संविधान संशोधन के लिये नई रणनीति बनायेगी राजपा : केशव झा






केशव झा, महासचिव, राजपा नेपाल, काठमांडू | राजपा नेपाल चुनाव में जाएँगें या नहीं इस विषय पर राजपा नेपाल को एक धारणा बनाने जरुरत है । राजपा का चुनाव में न जाने का कोई एजेन्डा नहीं था ।
हम लोगों की पहले भी बातें होती थी तो कहा था कि संशोधन करनें के लिए दों तिहाई नहीं पहुँच रहा है तो संशोधन के अलावा जो भी माँग हैं , शहीद घोषणा करना, मुद्दा वापस करना, क्षतिपुर्ति देना और आन्दोलन के दौरान अपाहिज हुए व्यक्तियों का जीवन पर्यन्त सरकार द्वारा भरण पोषण आदि मांगों को पूरा करके चला जाए ।
उस के बाद संविधान संशोधन के लिए प्रदेश और केन्द्र के चुनाव से पहले एक समझदारी होती है कि संविधान संशोधन करनें का तो हम लोग अभी संविधान संशोधन के बगैर भी आगे चलनें के लिए तैयार हैं ।

इसी विषय पर सरकार के साथ वार्ता और सहमति भी हुई थी । लेकिन सरकार नें इस काम में रुचि नहीं दिखाई । सरकार इस पर ध्यान हटाकर चितवन महानगरपालिका के चुनाव में लग गई । इसी वजह से हमलोग उस वक्त निर्वाचन भाग नहीं ले पाए ।
हमलोग अभी भी कह रहे हैं कि यथास्थिति में चुनाव में राजपा भाग नही लेगी । हमलोगों के चुनाव लड़ने वाले नेता पर मुद्दा लगा हुआ है और वो सब जेल में हैं । एैसी अवस्था में निर्वाचन में हम लोग कैसे भाग लेंगें । इस बात को सरकार के सामने हमनें स्पष्ट रुप से रखा है । बुधवार को इस विषय पर प्रधानमंत्री समक्ष बातचीत हुुआ हैं । सरकार के साथ हुई बातचीत के दरमियान हमने कहा कि संविधान संशोधन के अलावा जो मुद्दा है जो मंत्रीपरिषद से पूरा हो सकता हैं उसे दो तीन रोज में समाधान करें । उस के बाद राजपा निर्वाचन के बारे में अपनी धारणा स्पष्ट करेगी । इस मामले में अध्यक्ष मण्डल के बीच विचार विर्मश जारी हैं ।
सरकार यदि तत्काल संविधान संशोधन के अलावा अन्य माँगों को सम्बोधन करती है तो राजपा निर्वाचन में जाने के लिए सकारात्मक है ।

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संविधान संशोधन बटमलाइन
संविधान संशोधन राजपा की बटमलाईन था । हमने कहा था कि अगर संविधान का संशोधन नहीं होता है तो इसके कार्यान्वयन के किसी भी गतिविधि में भाग नहीं लेंगे । इस बात की चर्चा हमने बार बार की । जैसे ही सरकार संशोधन बाहेक के मुद्दा को सम्बोधन करती हैं तो उस के बाद संविधान संशोधन पर राजपा नई रणनीति बनाकर संशोधन के लिए दबाव डालेंगे । क्योंकि प्रचण्ड सरकार में भी तीन बुँदे समझदारी हुई थी । इस सरकार के साथ भी ३ बुँदे समझदारी हुई है और संशोधन पर इतना जोर डाल रहे थें कि दूसरी माँग भी पूरी नहीं हो पा रही है ।
इसलिए अभी राजपा की रणनीति क्या है कि संविधान संशोधन के अलावा मुद्दा सम्बोधन हो जाए फिर संशोधन के विषय में एक रणनीति बनाया जाएगा । मान लीजिए कि इस संसद संविधान का संशोधन होने के स्थिति नहीं होती हैं तो फिर हम लोग किस हिसाब से आगे के राजनीति की रणनीति बनाएँगें । मुद्दा को सम्बोधन करानें के लिए भी एक सशक्त संगठन की जरुरत हैं । इस बीच क्या प्रचार किया गया कि निर्वाचन आन्दोलन का बाधक हैं जो कि एकदम गलत बात हैं । निर्वाचन भी शक्ति संचय करनें का एक माध्यम हैं । जो कुछ हमारें सहायक हैं वो बाधक के रुप में प्रचार प्रसार ज्यादा करते हैं । इसलिए अब सरकार क्या निर्णय लेती हैं उस हिसाब से राजपा अपन िआगे की रणनीति तय करेंगें और निर्वाचन में जाने के लिए राजपा सकारात्मक रुप से ठोस निर्णय करेगी ।

निर्वाचन बहिष्कार का असर क्या हुआ ?
संशोधन के अलावा  जो मागें थी वो पुरा करने के लिए कहे थे पर नहीं किया । लेकिन अभी के समय में संशोधन  के अलावा मागों को  सम्बोधन करती है तो फिर निर्वाचन में भाग लेने का  आधार बनता  है । परिस्थिति अलग  होगी, यथास्थिति भंग होगी । हम अपनी इन  सारी मागों के लिए निर्वाचन में भाग नहीं ले रहे थे । इस दोनो कारण में से कोई एक भी पुरा होता हैं तो निर्वाचन मे जाने के लिए माहोल बनता  हैं । जबतक कल और आज में फर्क स्थिति साबित नहीं कर लेते तबतक चुनाव में भाग नहीं लेगें । सरकार यदि मुदा सम्बोधन करती हैं तो फर्क  स्थिति बनेगी और उस के बाद हम लोगों का चुनाव में जाने कि स्थिति बनती हैं और जा भी सकते हैं ।

 

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