संविधान संशोधन की राजनीति : विनीता यादव

विनीता यादव, काठमांडू ,२६ दिसिम्बर |
मधेश जनविद्रोह से लकेर आजतक सरकार और मधेशी मोर्चे के बीच जितने समझौते हुए हैं, उनमें से थोड़े ही सही सरकार द्वारा लाए गए संविधान संशोधन के प्रस्ताव सकारात्मक दिखता है । मधेशी, आदिवासी जनजाति, दलित, मुस्लिम आदि समुदायों के लिए आशा की किरण लेकर आई है । नेपाल मल्ल शासन, राणा शासन, शाह वंशीय शासन तथा पंचायती प्रजातन्त्र को पार करते हुए आज संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रात्मक देश कहलाने का गौरव प्राप्त किया है । यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है । इससे सम्पूर्ण देश वासियों को गौरवांवित होना चाहिए ।
विनिता यादव

विनिता यादव

पिछले वर्ष तत्कालीन प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने मधेश केन्द्रित दलों की सहमति के बगैर संविधान जारी किया । जबकि यह संविधान मधेशी, आदिवासी जनजाति, दलित, मुस्लिम आदि समुदायों की भावना के विपरीत है । इसलिए संविधान जारी होने के दूसरे दिन से ही आन्दोलन की तैयारी शुरु कर दी । यहाँ तक की संविधान को जलाया भी गया । दो–दो बार आन्दोलन हुए । आन्दोलन के क्रम में ६२ मधेशी सपूत शहीद हुए और हजारों मधेशी घायल भी हुए । इतना होने पर भी प्रधानमन्त्री ओली ने मधेशियों की मांगे पूरी करने के बजाय दमन ही किये । मधेशियों की मांगे पूरी नहीं होने पर ओली सरकार को गिरायी गई और माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के नेतृत्व में सरकार बनी । सत्ता के कुछ महीने बाद मधेशियों की मांगे पूरी करने और संविधान क्रियान्वित हेतु प्रधानमन्त्री दाहाल ने संविधान संशोधन के दर्ता प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है । यह स्वागतयोग्य कदम होते हुए भी इसमें संशोधन की आवश्यकता है ।
दुनिया जानती है कि नेपाल के अन्दर मधेश भू–भाग है । और हम यह नहीं चाहते हैं कि मधेश नेपाल से अलग हो । सीमांकन के संबंध में मेरा मानना है कि नेपाल में १० प्रदेश होना चाहिए और उनमें से दो प्रदेश मधेश में होना चाहिए । हमारी लड़ाई भी इसी मुद्दे पर है । लेकिन मधेशियों की मांगें पूरी न हो, यह कहकर हम पर आक्षेप लगाया जाता है कि मधेशी समुदाय दक्षिण के इशारों पर नाच रहे हैं । लेकिन वैसा नहीं है । दक्षिण से जितना फायदा खस जाति के लोग उठा रहे हैं, उतना फायदा मधेश और मधेशी समुदाय नहीं ले पा रहे हैं । आक्षेप लगानेवाले भलिभांति जानते हैं कि दक्षिण से उनका रिश्ता आज से नहीं, बल्कि पौराणिक काल से ही रहा है, तो ऐसी बेतुकी दलील क्यों करते हैं ? उन्हें समझना होगा कि दक्षिण अगर खुश नहीं होते है, तो हम भी खुश नहीं रह सकते हैं । इसीलिए आक्षेप लगाने से बेहतर यही होगा कि सर्वप्रथम अपने घर को खुशहाल रखे । इसी में हम सबकी भलाई है ।
1st-news
वर्तमान में सीपीएन यूएमएल ने सवाल उठाया है कि संविधान संशोधन नहीं होना चाहिए और इएसलिए यूएमएल नेताओं ने देश भर में विरोध प्रदशेन भी कर रहे हैं । ध्यातव्य है कि युएमएल द्वारा मधेश विरोधी और संविधान संशोधन विरोधी वक्तव्य देकर नेपाल को दो ध्रुवों में बांट दिया है, जो नेपाल के हित विपरीत है । इसी प्रसंग में यूएमएल को यह स्मरण करना जरुरी है कि महाभारत में पांडू ने कौरवों से सिर्फ पाँच गांव मांगा था, लेकिन अन्तिम समय में कौरवों में कोई शासन करने के लिए नहीं रहा ।
दूसार सवाल उठता है देश में चुनाव करवाने के संबंध में । संविधान संशोधन से पूर्व अगर चुनाव कराया जाता है, तो वह मधेशियों की भावना के विपरीत सिद्ध होगा । इसीलिए पहले संविधान संशोधन हो, उसके बाद चुनाव कराया जाय । क्योंकि चुनाव लोकतन्त्र के लिए अनिवार्य और आवश्यक तत्व है ।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि दाहाल सरकार की ढेर सारी चुनौतियाँ है । हालांकि, मोर्चा का विरोध संविधान को लेकर है, इसलिए उचित यही है कि सरकार यूएमल की बजाय उसकी मांगों पर संवेदनशील होकर गौर करे ।
(विनीता यादव तराई–मधेश सद्भावना पार्टी नेपाल के कार्य सम्पादन समिति सदस्य तथा महिला विभाग प्रमुखहैं)
Loading...

Leave a Reply

1 Comment on "संविधान संशोधन की राजनीति : विनीता यादव"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
wpDiscuz
%d bloggers like this: