संविधान पर हुई सहमति में आया नाटकीय मोड ।

संविधान के विवादित विषयों पर सुबह ९ बजे ही हुई बैठक कई घण्टों तक चलने के बाद नेताओं ने इसमें सहमति का दावा किया था। प्रधानमंत्री निवास में हुई सहमति को सिंहदरबार आते आते असहमति में बदल गई। पहले मधेशी मोर्चा ने और बाद में माओवादी ने भी इसका विरोध कर दिया है।

सिंहदरबार में सभामुख के साथ बैठक के बाद जैसे ही सभी पार्टी और मधेशी मोर्चा की अलग अलग बैठक हुई उस बैठक में बालुवाटार में हुए सहमति के दावे का पोल खोल दिया। पहले तो मधेशी मोर्चा के नेताओं ने इसमें अपनी आपत्ति जताई थी बाद में माओवादी ने भी अपना विरोध जता दिया है।

इस समय माओवादी और मधेशी मोर्चा के नेताओं की एक साथ बैठक हो रही है जिसमें आगे की रणनीति के बारे में विचार विमर्श किया जा रहा है।
सिंहदरबार में जारी तीन दलों की बैठक से बाहर आए नेकपा एमाले के नेता के पी ओली ने कहा कि अब संविधान नहीं आना तय हो गया है। इसलिए दलों के बीच उसके बाद उठाए जा सकने वाले कदम के बारे में चर्चा की जा रही है। इसी बीच अन्य नेता भी सभामुख के कक्ष से बाहर निकल गए हैं। माओवादी के पोष्ट बहादुर बोगटी और देव गुरूंग ने भी संविधान नहीं बनने की बात स्पष्ट कर दी है।सिंहदरबार में जारी तीन दल और मधेशी मोर्चा की बैठक से बाहर आए एमाले के वरिष्ठ नेता के पी शर्मा ओली ने कहा कि अब संविधान जारी होने की कोई भी संभावना नहीं है। संविधान जारी नहीं होने की स्थिति में उठाए जा सकने वाले कदम के बारे में दलों के बीच बातचीत हो रही है।संविधान जारी नहीं होने की स्थिति में आगे की रणनीति तय करने के लिए इस समय माओवादी के मोहन वैद्य समूह और वृहत मधेशी मोर्चा के बीच अलग से बैठक हो रही है।
झापा मोरंग सुनसरी कैलाली तथा कंचनपुर को किस प्रदेश में रहना चाहिए इसका निर्णय जनमत संग्रह के जरिये किए जाने का प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा किए जाने के बाद मधेशी मोर्चा के नेता ने इसका विरोध किया है। मधेश के किसी भी जिलों को अलग नहीं करने और जनमत संग्रह भी ना करने की बात मधेशी मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया है।

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