शेर,शायरी और गजल से झुम उठा नेपालगन्ज

55नेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, २०७१ फाल्गुन २३ गते ।
बाँके जिला के गुल्जारे अदब नेपालगन्ज के आयोजना में विदेशी उर्दू साहित्यकारों की जमघट में नेपालगन्ज में शेर,शायरी  और गजल वाचन किया गया ।
शेर वाचन कार्यक्रम में अमेरिका, भारत और नेपाल के उर्दू साहित्यकार, गजलकारों की जमघट में नेपालगन्ज न्यूरोड स्थित होटल स्वास्तिक में फाल्गुन २३ गते शनिवार को शेर,शायरी और गजल वाचन हुआ था ।
अमेरिका से आयें अली जनाब कदीर अहमद सिद्दीकी, भारत जिला बहराइच के जनाब गुलाम अली शाह बहराइची, जनाब असर बहराइची, जनाब मेराज शिवपुरी नानपारा, जनाब मोहम्मद नैयर बहराइची, जनाब वकील अहमद बहराइची, नेपालगन्ज के जनाब  सैय्यद अश्फाक रसूल हाशमी, जनाब मोहम्मद रशीद हयात नेपाली, गुल्जारे अदबका सचिव जनाब मो. मुस्तफा अहशन कुरैशी लगातय लोगों ने अपना अपना शैर, गजल वाचन किया था ।
कार्यक्रम में अमेरिका से आयें हुयें कदीर सिद्दीकी ने वाचन किया था …….
 एक मुद्दत से मेरी माँ नहीं सोई है “कदीर”
    सिंर्फ एक बार कहा था मुझे डर लगता है ।।
भारत जिला बहराइच नानपारा के मेराज शिवपुरी ने शैर वाचन किया था .
आपके कदमे नाज पढते ही ,
इक अजब सी विखर गयी खुश्बू ।
भारत जिला बहराइच असर बहराइची ने वाचन किया शैर…..
दुश्मन–ए– जां से दिल लगा बैठे,
    सादगी में फरेब खा बैठे ।
भारत जिला बहराइच गुलाम अली शाह बहराइची ने शैर वाचन किया था..
रोने से कोई जख्म तो अच्छा नही हुआ,
    हाँ यह हुआ कि जब्त की तौहीन हो गयी ।
मोहम्मद रशीद हयात नेपाली ने वाचन किया शैर…..
 कोई खुशी के एवज गम तलाश करता है ।
    कोई तो जख्म का मर्हम तलाश करता है ।
    ये कैसा वक्त समन्दर पे आगया यारब ।
    जो तश्नगी लिये शबनम तलाश करता है ।
नेपालगन्ज के मो. मुस्तफा अहशन कुरैशी ने वाचन किया शैर…..
 जुल्म सहना जुल्म है इसको कभी बढने न दो ।
    जिन्दगी मजलूम की होती कभी अच्छी नही ।
    जिस्म काँटों से जख्मी बहोत हो गया ।
    अब नया कुछ निजामे चमन चाहिये ।

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