सक्रिय होते सशस्त्र समूह::शिवशंकर मिश्रा

पिछले दिनों तर्राई के कुछ स्थानों पर हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट की घटना से यह साफ हो गया है कि निष्त्रिmय हो चुके सशस्त्र समूह फिर अपना फन उठाने लगे हैं । इन घटनाओं की प्रकृति पर गौर करें तो उनका सक्रिय होना न तो पुलिस प्रशासन, न मधेशी जनता और न ही सरकार के लिए शुभ संकेत है । विस्फोट के तरीके, उसमें प्रयोग किए गए विस्फोटक पदार्थ तथा इससे हर्ुइ क्षति से इन घिनौने कार्रवाही को आपराधिक घटना कहा जा सकता है ।
रौतहट से शुरु हर्ुइ यह विस्फोट की घटना नेपालगंज और बाद में बुटवल तक पहुँची । सभी स्थानों पर चलती हर्ुइ यात्री वाहक बस में धमाका किया गया । रौतहट के चन्द्रनिगाहपुर से गौर जा रही बस में हुए धमाके में २८ यात्री घायल हुए । इस धमाके के अगले ही दिन नेपालगंज से कोहलपुर जा रही बस में धमाके हुए । हालांकि इस धमाके में घायलों की संख्या रौतहट में हुए विस्फोट से कम ही थी लेकिन विस्फोट इतनी जबरदस्त थी कि जो घायल हुए थे, अभी तक अस्पताल में इलाज ही करवा रहे हैं । इन दो विस्फोट के बाद सरकार और प्रशासन जब तक कुछ समझ पाती तब तक अगले ही दिन बुटवल के मिलन चौक में चलती हर्ुइ माइक्रो बस में जोरदार धमाका हुआ । यह धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज आसपास के कई सौ मीटर की दूरी तक सुनी गई और उसमें सवार यात्री कुछ समझ पाते तब तक वो उसकी चपेट में आ गए और देखते ही देखते बस धू-धू कर जलने लगी । यात्री किसी तरह अपनी जान बचाकर बस से निकल पाते तब तक दो दर्जन से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हो गए । इनमें से कुछ की हालत इतनी बुरी थी कि तत्काल इलाज के लिए काठमांडू भेजा गया । तमाम कोशिशों के बावजूद एक यात्री की जान नहीं बचाई जा सकी ।
इन सभी विस्फोटों की जिम्मेवारी तर्राई में सशस्त्र संर्घष्ा का दावा कर रही जनतांत्रिक तर्राई मधेश मुक्ति पार्टर्ीीे ली । इस समूह का दावा है कि उनके नेता भवानी सिंह की पुलिस कार्रवाही में की गई हत्या के विरोध में आह्वान बन्द की अवज्ञा करने पर विस्फोट की घटना को अंजाम दिया गया । मधेश के नाम पर संर्घष्ा करने का दावा करने लगे सशस्त्र समूह द्वारा मधेशी जनता को ही लक्षित कर कराए गए, इस दुखद घटना को किसी भी कीमत पर जायज नहीं ठहराया जा सकता है । इन घटनाओं की जितनी भी निन्दा की जाए काम है ।
हालाँकि इन घटनाओं के लिए पुलिस प्रशासन भी उतना ही दोषी है । श्रृंखलाबद्ध तरीके से कराए गए इन विस्फोटों से तर्राई के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खाल कर रख दिया है । मधेश में शांति व्यवस्था कायम करने और लोगों को सुरक्षा देने में पुलिस पुरी तरह से नाकाम रही है । मधेश मुक्ति पार्टर्ीीे जिस तरह की वारदात को अंजाम दिया वह सभ्य समाज में कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है लेकिन पुलिस की मधेश विरोधी मानसिकता भी इन घटनाओं के लिए उतना ही जिम्मेवार है । निर्दोष और राजनीतिक तरीके से मधेश की लडर्Þाई लडÞ रहे लोगों को सिर्फशक के आधार पर गिरफ्तार कर उनकी गैर न्यायिक ढंग से हत्या कर देना तर्राई में आपराधिक घटनाओं को और बल दे रहा है ।
यद्यपि इन घटनाओं के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था में कर्डाई का निर्देश दिया है लेकिन सशस्त्र समूहों की समस्या का समाधान सुरक्षा व्यवस्था से नहीं बल्कि राजनीतिक तरीके से ढूँढा जाना चाहिए । सशस्त्र समूहों द्वारा फिर से शुरु किए घटनाओं के प्रति सरकार को सचेत होना चाहिए ही साथ ही सशस्त्र समूहों को भी आम मधेशी जनता को लक्षित कर जनलेवा घटना नहीं करने का आग्रह है अन्यथा जिस जनता की आजादी का दम्भ भरते हुए हथियारों की लडर्Þाई का दावा सशस्त्र समूह द्वारा किया जा रहा है । यदि वही जनता उनके विरुद्ध में खडÞे हो जाए तो उन का भी खैर नहीं है ।  mmm

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