शुद्ध और अच्छी हिन्दी कैसे लिखें

शुद्ध और अच्छी हिन्दी कैसे लिखें – २कारक प्रयोग और लिंग विधानकारक का सम्बन्ध क्रिया से है । यहां यह देखना है कि कारक किस रूप में कार्य करता है । उसका क्रिया से सम्बन्ध किस रूप में हुआ है । हमारे सारे कार्य, सारे व्यापार फल पाने की इच्छा से किए जाते हैं । वाक्य में प्रयुक्त ‘क्रिया’ का प्रयोग भी किसी फल या उद्देश्य की सिद्धि के लिए होता है । इस विवेचन से यह स्पष्ट है कि कारक का सम्बन्ध किसी न किसी रूप में क्रिया से होता है । दैनिक जीवन में कारक का प्रयोग आवश्यक और अनिवार्य है, क्योंकि किसी भी भाषा का कारक देश और काल की छाया में पलकर ही बड़ा होता है । हिन्दी में जिन कारकों का व्यवहार होता है, वे वाक्य रचना में प्रत्यक्ष रूप से सहायक हैं । कारक के बिना वाक्य या वाक्यों की रचना सम्भव नहीं । अतः हिन्दी भाषा लेखन में कारक का विशेष महत्व समझा जाता है ।

क्योंकि वाक्य की सीमा में कारक की स्थिति बनी रहती है ।

आइए, हम जानते हैं हिन्दी कारकों की विभक्तियों के चिन्ह और उसके प्रयोग के बारे में ।

कारक विभक्तियां÷परसर्गकर्ता नेकर्म कोकरण से, द्वारासंप्रदान को, के, लिएअपादान सेसम्बन्ध को, के, की, ना, ने, नी,   रा, रे, रीअधिकरण में, परसम्बोधन हे, हो, अजी, अहो,  अरे इत्यादिकर्ता के ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग– सकर्मक क्रिया रहने पर सामान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्णभूत, संदिग्ध भूत एवं हेतुहेतुमद् भूत में कर्ता के आगे ‘ने’ चिन्ह आता है ।

जैसे– मैंने तो आपको कभी गैर नहीं माना । (सामान्य भूत) । मैंने तो आपको कभी गैर नहीं माना है । (आ.भू.) मैंने तो आपको कभी गैर नहीं माना था । (पूर्ण भूत)मैंने तो आपको कभी गैर नहीं माना होगा । (सं. भूत)मैंने तो आप को कभी गैर नहीं माना होता । (हेतु. भूत) – सामान्यतः अकर्मक क्रिया में ‘ने’ विभक्ति नहीं लगती, किन्तु कुछ ऐसी अकर्मक क्रियाएं हैं, जैसे नहाना, थूकना, छींकना और खांसना, जिसमें ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग अवश्यमेव होता है । जैसे– आज आपने नहाया क्यों नहीं ?यहां, किसने थूका है !मैंने सर्दी के कारण छींका है । पिताजी ने जोर से खांसा था, तभी तो मम्मी अंदर चली गई ।

– संयुक्त क्रिया के सभी खंड सकर्मक रहने की स्थिति में भूतकाल में कर्ता के साथ ‘ने’ का प्रयोग होता है । जैसे– सोहन ने पक्षियों को देख लिया था । मैंने प्रश्न का उत्तर दे दिया है । – संकेत में संयुक्त क्रिया के अंत में ‘होना’ का हेतुहेतुमद् भूत रूप ‘ने’ चिन्ह के साथ भी प्रयुक्त होता है । जैसे– यदि श्याम ने पढ़ा होता तो अवश्य सफल होता ।

– प्रेरणार्थक रूप बन जाने पर सभी क्रियाएं सकर्मक हो जाती हैं और सभी प्रेरणार्थक क्रियाओं के रहने पर सामान्य, आसन्न, पूर्ण, संदिग्ध आदि भूतकालों में कर्ता के साथ ‘ने’ चिन्ह आता है, जैसे– दीपक गिरी ने सबों को हंसाया । कठिन मेहनत ने सुमन को डॉक्टर बनाया था । अच्छे अंकों ने राहुल को सम्मान दिलाया । ध्यातव्य है कि वर्तमान एवं भविष्यत् कालों में कर्ता के साथ ‘ने’ चिन्ह कभी नहीं आता है । जैसे– मैं भी वह उपन्यास पढूंगा । राम पक्षियों को पक्षी की निगाह से देखते हैं ।

– अपूर्ण भूतकाल की क्रिया रहने पर कर्ता के साथ ‘ने’ चिन्ह कभी नहीं आता जैसे– पूरी लंका जल रही थी और विभीषण भजन कर रहे थे । – ‘चुकना’ क्रिया रहने पर भूतकाल के भी कर्ता के साथ ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग नहीं होता है । जैसे– मैं भात खा चुका हूं÷था÷होता । लक्ष्मी जोशी यह संग्रह पढ़ चुकी होंगी । – ‘भूलना’ क्रिया के कर्ता के साथ ‘ने’ चिन्ह का प्रयोग नहीं होता । जैसे– वह तो भूले थे हमें, हम भी उन्हें भूल गए । – ‘लाना’ क्रिया भी अपने साथ कर्ता के ‘ने’ का निषेध करती है । लाना– ले और आना के संयोग से बनी है । चूंकि इसका अन्तिम खंड अकर्मक है, इसलिए इसका प्रयोग होने पर कर्ता में ‘ने’ चिन्ह नहीं आता है । जैसे– पिताजी बच्चों के लिए मिठाई लाए ।

क्रमश ः प्रस्तुतिः विनोदकुमार विश्वकर्मा

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