संशोधन प्रस्ताव संसद में पंजीकृत

काठमान्डौ, मंसिर १४ गतेprachand-deuba

मंगलबार संध्या सरकार ने संविधान संशोधन प्रस्ताव व्यवस्थापिका–संसद में पंजीकृत किया है । प्रधानमन्त्री निवास बालुवाटार में हुए बमन्त्रिपरिषद के बैठक ने संविधान संशोधन प्रस्ताव व्यवस्थापिका–संसद में दर्ता करने का निर्णय किया था ।
आन्दोलनरत मधेसी मोर्चा की माग सम्बोधन करने के लिए सरकार ने नागरिकता, प्रादेशिक सीमांकन, समानुपातिक प्रतिनिधित्व जैसे बुँदों में संशोधन करने का प्रस्ताव दर्ता किया है ।
सरकार ने मधेसी मोर्चा की माग सम्बोधन करने के लिए पाँच नम्बर प्रदेश से पहाडी जिल हटा कर तराई केन्द्रित मात्र प्रदेश बनाने और अन्य चार विषय में संविधान संशोधन प्रस्ताव संसद में दर्ता किया है ।
प्रदेश नम्बर ५ का पहाडी जिला को प्रदेश नम्बर ४ में मिलाकर नवलपरासी के( बर्दघाट सुस्ता पश्चिम) से रुपन्देही, कपिलवस्तु, दाङ, बाँके और बर्दिया को समेट कर प्रदेश बनाने का प्रस्ताव है ।
प्रदेश–५ में रहे पहाडी जिला पाल्पा, अर्घाखाँची, गुल्मी, रुकुम (पूर्वी भाग), रोल्पा और प्यूठान जिला अब प्रदेश–४ में रहेंगे । प्रदेश–४ में अब नवलपरासी और रुकुम का पूर्वी भाग सहित अन्य १५ जिला होंगे ।
संशोधन प्रस्ताव पारित होता है तो पूर्व में सप्तरी से पर्सा तक और पश्चिम में नवलपरासी के पश्चिम भाग से बर्दिया तक तराई के जिला मात्र केन्द्रित २ प्रदेश होंगे ।
प्रदेश–५ के  विषय को लेकर प्रमुख विपक्षी एमाले लगायत दल तीव्र विरोध कर रहे हैं । किन्तु तराई केन्द्रित दो प्रदेश होने से मधेसी दलों का समर्थन की उम्मीद पर काँग्रेस और माओवादी ने यह प्रस्ताव आगे बढाया है । इस विषय पर माओवादी भीतर भी असंतुष्टि की बात सामने आ रही है ।
मधेसी मोर्चा के नेता संशोधन प्रस्ताव आगे बढने के बाद इसे सकारात्मक रुप में लेते हुए अधिक संशेधन होने की अवस्था में चुनाव तक समर्थन देने का आश्वासन दिया है । इसी आश्वासन के आधार पर सरकार ने एमाले के विरोध के बाद भी संशोधन के प्रस्ताव को दर्ता कराया है ।

इसी तरह नागरिकता में, राष्ट्रिय सभा में प्रतिनिधित्व और भाषा सम्बन्धी बिषय में भी संशोधन की बात सामने आ रही है ।
राष्ट्रिय सभा में प्रत्येक प्रदेश से महिला, दलित और अपंग अल्पसंख्यक सहित तीन, तीन और बाँकी ३५ सीट में प्रदेश की जनसंख्या के आधार में निर्वाचित होने का प्रस्ताव है । इस तरह निर्वाचित होने में प्रत्येक प्रदेश से दो दो महिला होने का प्रावधान प्रस्तावित है । ऐसा होने पर राष्ट्रीय सभा में कम से कम २१ महिला अनिवार्य निर्वाचित होंगी ।
नागारिकता के सम्बन्ध में नेपाली पुरुष के सँग विवाह करने वाली विदेशी महिला को अंगिकृत नागरिकता प्रदान किया जाएगा । नागरिकता प्राप्त करने से पहले महिला को सम्बन्धित देश की नागरिकता रद्द होने का प्रमाणपत्र पेश करना होगा ।

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