संविधान नैतिक पतन की राह पर चलना सिखा रहा है

निर्मला यादव, नेतृ
संघीय समाजवादी फोरम
इस देश में संविधान क्या आया मानों भूचाल ही आ गया । जिसने देश को आन्तरिक अन्तद्र्वन्द्ध में धकेल दिया गया है । मधेश और मधेश की जनता दोनों ही इस संविधान में उपेक्षित हैं तो ऐसे में वहाँ की महिला इस संविधान से क्या उम्मीद कर सकती है । जहाँ तक महिला हक की बात है तो यह

निर्मला यादव, नेतृ संघीय समाजवादी फोरम

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संघीय समाजवादी फोरम

संविधान पूरी तरह से महिला विरोधी है । खासकर नागरिकता के मामले में तो संविधान ने पूरी तरह से मधेशी महिलाओं के अस्तित्व पर प्रहार ही किया गया है । महिला को तो तमाशा ही बनाया गया है । उसे यह सिखाया जा रहा है कि वो जिसके संसर्ग में है उसका नाम वो छुपाए तब उसके बच्चे को वंशज के आधार पर नागरिकता मिल जाएगी । यह स्थिति समाज में नैतिक पतन को आमंत्रित करती है । कितनी अजीब बात है कि जिस बच्चे के माता पिता दोनों सामने हैं उन्हें अंगीकृत नागरिकता मिलेगी क्योंकि पिता विदेशी है पर अगर पिता लापता है तो उसे वंशज का अधिकार दिया जाएगा । यह कानून एक वैध रिश्ते के बच्चे को अधिकार नहीं दे रहा और उस बच्चे को अधिकार दे रहा है जिसके पिता सामने नहीं है । कैसा है ये कानून ? बहुत सारी छोटी छोटी बातें हैं इस संविधान में जो छोटी होते हुए भी बहुत दोषपूर्ण है और उन पर उचित ध्यान देना नितान्त आवश्यक है । अंगीकृत नागरिकता की कसौटी पर सबसे अधिक कोइृ शोषण का शिकार हो रहा है तो वह है मधेशी मलिा । जिसे जीवनपर्यन्त दूसरे दर्जे का नागरिक बन कर जीने के लिए बाध्य करता है यह संविधान । इसके अलावा इस संविधान ने कई मामले में महिला को उसके अधिकार से वंचित कर दिया है ।

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