संविधान ! मेरा जीवन कोरा कागज, कोरा ही रह गया…. : बिम्मी शर्मा

बिम्मी शर्मा, काठमांडू, २० सेप्टेम्बर |
एक साल पहले आज ही के दिन एक बच्चे का जन्म हुआ था । जिसका नाम उसके जन्म दाता ने “संविधान”  नाम रखा था । आज अपने पहले जन्म दिन पर यह बच्चा दौड़ने की बात तो दूर चल भी नहीं पा रहा है । यह बच्चा अपाहिज है, अपंग है पर इस के जन्मदाता सब लोगों का बता कर लोगों की आंखो पर धूल झोकां जा रहा हैं । क्योंकि इस बच्चे को उसके वास्तविक अभिभावक मधेश से दूर रखा गया है । बच्चा रो रहा है, बिलख रहा है पर इसको पालनेवाले इसको संसोधन का दूध पिला कर चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं । पर बच्चा अब कुछ ठोस खाना चाहता है ।
फोटो- विजेता

फोटो- विजेता

सभी माता, पिता अपने बच्चे को परफेक्ट और होशियार मानते है पर होता कोई नहीं । एक साल पहले इस के जनम पर देश, विदेश से अतिथि बुला कर इस का नामकरण किया गया । तब सभी ने इस बच्चे को शत प्रतिशत अच्छा और सर्व स्वीकार्य माना । पर अब यह बच्चा न बोलता है, न घिसकता है बस टुकुर, टुकुर ताकता रहता है । इस बच्चे को इलाज की जरुरत है पर इस के जनम दाता अभी भी इसकी बिमारी को नजर अंदाज कर बच्चे का जनम दिन धूमधाम से मना रहे हैं ।
बच्चा खाना चाहता है सेरेलक पर अभी तक इस को दूध पिला कर इसकी स्वाभाविक वृद्धि को रोका जा रहा है । बच्चा झूले में सोना नहीं चाहता पर उसको जबरदस्ती झूले मे सुला कर विभिन्न राजनीतिक दल व इस के नेता गण लोरी गाने में व्यस्त है । बच्चा सुनना चाहता मैथिली, भोजपूरी और अन्य आदिवासियों का स्थानीय राग पर उस को सुनाया जा रहा है यूरोपयन यूनियन का कानफोडू संगीत । बच्चा न इस संगीत में झूम पा रहा है न सो ही सकता है ।
सब बच्चे को देखने आते है उसको दुलारने के बहाने चिकोटी काट कर चले जाते हैं । बच्चा रोता है पर उस के आंसू के अंदर छूपे दर्द को कोई नहीं जान पाता । बच्चा देश में विभिन्न जातियों पर होते भेद भाव और असमानता को देख कर डरा हुआ है । जिस देश में पैदा हुए सभी नागरिक को समान अधिकार नहीं, मिलता देश को वह अपना नहीं मान पा रहे हैं । वहां पर यह बच्चा कल खुद के साथ भी बड़े होने पर यही व्यवहार होगा । यह बात कल्पना कर के ही बच्चा दहल जाता है ।
यह पूर्व नियोजित बच्चा है । इस को पैदा होने में सात साल से भी ज्यादा का वक्त लगा । बच्चे को पैदा करने में २८ अरब रुपएं से ज्यादा रकम खर्च हुआ । एक बार पहले भी पैदा होने के समय में ही इस को कोख में मारा गया था । दूसरी बार जब यह पैदा हुआ तब यह विकलांग निकला । पर कोई भी इसकी विकलागंता को स्वीकारना नहीं चाहता । सभी बस एक ही रट लगाए हुए है कि पडोसी के नजर लगाने के कारण बच्चे का विकास अच्छी तरह नहीं हुआ । इसी लिए पडोसी की नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा रहे है । पर इन को इस बात की समझ नहीं है कि  नजर पडोसी कि नहीं विभिन्न दल के तथाकथित ठालू नेता और आइएनजिओ से दान में आए हुए पैसे से लगी है ।
यह बच्चा कुपोषित है क्योंकि यह समय से पहले पैदा हो गया है । इस बच्चे के मधेश के अभिभावक चाहते थे कि पहले देश रुपी शरीर ह्ष्ट, पुष्ट हो । इस कि सभी गंदगी साफ हो तब इस बच्चे का भ्रुण देश के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाए । पर इन की सलाह और सुझाव को माना नहीं गया और असमय में दे दिया एक प्रिमैच्योर और कुपोषित बच्चे को जनम । यह बच्चा गूगां है, बोल नहीं पाता बस ताकता रहता है । और इसी को इस का सीधापन मान लिया गया ।
बच्चा चाहता है सभी उसको अपना मानें, प्यार करें, दुलराए और खिलाएं । पर सिंह दरवार के अंदर कैद यह बच्चा उन्ही के निगरानी में वहां के अधिकारियों के बीच पाला जा रहा है । बच्चा चाहता है मधेश की मिट्टी में लोटपोट होना । मधेश के कच्चे आम और मीठे बैर को खा कर बच्च बडा होना चाहता है । पर सिंह दरवार की सरकार गोली से वहां के मधेशियों को ही आम जैसा पेड से  गिरा कर खुश हो रही है । बच्चा पहाड और हिमाल भी चढ्ना चाहता है पर अपनी अपागंता के कारण चढ नहीं पा रहा है । बच्चे को संविधान नाम की वैशाखी और व्हिल चेयर की जरुरत है । पर उसकी कोई नहीं सुन रहा । बस बच्चे को गोदी मे ले, ले कर घूम कर उसकी अकर्मण्यता को और ज्यादा बढा रहे हैं ।
बच्चा सभी का अपना होना चाहता है । पर कुछ मुठ्ठी भर के लोग इसे बंदर के बच्चे की तरह अपनी छाती मे सटा कर दूसरों से अलग करवा रहे हैं । बच्चे को सामंती संस्कार दिया जा रहा है पर बच्चा जनजाति, मधेशी, मुस्लिम, लिंबु, शेर्पा, दलित और अल्प संख्यक सभी का होना चाहता है । बच्चा चाहता है सभी के हक, अधिकार उस पर स्थापित हो । सभी उसको खिलाएं, पिलाए, मना मनौव्वल करें । पर इस के लिए बच्चे कि अपागंता ठीक होनी जरुरी है । बच्चा खुद अपने पैर पर खडा हो न कि किसी देशी, विदेशी वैशाखी या किसी के दान दिए व्हिल चेयर पर ।
बच्चे के अंदर कितनी हड्डियाँ और नस है यह सभी जानना चाहते है । बच्चे का दिमाग और स्मरण शक्ति तेज हो यह भी सभी चाहते है । बच्चे का दिल अच्छी तरह धड्के, उसका मन साफ हो, वह सभी का भला चाहे और भला करे यह भी सभी चाहते है । पर बच्चे की भलाई किस में है यह कोई नहीं सोचता न जानना ही चाहता है । बच्चे को शारीरिक और मानसिक रुप से मजबुत बनाने के लिए उस को स्वाधीनता, सम्मान और भेदभाव रहित टानिक और विटामिन खिलाना जरुरी है । तभी यह संविधान नाम का बच्चा जल्दी बढेगा, चलेगा और दौडेगा और सब को अपनी बाहों में भरेगा और खुशी मनाएगा । नहीं तो कोरा कागज सिनेमा  का यह गीत गाता रहेगा जिन्दगी भर……
मेरा जीवन कोरा कागज,
कोरा ही रह गया…….. (    व्यग्ंय )
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