श्री रामार्चा पूजा शुद्ध अन्त:करण से करने पर श्रद्धालुओं की इच्छित मनोकामना पूर्ण होती है।

मित्रों! आज 2018 मार्च 25 रविवार को भारत के विहार राज्य के सीतामढ़ी से 15 की मी पूर्व में अवस्थित कबरा ग्राम का भ्रमण रहा। जहाँ आज भी लोगों में धर्म,संस्कृति और परम्परा के प्रति आस्था बरकरार है। भारत में आज भी बहुत सारे ऐसे परिवार है जहाँ अपने पुत्र को ब्रतबंध अर्थात द्विज बनाने के लिए जनेउ धारण कराने से पहले रामार्चा पूजन किया जाता है। जो हमारे हिन्दू सनातन संस्कृति के षोडश संस्कार मध्ये का एक महत्वपूर्ण अंग है।
संतों का मत है कि इस महायज्ञ को करने से मनुष्य भगवद्धाम को प्राप्त करता है। साथहि मनुष्य के सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होते हैं। आचार्य प्रवर श्री भुवनेश्वर चौधरी जी ने बताया की रामार्चन पूजा में भगवान सीताराम की चार अवरणों में पूजा होती है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में जितने भी धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं उनके श्री रामार्चा पूजा श्रेष्ठ है। शुद्ध अन्त:करण से पूजा करने पर श्रद्धालु नर-नारियों की इच्छित मनोकामना पूर्ण होती है।
श्री रामार्चा पूजन की सरल विधि- सामग्री देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध। तुलसीदल, तिल, जनेऊ। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। यजमान श्री रामपदारथ झा और श्रीमती रेनू देवी द्वारा पुत्र रत्न के प्राप्ति तथा उसके ब्रतबंध के सुभ अवसर पर बड़े श्रद्धा और धूमधाम के साथ किया रामार्चा पूजा पूर्ण किया गया। आज राम नवमी के महान अवसर भी था।

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