सपनों में जीने वालों की कब नयी सुबह होगी ?

सपनों में जीने वालों की कब नयी सुबह होगी ?
मालिनी मिश्र ।
naya saktiसपनों को दिखाना गलत नही है, गलत है उसका कार्यान्वयन न करना । किसी ने सही कहा है कि आपका गौरव अपने देश के लिए, उसके समृद्ध होने के बाद नही आना चाहिए, वरन् आपका गौरव देश के लिए निहित होने पर देश स्वतः समृद्ध व गौरवशाली होगा । परन्तु हमारे देश में सत्ता में आये लोग जो आज कल तराई मधेश पहाड़ में सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध करिये, की नीति का पालन कर रहे हैं, रोज एक नई पार्टी रोज एक नया नारे का निर्माण हो रहा है । कुछ दिनों के बाद हर घर में एक नेता होगा । फिर कौन किसको वोट देगा ? दलितों के नाम पर वोट लेने वाले, मधेश के नाम पर वोट लेने की चाहत वाले अब ये सोचिये कि आने वाले कल में हर कोई राजा होगा तो प्रजा कौन होगा ? हमारे देश में वास्तव में हो क्या रहा है ।
सुधार करने के लिए या मानव उत्थान करने के लिए क्या यह जरुरी है कि आप किसी पार्टी से ही संबंधित हों ? सुधार नही हो रहा ऐसा नही है पर जहाँ वास्तव में जरुरत है वहाँ नही हो पा रहा है । ८ महीने पहले त्रि. वि. के केन्द्रीय पुस्तकालय की स्थिति को देखकर सोचा था कि शायद भूकम्प प्रभावित है पर आज एक समाचार पत्र में नेपाल राष्ट्रीय पुस्तकालय की स्थिति को देखकर मन में विचार आया कि यह तो मात्र एक बहाना है, बड़े नियम को सिर्फ बनाने वालों के लिए, पालन करना व करवाना कितना कठिन हो रहा है । मालपोत कार्यालय जाइये, जनता त्रस्त है । मजे कि बात सरकार स्वयं भी त्रस्त है कुछ दिनों पहले कि बात है , पता चला कि प्रधानमंत्री के कार्यालय का नक्शा पास नही है । पूछे जाने पर जवाब मिला (झ्याउ) मतलब बहुत परेशानी व दिक्कत का काम है । हमारे माननीय सरकारों के लिए दिक्कत का काम है तो साधारण जनता का क्या होता होगा ।
हमारे विशिष्ट नेता जनों को अभी नया मुद्दा मिला है मधेश और संविधान, दूसरा आरक्षण । यहाँ बसने वाले हर एक जाति को आरक्षण चाहिए । जिन्हें वास्तव में जरुरत है वह तो बोलने व विरोध की स्थिति में भी नही हैं । पहाडी इलाकों में जहां लोगों को रोजमर्रा की जिन्दगी के लिए भी जद्दोजहज का सामना करना पडता ह, उनलोगों के लिए क्या हमारी सरकार के लिए कोइ योजना है, जिसके तहत उनका विकास किया जा सके । योजना होगी भी तो पहले अधिकारी वर्ग उसका उपभोग कर लेें यहाँ युवा, वृद्ध, सभी असन्तुष्ट हैं । संतुष्टि के नाम पर सरकार कुछ दिनों के बाद संविधान दिवस मनाने वाली है ।
खास तौर पर जनता तो हर एक देश में अपने आप को पीड़ित ही समझती है पर हमारा नेपाल वास्तव में बहुत ज्यादा पीड़ित है । व्यापार चक्र में नियमानुसार गिरावट के पश्चात् उन्नति होती है पर नेपाल में उन्नति के नाम पर सिर्फ विदेशों से आया हुआ अनुदान है ।
यह तो सब को पता है कि किसी भी परिवार में यदि एकता न हो तो वो बिखर कर रह जाता है । उसी तरह किसी भी देश में क्षेत्र, प्रान्तों, गाँव शहर आदि के रुप में विभाजित देश का सूत्र जिससे वह बंधा है वह एक ही है, यह सोच कर सभी दलों को, विपक्षी हाने पर भी देश के लिए सोचना चाहिए पर यहाँ सोचने की फुर्सत किसे है ? जब तक सोचेंगे तब तक तो एक नयी पार्टी का गठन कर लेंगे । पार्टी का गठन हो तो देश के संगठन के लिए न कि विखण्डन के लिए ।naya sakti

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