से याद कर लिया जाये तो शिव प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा में भी ज्यादा ताम-झाम की जरुरत नहीं होती। ये केवल जलाभिषेक, बिल्वपत्रों को चढ़ाने और रात्रि भर इनका जागरण करने मात्र स भगवान शिव
(आशुतोष) प्रसन्न हो जाते हैं।
वैसे तो हर सप्ताह शुक्रवार और सोमवार को दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है। हर महीने में मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन साल में शिवरात्रि का मुख्य पर्व जिसे व्यापक रुप से देश भर में मनाया जाता है दो बार आता है। एक फाल्गुन के महीने में तो दूसरा श्रावण मास में।
फाल्गुन के महीने की शिवरात्रि को ही महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु कावड़ के जरिये गंगाजल भी लेकर आते हैं जिससे भगवान शिव को स्नान करवाया जाता हैं।

महाशिवरात्रि पर्व तिथि व मुहूर्त 2017 :-
24 फरवरी शुक्रवार के प्रथम पूजन – प्रातः 4 से 6 तक ।
द्वितीय पूजन :- प्रातः 7 से 9 तक

तृतीय मुहूर्त :- 10 से 12 तक ।

प्रदोष मुहूर्त :- सायं 5 से 7 बजे तक ।
निशिथ काल पूजा- रात्रि 11:30 से से 2 बजे तक ।
पारण का समय- प्रातः  06:54 से 11:30 ताज
के (25 फरवरी) को ।

चतुर्दशी तिथि आरंभ- रात्रि 8:32 से (24 फरवरी) को
चतुर्दशी तिथि समाप्त- रात्रि 8:42 (25 फरवरी) को

देवों के देव महादेव के विशेष आराधना का महा पर्व , महाशिवरात्रि :-

देवों के देव महादेव भगवान शिव-शंभू, भोलेनाथ शंकर की आराधना, उपासना का त्यौहार है महाशिवरात्रि। वैसे तो पूरे साल शिवरात्रि का त्यौहार दो बार आता है लेकिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अर्थात अमावस्या से एक दिन पहले तेरस चतुर्दशी का मिलन वाली रात को महाशिवरात्रि का ।महापर्व मनाया जाता है।  महाशिवरात्रि का यह पर्व इस बार 24 फरवरी शुक्रवार को मनाया जायेगा।

महाशिवरात्रि पर क्या हैं मान्यताएं :-

माना जाता है कि जब कुछ नहीं था अर्थात सृष्टि के आरंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान ब्रह्मा के शरीर भगवान शंकर रुद्र रुप में प्रकट हुए थे। कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी इसी दिन हुआ था। इसलिये महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों एवं भगवान शिव के उपासकों का एक मुख्य त्यौहार है। ऐसा भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने, व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं एवं उपासक के सभी मनोकामनाओं पूर्ण  करते हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की सेवा में दान-पुण्य करने व शिव उपासना से उपासक को मोक्ष भी मिलता है।

पौराणिक कथा :-

महाशिवरात्रि से जुड़ी हुई कई पौराणिक कथाएं भी काफी प्रचलित हैं। एक ऐसी ही प्रेरणादायक कथा है चित्रभानु की। चित्रभानु नाम का एक शिकारी था। वह जंगल के जानवरों का शिकार कर अपना भरण-पोषण करता था। उसने एक सेठ से कर्ज ले रखा था लेकिन चुका नहीं पा रहा था एक दिन सेठ ने उसे शिव मठ में बिना भोजन के बंदी बना लिया संयोगवश उस दिन महाशिवरात्रि थी लेकिन इसका चित्रभानु को जरा भी भान न था। वह तल्लीनता से शिवकथा, भजन सुनता रहा। उसके बाद सेठ का समय देखकर  शिकारी जंगल में  शिकार की खोज  निकल पड़ा। उसने एक तालाब के किनारे बिल्व वृक्ष पर अपना पड़ाव डाल दिया। उसी वृक्ष के नीचे बिल्व पत्रों से ढका हुआ एक शिवलिंग भी था। शिकार के इंतजार में वह बिल्व पत्रों को तोड़कर नीचे फेंकता रहा जो शिवलिंग पर गिरते। कुछ शिवकथा का असर कुछ अंजाने में महाशिवरात्रि के दिन वह भूखा प्यासा रहा तो उसका उपवास भी हो गया, बिल्व पत्रों के अर्पण से अंजानें में ही उससे भगवान शिव की पूजा भी हो गई इस सबसे उसका हृदय परिवर्तन हो गया व एक के बाद एक अलग-अलग कारणों से मृगों पर उसने दया दिखलाई। इसके बाद वह शिकारी जीवन भी छोड़ देता है और अंत समय उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कहानी का निष्कर्ष है कि भगवान शिव शंकर इतने दयालु हैं कि उनकी दया से एक हिंसक शिकारी भी हिंसा का त्याग कर करुणा की साक्षात मूर्ति हो जाता है। कहानी का एक अन्य सार यह भी है कि नीति-नियम से चाहे न हो लेकिन सच्चे मन से साधारण तरीके से भी यदि भगावन शिव का स्मरण किया जाये, शिवकथा सुनी जाये तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उपासक के सभी सांसारिक मनोरथ पूर्ण करते हुए उसे मोक्ष प्रदान करते हैं।
महाशिवरात्रि पर्व पर कैसे करें शिव का पूजन

महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं, उपासकों की लंबी कतारें लग जाती हैं। जल अथवा दूध से श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। गंगाजल या दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से शिवलिंग को स्नान करवाया जाता है। फिर चंदन लगाकर फूल, फल, बेल के पत्ते अर्पित किये जाते हैं। धूप और दीप से भगवान शिव का पूजन किया जाता है। कुछ श्रद्धालु इस दिन उपवास भी रखते हैं। महाशिवरात्रि को रात्री जागरण भी किया जाता है। कई जगहों पर भगवान शिव का विवाह किया जाता है, उनकी बारात भी निकाली जाती है। माना जाता है कि इस दिन जरुरत मंद लोगों की मदद करनी चाहिये। गाय की सेवा करने से भी इस दिन पुण्य की प्राप्ति होती है।
कहां करें शिव का पूजन:-

वैसे तो किसी भी शिव मंदिर में भगवान शिव की आराधना की जा सकती है। लेकिन किसी निर्जन स्थान पर बने शिव मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान शिव की पूजा की जाये तो भगवान शिव शीघ्र मनोकामना पूरी करते हैं।

प्रमुख शिव मंदिर :-

नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर पर महाशिवरात्रि के दिन भक्तों का भारी जमावड़ा होता है।
इसके अलावा भारत भर में बारह स्थानों पर 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं
सोमनाथ- यह शिवलिंग गुजरात के कठियावाड़ में स्थापित है।
श्री शैल मल्लिकार्जुन- यह मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है।
महाकाल- उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग हैं माना जाता है कि यहां भगवान शिव ने दैत्यों का नाश किया था।
ओंकारेश्वर ममलेश्वर- यह मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है माना जाता है कि पर्वतराज विंध्य कठोर की तपस्या से खुश होकर वरदान देने के लिये स्वयं भगवान शिव यहां प्रकट हुये थे जिससे यहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापित हुआ।
नागेश्वर- गुजरात के द्वारकाधाम के समीप ही नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित है।
बैजनाथ- यह शिवलिंग बिहार के बैद्यनाथ धाम में स्थापित है इसे भी 12 ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है।
भीमशंकर- यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र की भीमा नदी के तट पर स्थापित है।
त्र्यंम्बकेश्वर- महाराष्ट्र के नासिक से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित है यह ज्योतिर्लिंग।
घुमेश्वर- यह ज्योतिर्लिंग भी महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित है।
केदारनाथ- हरिद्वार से करीब 150 मील की दूरी पर हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग स्थापित है।
विश्वनाथ- यह बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित है इसलिये इसे विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग कहते हैं।
रामेश्वरम्- मद्रास के त्रिचनापल्ली में समुद्र तट पर यह ज्योतिर्लिंग है। माना जाता है इसे स्वयं भगवान श्री राम ने स्थापित किया था जिस कारण इसका नाम रामेश्वरम् पड़ा।

कैसे करें महाशिवरात्रि व्रत :-

ब्रह्ममुहूर्त प्रातः 4 बजे से प्रारंभ कर रात्रि 2 बजे तक विभिन्न प्रकार करें शिव- शक्ति आराधना :-
1) विद्यार्थी एवं प्रतियोगिता परीक्षार्थियों के लिए :-

प्रातः 4 बजे से प्रातः 9 के मध्य सफेद अक्षत, सफेद तील, सफेद फूल ,  बिल्वपत्र एवं मलयागिरि चन्दन से पूजन कर शर्करा युक्त दूध से अभिषेक पूजन कर , ॐ क्लीं तत्पुरुषाय नमः ,, का एवं आदित्य हृदय स्तोत्र का  यथा संभव रात्रि तक पाठ/जप करना लाभकारी होगा ।

2) इच्छित वर/ पत्नी  प्राप्ति के लिए :-
प्रातः  9 से 11:30 के मध्य पीत पुष्प , दूर्वा , हल्दी, कमल पुष्प या कमल गट्टा , पान एवं पीत अक्षत से पूजन कर हल्दी कपूर युक्त दूध से अभिषेक कर कन्या-
ॐ ह्रीं कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधिश्वरी ।
नन्द गोप सुतं देवी पतिं
में कुरुते नमः ।
इस मंत्र का 4100, जप रात्रि तक करें । एवं वर- अर्गला स्तोत्र का 108 बार पाठ करें

3) सुख सौभाग्य एवं संतान के लिये :-
प्रातः 7 से 2:35 दिन के मध्य कनेर , गुमा, चमेली, गुलाब, और गेंदा के पुष्प ,बिल्वपत्र, इत्यादि से पूजन कर , अलग अलग  पंचामृत , से अभिषेक कर ॐ ह्रौं सर्वेश्वराय नमः ,, का जप करें । एवं देवी सूक्त का पाठ करें ।

4 ) मनोनुकूल दाम्पत्य सुख प्राप्ति के लिए :-
प्रातः 7 से सायं 4 बजे के मध्य सर्वांग पूजन पूर्वक सुगन्धित द्रव्य , इत्र, कपूर, फल रस, एवं गुलाब जल से अभिषेक कर , ॐ ह्रीं  गौरी भर्ताय नमः ,, का जप एवं कनकधारा का पाठ करें ।

5) उत्तम आयु आरोग्यता के लिए :-
प्रातः 8 बजे से सायं 5 बजे के मध्य प्रचलित पूजन सामग्री में  विशेष कर -कुशा का पुष्प, काला तील, पंचामृत, गंगाजल, तीर्थ जल, कुशोदक, एवं गुरुच रस से अभिषेक पूजन पूर्वक ॐ हौं जुं सः कालेश्वराय नमः ,, का जप या महामृत्युंजय मन्त्र का जाप एवं देवी कवच का पाठ करें ।

6) सभी मनोकामनाओं के पूर्ति के लिए :-
सायं 6 बजे से रात्रि 2 बजे तक घर या  प्रसिद्ध शिवमंदिर में सेवा दान,  पूजन , दर्शन, एवं अन्य दान करते हुवे रात्रि जागरण पूर्वक शिवतांडव एवं रात्रि सूक्त का पाठ करें ।
महाशिवरात्रि पूजन से शिव शक्ति की विशेष कृपा आप सपरिवार पर प्राप्त हो , एवं आप सब की सभी मनोकामना पूर्ण हो ,
आचार्य राधाकान्त शास्त्री, बेतिया, प.चंपारण, बिहार, भारत।radhakrishna shastri

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