सन् ८ दिसेम्बर १८१६ से मधेश पर किए गए चरम विभेद का वास्तविक तथ्य : प्रदीप यादव

 सन् ८ दिसेम्बर १८१६ के बाद से मधेश और मधेशी उपर किए गए नेपाली षड़यन्त्र और चरम विभेद का वास्तविक तथ्य…

प्रदीप स्वराज यादव, लहान १, सिरहा |

षड़यन्त्र नं. १ : वि.सं. २०१४, चितवन, में “राप्ती भ्याली विकास योजना(Rv-Dv)” नतिजा : २०२७ साल में ३७,००० धर्तीपुत्र थारू मधेशियों को चितवन से भगाकर वहाँ दशगुणा पहाडी/नेपाली पहाड से लाकर बसाया गया | आज चितवन पूर्णत: नेपालियों के कब्जा में है और थारू लाचार पड़ा है |

षड़यन्त्र नं. २ : वि.सं. २०२०, “नेपाल पुनर्वास कम्पनी” का स्थापना हुआ नतिजा : * नेपाली सरकारद्वारा पहाड़ से नेपालियों को लाकर मुफ्त में अनाज, राज्य से धनकोष और सार्वजनिक जमीन देकर बसाया गया, * नई बस्तियों में उनके लिए स्कुल और अस्पताल बनवाया गया । * जिनको जमीन उपलब्ध नहीं हो सका, उनके लिए नेपाली सरकार जंगल विनास कर १,१६,५५० बिघा मधेशी जमीन उन्हें दे दिया गया।

षड़यन्त्र नं. – ३ जमीन कब्जा पर सरकारी छुट : नतिजा : अनधिकृत् रूप में ३,५४,४०० विघा जमीन जंगल फडानी कर पहाडी लोग वैसे ही आकर बस गए, मधेशी लाचार होकर देखता ही रह गया |

षड़यन्त्र नं. – ४ पुनरवास कम्पनी खोलना और मधेशी जमीन कब्जा करना, असर : नेपालियोंद्वारा मधेश कब्जा करने के लिए मधेश भर ६ पुनर्वास कम्पनियाँ षड्यन्त्र पूर्वक खोला गया : १. झापा पुनर्वास कम्पनी २. सर्लाहि पुनर्वास कम्पनी ३. नवलपरासी पुनर्वास कम्पनी ४. ताराताल पु.क. ५. कैलाली ” ” ६. कंचनपूर पुनर्वास कम्पनी |

षड़यन्त्र नं. – ५ वन शुद्धिकरण का नाटक : नतिजा : “वन शुद्धिकरण” के नाम पर सन् १९९०(वि.सं. ०४७) तक लाखौं पहाडी/नेपालियों को जमीन दे दिया गया | नेपाली लोग बिना नियम के जंगल कटानी कर उसे बेनामी बताकर कब्जा कर लेते थे और अपना नाम करबा लेते थे। जिसका शिकार पूरव के राजवंशी लोग हुवे ।

षड़यन्त्र नं. – ६ हुलाकी राजमार्ग का बिकल्प महेन्द्र पथका निर्माण, असर : हुलाकी मार्ग आसपास मधेशियों का जमीन पहले से था, जहाँ नेपालियों को लाना और बसाना संभव नहीं था |

इस तथ्यको देखकर सरकार नें षड़यन्त्र पूर्वक पूर्व-पश्चिम राजमार्ग जंगल के बीचोबीच बनाया ताकि उसके आसपास नेपालियों का बसोबास हो और शहर बसे | नीजगढ़, बर्दीबास, लालगढ़, पथलैया, नारायणघाट, ईटहरी, बिर्तामोड़, उर्लाबारी, काकरभिट्टा, बुटवल, कोहलपुर, अतरिया आादि वही नवीन शहर है। जो राजमार्ग राणा काल में बना था वह आज भी वैसे ही है लेकिन पहाडी लोक-मार्ग आज पहाड के बिचोविच दौड़ रहा है |

कोशी सम्झौता, काली सम्झौता, गण्डक, कर्णीली जैसे नदियों के सम्झौते से आज मधेशी भूमि पानी विहीन बाँझ पड़ा है | हर अन्तराष्ट्रिय सन्धी सम्झौते से ९०% लाभ नेपालियों को ही मिलता है, बाँकी १०% दिखाने और मधेशी नेताओं को फुसलाने हेतु मधेश को भी देता है | इस तरह हम मधेशी धीरेधीरे कंगाल होते जा रहे हैं | बेघर भुमिहीन बनते जा रहे हैं | श्रोत साधन समाप्त होता जा रहा है | हम लुटते जा रहे हैं | बरवाद होते जा रहे हैं | बस, स्वतन्त्र मधेश ही है एक विकल्प…

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