संविधान से मधेश क्षेत्र संतुष्ट नहीं है : अम्बेदकर जयंती पर नेका सभापति देउवा

काठमान्डू, १४ अप्रील  |
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भारतीय राजदूतावास द्वारा भारतीय संविधान निर्माता डा. भीमराव अम्बेदकर की १२५वीं जन्म शताब्दी मनाई गई । काठमान्डौ स्थित होटल रेडिशन में उक्त कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नेपाली काँग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा और भारतीय राजदूत महामहिम रणजीत राय एवं हिसिला यमी की उपस्थिति थी ।
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कार्यक्रम का संचालन पीआएसी की प्रथम सचिव रुबी जसप्रीत शर्मा ने किया था । डीसीएम बिनय कुमार के स्वागत मंतव्य के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई । राजदूत महोदय ने नेपाली काँग्रेस सभापति शेरबहादुर का और आइसीसी के प्रथम सचिव आशीष सिन्हा ने हिसिला यमी को पुष्प प्रदान कर स्वागत किया । कार्यक्रम की शुरुआत  अल्हा तेरो नाम …गीत से हुई । मंतव्य के क्रम में नेपाल भारत दलित संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्वकर्मा, नया शक्ति की हिसीला यमी, पूर्व मंत्री कुल बहादुर गुरुंग आदि ने अपने अपने मंतव्य व्यक्त किए ।
मुख्य अतिथि नेका के सभापति देउवा ने डा. अम्बेदकर के सन्दर्भ में अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संविधान डा. अम्बेदकर की बुद्धिमता का परिचायक है जो आजतक कायम है । इसी क्रम में नेपाल के नवनिर्मित संविधान की चर्चा करते हुए कहा कि इस संविधान से नेपाल का मधेश क्षेत्र संतुष्ट नहीं है । इसके लिए संशोधन की आवश्यकता है जो वार्ता से ही संभव है और यह कार्य अतिशीघ्र होना चाहिए । 
राजदूत राय ने कहा कि डा. अम्बेदकर ने संविधान निर्माण का कठिन काम किया था । उन्होंने भारत के सभी वर्गों का ख्याल रख कर संविधान निर्माण की परिकल्पना की इसलिए भारत का संविधान सफल हो पाया । क्योंकि इसमें भारत के सभी नागरिकों की भावनाएँ निहित थी । उन्होंने कहा कि अम्बेदकर जिन्दगी भर छुआछूत और जातीय असमानता के विरुद्ध लड़ते रहे ।
कार्यक्रम की समाप्ति रुबी जसप्रीत शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन से हुई । कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता थी । 20160414_111752
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