संशोधित न, हुआ विधान : गंगेश कुमार मिश्र

गंगेश कुमार मिश्र, कपिलबस्तु, २८ अक्टूबर |
संशोधित न हुआ विधान,
इस ओर नहीं ?
त्रि-दल का ध्यान।
शासन-सत्ता,
खाते भत्ता,
देश बना है, आज मसान ।
संशोधित न हुआ विधान …
सीमांकन की, बात है अटकी,
सहमति भी है, अधर में लटकी।
भूलभुलैया में भटकाता,
सत्ता-लोलुप, ठग-बेईमान।
संशोधित न हुआ विधान …
सुशील कहाँ ?, वे थे कठोर,
हक़ मार किया, अन्याय-घोर।
धृतराष्ट्र बने, स्वजन ख़ातिर;
ख़ुद खोया, निज का सम्मान।
संशोधित न हुआ विधान …
आते ही चलवाई गोली,
कहते हैं शैतान था ओली।
आँख से अंधा, काम था गंदा;
बोली-बोले ज़हर समान।
संशोधित न हुआ विधान …

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