सत्तारूढ़ दलों व्दारा बजट अध्यादेश पुन: भेजने का निर्णय,प्रचण्ड व्दारा तीन विकल्प प्रस्तुत ।

काठमांडू, १८ नवम्बर । सत्तारूढ़ दल एमाओवादी और मधेशी मोर्चा ने सर्वसम्मति से राष्ट्रपति के कार्यालय शीतल निवास में बजट अध्यादेश पुन: भेजने का निर्णय किया है ।
सत्तारूढ़ दलों की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया जबकि विपक्षी दलों के साथ राष्ट्रपति ने कह दिया था कि सहमति के बिना बजट उनके लिए अस्वीकार्य होगा । गठबंधन दलों की एक बैठक मे विपक्षी दलों के आपत्तियों के बावजूद बजट को आगे बढाने का फैसला किया है । इस बीच, प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई राष्ट्रपति निवास शितल निवास, महाराजगंज पहुँचकर नए बजट के बारे में सत्तारूढ़ दलों का निर्णय राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव को जानकारी दे दी है । उनके साथ मुख्य सचिव लिलामणी पऔडेल भी मौजूद थे । इसबिच मन्त्रीपरिषद का वैठक आज स्थगित कर दिया गया है । कल्ह पुन: चार दलों की वेठक के बाद बजेट भेजने का निर्णय किया जायगा ।

इससे पहले बजट के लिए एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड ने एकवार फिर तीन विकल्प प्रस्तुत किया था । अध्यक्ष प्रचण्ड द्वारा पेश किया गया पहला प्रस्ताव में झलनाथ खनाल के नेतृत्ववाली सरकार द्वारा लाया गया बजेट को ही निरन्तरता देने की बात थी । दूसरा प्रस्ताव में कांग्रेस द्वारा बनाया गया तथा योजना आयोग के उपाध्यक्ष व्दारा तैयार किया गया बजट को भी लाने की बात कही गयी है । इन दोनो प्रस्ताव के अतिरिक्त  तीसरा प्रस्ताव के रुप मे गत वर्ष प्रस्तुत किया गया बजट को ही निरन्तरता देने की बात उल्लेख है । आज शुवह राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव के आह्वान में शीतल निवास में हुए प्रमुख तीन दल के शीर्ष नेताओं की बैठक में प्रचण्ड द्वारा बजट लाने के लिए यह विकल्प प्रस्तुत किया गया था । लेकिन प्रचण्ड द्वारा पेश किए गए विकल्प को प्रतिपक्षी दलों ने फिर से अस्वीकार कर दिया है ।
एमाओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कोई भी प्रस्ताव में सहमति नहीं जुटने पर संविधान के मर्म अनुसार बजट के सम्पूर्ण अधिकार राष्ट्रपति को दिया जा सकता है । यह अन्तिम प्रस्ताव के सवाल में प्रतिपक्षी दलों के तरफ से कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं आया है । बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के बारे में प्रतिपक्षी दल छलफल में जुट रहे है । बैठक से बाहर जाते हुए गृहमन्त्री विजय कुमार गच्छदार ने बताया कि अब पूर्ण बजट की सम्भावना नहीं है । छलफल में कांग्रेस सभापति सुशील कोइराला, एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल लगायत सहभागी रहे थे ।
इसी तरह पूर्ण बजेट के लिए प्रतिपक्षी दलों के साथ सहमति नहीं होने के कारण सरकार ने फिर भी एक तृतीयांश बजट लाने की भी तैयारी की है । प्रतिपक्षी दलों के साथ सहमति जुटाने के लिए सरकार ने बजट को कुछ दिन के लिए रोका था । दलों के बीच हो रहे छलफल सफल नहीं होने के कारण सरकार बजट के लिए दूसरे रास्ता ढूढने लगा है । लेकिन सत्ताधारी दलों को मानना है कि अभी भी पूर्ण बजट के लिए सरकार का प्रयास जारी है ।

 

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