शेर बहादुर देउबा या तो संशोधन करें या चुनाव स्थगित : प्रशांत झा

नई दिल्ली, २५ मई |

भारत से प्रकाशित होने वाली अंग्रेजी दैनिक द हिंदुस्तान टाइम्स के एसोसिएट एडिटर तथा नेपाल की राजनीति पर नजदिकी नजर रखने वाले विश्लेषक प्रशांत झा ने आज लिखा है कि प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने नेपाल की बहुत बड़ी समस्या को विना सुलझाये हुये अपनी इस्तीफा पेश कर दी है | क्योंकि स्थानीय चुनावों के दूसरे चरण में १४ जून को मतदान होने जा रहा है । नेपाली कांग्रेश के शेर बहादुर देउबा को अगले सप्ताह कार्यालय में आने की उम्मीद है | शेर बहादुर देउपा के आगे उन समस्या को सुलझाने की बहुत बड़ी चुनौती होगी ।
वयोवृद्ध नेता महंत ठाकुर की अगुवाई वाली नवगठित मधेशी पार्टी  ‘राष्ट्रीय जनता पार्टी’ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनाव में तबतक भाग नहीं लेंगे जब तक कोई संशोधन नहीं होता । देउबा को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही संबिधान संसोधन के लिए गंभीर प्रयास करना होगा जिसकी संभावना नहीं दिखती है ।
अगर संसोधन नही हुआ तो उन्हें चुनावों को स्थगित कर के आगे बढ़ाना होगा | अगर ऐसा नही हुआ तो देश की बहुत बड़ी शक्ति मधेशी शक्ति प्रमुख प्रक्रिया से बाहर बनी रह सकती  है | उसके बाद ऐसी स्थित बन सकती है जो पहाड़ियों और मैदानी इलाकों के बीच विभाजन को और गहरा कर सकती है |  और फिर चुनाव की वैधता के बारे में भी सवाल उठ सकता है | और मधेशियों द्वारा चुनावमें अवरोध किया जा सकता है जो की फिर हिंसा का रूप ले सकती है |
ऐसी परिदृश्य में भले ही राज्य चुनावों के माध्यम से ही आगे बढने की सोचती हो तो यह एक बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकती है | मधेश के युवा वर्ग में गुस्सा बरकरार है जो कि अलगाव सहित  क्रांतिकारी पथ तलाश सकती है । जिसका परिणाम चुनाव स्थगित भी करना पड़ सकता है |और देश में फिर अशांति आ जाएगी |

Prachanda resigns: Nepal PM sticks to word, but constitutional knot remains

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