सडक दुर्घटनाः कारण, असर और रोकथाम

डा. अजय यादव
परिचय
सडक दुर्घटना का पहला शिकार एक राह चलते आदमी का हुआ था सन् १८९९ में और फिर आजतक आते–आते सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या अनगिनत हो चुकी है– यह औद्योगिकरण के महंगे असरों में से एक है । आँकड़ों के अनुसार १९९० के दशक में मात्र ५० लाख से अधिक की जानें गई हंै और सन् २०२० तक यह बढ़ कर करीब ९० लाख से १ करोड़ लोगों की जानें सड़क दुर्घटना की वजह से जाने का आकलन किया जा रहा है, जो कि विकासशील देशों में मृत्यु को दूसरा प्रमुख कारण होगा । तथा सम्पूर्ण विश्व में तीसरा मुख्य कारण बनेगा मृत्यु का ।
यह आँकडे तो केवल मृतकों की है, जबकि इससे भी बड़ा हिस्सा है उन लोगों का, जो सड़क दुर्घटना में अपंग हो जाते हैं या किसी न किसी प्रकार प्रभावित हो सम्पूर्ण जीवन या जीवन का लम्बा समय अस्पतालों और डाक्टरों की निगरानी तथा स्वास्थ्य संस्थाओं में गुजरने को बाध्य हैं । जिससे मानसिक, व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक और राष्ट्रीय खर्च बढ़ते तो हैं ही साथ ही साथ विभिन्न प्रकार से पिछड़ापन पैदा होता है, समृद्धि रुक जाती है । अतः इस विषय पर बहस बहुत जरुरी हो चुकी है और समाज और राष्ट्र के हर स्तर से इसे कम करने का प्रयास अत्यावश्यक हो चुका है वरना बहुत देर हो जाएगी । सड़क दुर्घटनाओं के विभिन्न पहलु हैं और इसको कम करने हेतु हर पहलु का प्रयास जरुरी है– उसी में एक प्रमुख पहलु है– स्वास्थ्य सम्बन्धी जिसकी चर्चा यहाँ की जा रही है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकासशील देशों में मलेरिया और क्षयरोग जोड़ संख्या से मरते हैं ।
सड़क हादसों के प्रमुख कारण ः बहुत सारे कारणों में कुछ मुख्य कारणों की चर्चा हम यहाँ करेंगे–
१) अप्रशिक्षित चालक
नेपाल और भारत जैसे देशों में बिना किसी परीक्षा पास किए या फिर पैसे या जान–पहचान के आधार पर बहुतों को लाइसेन्स दे दिया जाता है । भ्रष्टाचार इतना अधिक फैल गया है कि आजकल जगह जगह बिचौलिया बैठे हैं, जो लाइसेन्स घर पर लाने का प्रलोभन वह भी बिना परीक्षा या किसी झन्झट के देते है । यह मानसिकता हमारे जैसे समाज में सड़क दुर्घटनाओं का बहुत बड़ा कारण है और इसकी रोकथाम सरकारी और नियमनकारी विभागों के द्वारा ही सम्भव है ।
२) शराब
दूसरा सबसे बड़ा कारण दुर्घटनाओं का है– शराब पीकर गाड़ी चलाना । ड्राइवर की शराब पीने की आदत या फिर लम्बे ड्युटी की थकान कम करने के लिए शराब पीकर गाड़ी चलाना ही इसका प्रमुख कारण है । बाहर के विकसित देशों में शराब पीकर कभी भी गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं देती है और अगर कोई पकड़ा गया तो बहुत कड़ी सजा होती है और जुर्माना भी ।
३) क्षमता से अधिक सामान का होना या पैसेन्जर का होना
नेपाल और भारत में यह बहुत आम बात है और लोगों के द्वारा भी कोई विरोध नहीं किया जाता है । सिन्डीकेट की वजह से गाडीवाले अपनी मनमानी करते हैं, जिससे पैसेन्जर को विरोध करने पर भी कोई लाभ नहीं होता । क्षमता से अधिक भार लेने से गाड़ी की इञ्जीन की समस्या, बैलेन्स करने की समस्या और चालक की लापरवाही से भयंकर दुर्घटना होती है, जो कि नेपाल में हुए पिछले माह की दुर्घटनाएं प्रमाणित करती है ।
४) खराब सड़क
सरकार कान में तेल डाले बैठी है– सड़क की अवस्था और लोगों की जानों से उसको कोई मतलव नहीं । भ्रष्ट राजनीति के चतुर खिलाड़ियों को सिवाय कमीसन और पदलोलुपता के जनता से सम्बन्धित बातों का फिक्र ही नहीं । टूटी सड़के, असुरक्षित सड़क की रेलिङ्ग, जगह–जगह गड्ढे, पतली और तंग राजमार्ग तथा अन्य सड़क– यह सब अहम कारण है सड़क दुर्घटनाओं का । सड़क की अवस्था तथा वाहन और सड़कों का अनुपात का विगड़ना भी एक प्रमुख कारण है, हादसों का जिससे बेखबर सरकार है ।
५) अन्य कारण
राह चलते लोगों की मानसिक और आँखों की स्थिति, मौसम, बच्चों की नासमझियां इत्यादि भी सड़क दुर्घटनाऔं को जन्म देती है ।
सड़क दुर्घटनाओं का स्वास्थ्य पर असर
सड़क दुर्घटनाओं के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों को चोट लगती है तथा रक्तश्राव होता है । अत्यधिक रक्तश्राव से या चोट से मृत्यु होती है लेकिन जो बच जाते हैं, वह उपचार के खर्च, अपाङ्गता और मानसिक पीड़ा से सारा जीवन लड़ते रहते है और इससे समाज और राष्ट्र पर एक नकारात्मक असर पड़ता है । व्यक्ति, परिवार, समाज और सम्पूर्ण देश को इसका भुक्तान करना होता है, इसलिए सड़क दुर्घटनाए केवल व्यक्ति से स्वयम् से ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण राज्य के प्रणाली से अन्तरसम्बन्धित है ।
सड़क दुर्घटनाओं का रोकथाम
इसके रोकथाम के लिए इसके कारणों और असर को समझना होगा और इससे सम्बन्धित राज्य के हर इकाई को इमानदारी से काम करना होगा । अतः हम इसके रोकथाम के बारे में विवेचना करेंगे और निम्नलिखित उपायों के द्वारा इसका असर कम हो सकता है ।
१) वाहन
वाहन नियमित जाँचपड़ताल, ब्रेक, लाइट, टायर का करना जरुरी है– इसमे राज्य की प्रत्यक्ष संलग्नता जरूरी है ।
हर वाहन में सीटबेल्ट और अन्य सुरक्षा सम्बन्धित सामग्री का होना और प्रयोग करना अनिवार्य होना चाहिए ।
पुरानी गाड़ियो को जो अत्यधिक असुरक्षित है तथा प्रदूषण का कारण है, उन्हें सड़क से हटाना होगा ।
२ सड़क सुधार
सडक की नियमित मर्मत तथा सम्भार जरुरी है ।
सड़क पर बनी सुरक्षा के चिन्ह तथा अन्य चिन्ह को साफ रखना और बरकरार रखना जरुरी है ।
पैदल यात्रियों के चलने का मार्ग सुरक्षित और उचित व्यवस्था करना ।
तेज चलनेवाली वाहनों और धीमे चलने वाली वाहनों का लेन अलग–अलग होना चाहिए ।
सड़क और चौराहो पर उचित लाइट की व्यवस्था और सड़क और चौराहों की उचित चौड़ाई निर्धारण करना जरुरी है ।
३) मानवीय कारक सम्बन्धी
ड्राइभिङ लाइसेन्स का वितरण कड़ाई के साथ करना, कड़ी परीक्षा लेना और न्यूनतम शैक्षिक मापदण्ड बनाकर ड्राइभर को जिम्मेवार बनाना ।
ड्राइभरों को भी विभिन्न वर्गों में विभाजित कर, विभिन्न न्यूनतम योग्यता को निर्धारित करना ।
सभी ड्राइभर्स का उचित प्रशिक्षण के बाद मात्र लाइसेन्स की प्रक्रिया में शामिल करना ।
ड्राइभिङ्ग लाइसेन्स का समय–समय पर निगरानी और नवीकरण करना ।
– शराब और अन्य मादक पदाथर्ज सेवन करनेवाले ड्राइभर्स के लाइसेन्स को दुरुत्साहित करना ।
सड़क और उससे सम्बन्धित सुरक्षित तरिको के बारे में समय–समय पर तालिम देना ।
समय–समय पर स्वास्थ्य जाँच करना ।
प्राथमिक उपचार विधियों के बारे में जानकारी तथा तालिम देना ।
ड्राइभर्स के पेशागत हकहित जैसे निश्चित समय का मापदण्ड बनाकर कड़ाई से लागू करना ।
लम्बी दूरी के गाड़ियों में दो या अधिक ड्राइभर्स की अनिवार्यता ।
४) सरकारी और कानुनी नियन्त्रण
सिट बेल्ट, हेल्मेट, स्पीड लिमिट इत्यादि का अनिवार्य नियम बनाना और कडाई से लागू करना ।
ट्राफिक नियमों को कडाई से निर्देशित और कार्यन्वयन करना ।
सड़क की नियमित मर्मत और जाँचपड़ताल करना ।
सड़क पर जानवरों या किसी प्रकार का अवरोध को पूर्णरूप से निषेध करना ।
जहाँ तहाँ पार्किङ्ग के विधि को पूर्ण रूप से निषेधकर, पार्किङ्ग व्यवस्थित करना ।
लाइसेन्स प्रक्रिया और वितरण को वैज्ञानिक और कड़ा करना और इसमें लिप्त भ्रष्टाचार को निर्मुल करना ।
वार्षिक बजट में सड़क संरचना, सम्भार पर विशेष ध्यान देना और अनिवार्य रूप से कार्यान्वयन करना ।
सड़क दुर्घटना में मृत और प्रभावित लोगों के उपचार और पुर्नवास की उचित व्यवस्था करना ।
चालकों को सही तालिम और उनके सेवा को प्रभावकारी ढंग से प्रयोग करना तथा गाड़ी मालिकों के सिन्डिकेट को पूर्ण रूप से खारिज कर प्रतिस्पर्धात्मक बजार लागू करना, जिससे कि कोई मालिक ड्राइभर का शोषण न करे और उपभोक्ताओं को कोई मजबुरी न हो, असुरक्षित यात्रा करने की । व्

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