संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा बनाम वृहत मधेशी मोर्चा

हिमालिनी डेस्क

madheshi morcha

अप्रील का महीना मधेश की राजनीति के लिए काफी उथल पुथल भरा रहा है। एक तरफ संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा सरकार में प्रमुख भूमिका निर्वाह कर रही है वहीं उसी मोर्चा के कुछ सभासदों ने मिलकर एक नयां ही मोर्चा खोल लिया है। मधेशी मोर्चा से आबद्ध पांच मधेशी पार्टियों के अध्यक्ष की अपनी मनमानी और उनके द्वारा किसी भी  पार्टी अन्य नेताओं से कोई भी राय सल्लाह नहीं लिया जाना, मंत्री होने के अलावा किसी भी अन्य नेताओं की भूमिका नगण्य रहना, सहमति और लचकता के नाम पर कोई भी समझौता करने की प्रवृति हावी होने की वजह से कुछ मधेशी सभासदों ने मिलकर वृहत मधेशी मोर्चा का गठन किया है। इस मोर्चा में सिर्फपांच दल के सभासद ही नहीं बल्कि कांग्रेस एमाले और माओवादी सहित अन्य मधेशी पार्टी सभासद भी शामिल हैं।

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इस मोर्चा के निर्माण में सक्रिय भूमिका निर्वाह करने वालों में फोरम लोकतांत्रिक के शरद सिंह भण्डारी, माओवादी के राम कुमार शर्मा, फोरम लोकतांत्रिक के ही प्रमोद गुप्ता, माओवादी के राम रिझन यादव आदि शामिल है। सिंहदरवार में दो दिनों की बैठक के बाद इस वृहत मधेशी मोर्चा में संविधान सभा में प्रतिनिधित्व करने वाले १५ दलों के सभासद सहभागी हैं। इस वृहत मधेशी मोर्चा का संयोजक फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव को बनाया गया है। इस मोर्चा ने एक १५ सदस्यीय स्टेयरिंग कमिटी बनाई है। मोर्चा के गठन से पर्ूव एक सात सदस्यीय कार्यदल भी बनाया गया था, जिसने वृहत मधेशी मोर्चा की अवधारणा भी बनाई थी। सात सूत्रीय अवधारणा के साथ गठित वृहत मधेशी मोर्चा ने साफ किया है कि पर्ूव में की गई सहमति के अनुसार यदि नए संविधान में उनकी मांग को नहीं समेटा गया तो एक बार फिर से आन्दोलन की शुरूआत की जाएगी।
बताया जा रहा है कि संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा को काउंटर देने के लिए ही वृहत मधेशी मोर्चा का गठन किया गया है। स्वायत्त मधेश प्रदेश, आत्म निर्ण्र्ााका अधिकार सहित विभिन्न समय में किए गए समझौते के कार्यान्वयन के लिए इसका गठन किए जाने की जानकारी इसमें शामिल नेताओं ने दी है। इस मोर्चा में संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा के सभी दलों के दूसरी पंक्ति के तथा असंतुष्ट नेताओं का जमावडा है। मोर्चा के गठन में सक्रिय भूमिका निर्वाह करने वाले एक नेता ने बताया कि संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा में सभी नेताओं को स्थान और सम्मान नहीं दिए जाने की वजह से ही इस वृहत मोर्चा का गठन किया गया है।
संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा पर मधेश के एजेण्डे से भटकने और सिर्फसत्ता के लिए ही निर्ण्र्ायकरने का आरोप लगाते हुए उसके विकल्प के तौर पर नए मोर्चा के गठन की बात भी कही जा रही है। इस नए मोर्चा ने मधेश के मुद्दों पर मधेश में एक बार फिर से आन्दोलन करने की बात कही है। इससे जुडे सभासदों ने जरूरत पडने पर सदन से सामूहिक इस्तीफे तक की बात कही है। मधेशी मोर्चा के पांच दल के अध्यक्ष द्वारा अपनी मनमानी करने और पार्टी निर्ण्र्ााके बिना ही खुद ही सभी निर्ण्र्ााकरने से असंतुष्ट दूसरे नेताओं तथा युवा सभासदों ने अब पार्टर्ीीहीप का उल्लंघन करके भी मधेश के मुद्दों के प्रति कडे से कडे कदम उठाने की घोषणा की है। इन नेताओं का आरोप है कि मोर्चा के पांचों अध्यक्ष और सरकार में मत्री रहे वरिष्ठ नेता खुद को मधेश का मसीहा समझने की भूल कर रहे हैं और मधेशी जनता इन्हें जल्द ही सबक सिखाएगी।
वृहत मधेशी मोर्चा के संयोजक के रूप में उभरे फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव को विजय कुमार गच्छदार के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। मधेश आन्दोलन के समय कांग्रेस छोडÞकर फोरम में शामिल हुए गच्छदार ने बाद में उपप्रधानमंत्री बनने के लिए पार्टी
विभाजन किया और माधव कुमार नेपाल की सरकार में वे उपप्रधानमंत्री भी बने। लेकिन धीरे धीरे मधेशी जनता में गच्छदार सहित मोर्चा के अन्य नेताओं के प्रति जो विश्वास घट रहा है और खुद उनकी पार्टर्ीीें जो विद्रोह के स्वर सुनाई दे रहे हैं उसका फायदा उपेन्द्र यादव को मिलने की संभावना है।
लेकिन इस वृहत मधेशी मोर्चा की शुरूआत में ही इसको दो झटके लगे हैं। जो नेता संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा से बाहर की पार्टियों से हैं वो इस नए मोर्चा को नयां विकल्प के रूप में देख रहे हैं लेकिन जो संलोममो में शामिल हैं उनका बयान कुछ और ही है। इस नए वृहत मधेशी मोर्चा के गठन में सक्रिय भूमिका निर्वाह करने वाले प्रभावशाली नेता शरद सिंह भण्डारी ने कहा है कि यह संयुक्त लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा को काउंटर देने के लिए नहीं बल्कि मोर्चा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए गठन किया गया है। भण्डारी ने साफ कहा कि एक तरफ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार से मधेश के आन्दोलन को लेकर संर्घष्ा कर रही है तो वृहत मधेशी मोर्चा सभी दल के मधेशी सभासदों को मिलाकर संविधान सभा और संसद में संर्घष्ा करेगी। इसी मोर्चे से आबद्ध तमलोपा के उपाध्यक्ष वृषेश चन्द लाल ने भी भण्डारी की बातों में सहमति जताते हुए कहा कि मोर्चा को कमजोर करने का हमारा कोई भी उद्देश्य नहीं है बल्कि मधेश की मांग को पूरा करने के लिए मोर्चा को और अधिक बल मिले इसके लिए इस वृहत मधेशी मोर्चा का गठन किया गया है।
पहले इस वृहत मधेशी मोर्चा में कांग्रेस के भी अजय द्विवेदी सरीखे मधेशी सभासद मौजूद थे। जैसे ही कांग्रेस को इस बात की भनक लगी कि उनकी पार्टी मधेश से प्रतिनिधित्व करने वाले सभासद बागी तेवर अपना सकते हैं तुरन्त उन्होंने मधेशी सभासदों को मनाने की कोशिश तेज कर दी। कांग्रेस की तरफ से मधेश के किसी भी जिले से प्रतिनिधित्व करने वाले सभासदों ने एक अलग ही नयां मोर्चा खोल दिया है। इतना ही नहीं इन कांग्रेसी सभासदों ने पार्टी लाकमान को साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी
मधेशी मुद्दों को नजरअन्दाज किया गया तो वो संविधान पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और साथ ही उत्तर दक्षिण राज्य को भी नहीं मानेंगे।

कैसे बनेगी मधेश की साझा रनीति

हिमालिनी डेस्क
इस समय जबकि मधेश के राजनीतिक दल सत्ता और सरकार के र्इद गिर्द ही घुमते दिखाए दे रहे हैं और मधेश के लिए कार्य करने वाली विभिन्न संघ संस्था, नागरिक समाज, बुद्धिजीवी पत्रकार अपने ही तरीके से अलग अलग काम कर रहे हैं तो क्या मधेश के मुद्दों पर इन सभी एक जगह एक ही मंच पर कैसे लाया जाए। इस बात को मध्येनजर करते हुए नव वर्षके दिन काठमाण्डू की शोर गुल और भीड भाड से दूर धुलीखेल में कुछ पत्रकारों की सक्रियता में एक अत्यन्त ही गोपनीय बैठक का आयोजन किया गया था। मधेशी पत्रकार समाज के अध्यक्ष मोहन कुमार सिंह, वरिष्ठ टीवी पत्रकार विमल ठाकुर और एडिर्टस एलायन्स फाँर मधेश के संयोजक पंकज दास की सक्रिय भूमिका में मधेश के कुछ राजनीतिक दलों, नागरिक समाज, बुद्धिजीवी वर्ग विभिन्न पेशा से आबद्ध विशेषज्ञों को वहां आमंत्रित किया गया था।
धुलीखेल की इस बैठक को नाम दिया गया था चिन्तन बैठक। इस चिन्तन बैठक में संविधान निर्माण में मुख्य भूमिका निर्वाह करने वाले सद्भावना पार्टर्ीीे सह अध्यक्ष लक्ष्मण लाल कर्ण्र्ाानेपाल सद्भावना पार्टर्ीीानन्दी देवी के अध्यक्ष खुशीलाल मंडल, मधेश के प्रमुख औद्योगिक नगरी वीरंगज के पर्ूव मेयर तथा तर्राई मधेश लोकतांत्रिक पार्टर्ीीे केन्द्रीय सदस्य विमल श्रीवास्तव, महिला मंच की केन्द्रीय अध्यक्ष राधा कुमारी कायस्थ, मधेश नागरिक समाज के अध्यक्ष डाँ डम्बर नारायण यादव, योजना आयोग के पर्ूव सदस्य डाँ आर डी सिंह, प्रसिद्ध वातावरण संबंधी वैज्ञानिक डाँ विमल प्रसाद गुप्ता, नेपाल आँयल निगम के पर्ूव प्रमुख दिगम्बर झा, मधेश आन्दोलन के समय वीरगंज के आन्दोलन का नेतृत्व करने वाले तथा इस समय फोरम गणतांत्रिक के शशि कपूर मियां सहित कुछ अन्य युवा और कुछ दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञों की उपस्थिति रही। पूरे दिन भर चली इस चिन्तन बैठक के दौरान सभी वक्ताओं ने इस समय मधेश में एक साझा मंच की आवश्यकता पर जोडÞ दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत में एक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया जिसमें मधेश आन्दोलन से लेकर आज की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति तक पर चर्चा की गई थी। इस दस्तावेज में लिखा गया था कि कि कैसे मधेश के मुद्दों से भटकते हुए मधेशी मोर्चा सिर्फसत्ता और सरकार के चंगुल में फंसती जा रही है। सभी ने एक स्वर में यह माना कि इतनी बडी संख्या में सरकार में उनकी उपस्थिति होने के बावजूद मधेश के किसी भी मुद्दों को पूरा नहीं किया जा सका है। एक तरफ तो मधेश विरोधी पार्टियां हमेशा किसी ना किसी बहाने मधेश और मधेशी भावनाओं के खिलाफ आग उगलते रहते हैं ऊपर से मधेशी मोर्चा के नेता हों या फिर सरकार में शामिल मंत्री की करतूतों से भी मधेशी जनता का सिर शर्म से झुकता जा रहा है। ऐसे में खबरदारी कराने और राजनीतिक दल को सचेत करने के लिए सभी को एक साथ एक ही स्वर में आवाज उठानी होगी तभी कुछ हासिल हो सकता है।
अब तक मधेश में यह होता आया है कि मधेश के मुद्दों को किसी खास राजनीतिक दल के नेतृत्व में उठाया जाता रहा है। मधेश आन्दोलन एक स्वतः स्फर्ूत घटना अवश्य थी लेकिन मधेशी जन अधिकार फोरम नेपाल के नेतृत्व में उस आन्दोलन को इतनी ऊंचाई मिली जिसका नतीजा था कि मधेशी जनता ने फोरम नेपाल को संविधान सभा के निर्वाचन में चौथी बडी पार्टर्ीीनाकर भेजा। लेकिन उसके बाद सरकार से मधेश के मुद्दों को पूरा करने के लिए कई समझौते किए गए लेकिन सभी समझौते सिर्फसत्ता में जाने के लिए बार्गेनिंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
इसलिए अब सभी नागरिक समाज, बुद्धिजीवी तथा विभिन्न पेशागत संघ संस्थाओं को मिलाकर एक सामूहिक मंच का गठन किया जाए जिससे आने वाले दिनों में मधेश के मुद्दों को सभी मिलकर उठाए। काफी विचार विमर्श और गहन छलफल के बाद मधेश महासभा का गठन किया गया। अब तक यह देखा जाता रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल या संघ संस्था चन्द लोगों की जागीर बन जाती है या फिर वह किसी निजी कंपनी की तरह काम करने लगता है और उसका उद्देश्य धरा का धरा रह जाता है। असंतुष्टि वहीं से शुरू होती है और बाद में विभाजन का कडवा दंश सभी को झेलना पडता है। इसलिए मधेश महासभा में सामूहिक नेतृत्व पर जोड दिया गया।
महासभा में सभी वरिष्ठ और बुद्धिजीवी लोगों को मिलाकर एक अध्यक्षीय सभा का गठन किया गया है जो कि मधेश के प्रति चिन्तित हों समर्पित हों और आने वाले दिनों में समाज को एक नई दिशा दे सके। अध्यक्षीय सभा के ही निर्देशन पर आने वाले दिनों में मधेश के मुद्दों से लेकर मधेश में आन्दोलन तक को आगे बढाया जाएगा। महासभा में पूरा समय देने वाले कुछ सक्रिय युवाओं को इसके सक्रिय सभा के रूप में गठन कर काम को आगे बढाया गया है। इस सक्रिय सभा में इस समय पांच लोग है और कोशिश की गई है कि इसमें मधेश के हर समुदाय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व हो। इसके बाद जिला में भी इसके संगठन विस्तार का काम किया जा रहा है।
महासभा ने वैशाख एक गते अपने गठन के ठीक आठवें दिन एक प्रतिबद्धता सभा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में करीब दो दर्जन सभासद और और करीब तीन दर्जन संघ संस्थाओं ने अपनी प्रतिबद्धता जताई और मधेश महासभा के साथ म इलकर मधेश के अधिकारों के लिए आगे बढने की प्रतिबद्धता जताई है। जल्द ही महासभा संविधान के प्रारम्भिक मसौदा आने पर उसकी समीक्षा के लिए मधेश के सभी २२ जिलों में एक समिति का गठन कर रही है जो कि अपनी राय देगी और जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। मधेश महासभा के कार्यक्रम में उपस्थित सभी सभासदों ने मधेश महासभा के साथ मिलकर मधेश के लिए होने वाले सभी आन्दोलन में अपनी सहभागिता की प्रतिबद्धता जताई है।  ±±±

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