सफलता की ओ बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री एक निश्चित दाये में हक ही अपनी भूमिका निर्वाह क सकते हैं। लेकिन इसी सीमित दाये में हक ही काम कने प भी देश औ जनता के लिए बहुत अच्छा होगा। प अफसोस समय सर्दर्भ से बाह के विषयों को मापदण्ड बनाक मूल्यांकन कना मुश्किल है। सिर्फएक ही आधा बनाक किसी का भी मूल्यांकन कठिन होता है।र
वर्तमान के सर्ंदर्भ में मुझे औ मेी सका के काम काज का आकलन कने का मुख्य विषय शान्ति औ संविधान है। प्रधानमंत्री का पद संभालने के दिन से ही मैंने अपने लक्ष्य औ गन्तव्य शान्ति औ संविधान को ही बनाया है। इसी से पूे देश औ जनता की भलाई होगी। शान्ति औ संविधान का काम पूा होने प मुझे भी आत्मसंतुष्टि मिलेगी। यदि यह काम नहीं होने प दूसा कोई भी काम कितना भी अच्छा होगा। इसलिए शान्ति औ संविधान को

 

पर्ूण्ाता देने के लिए मैंने सहजीकण का काम किया है। इसी के फलस् वरूप तीन दल औ मधेशी मोर्चा के बीच सात सूत्रीय ऐतिहासिक समझौता हुआ। इस समझौता से ही शान्ति प्रक्रिया औ संविधान के निर्माण के लिए अवरूद्ध ास् ता खुला इससे मैं बहुत ही संतुष्ट हूं। इस ऐतिहासिक समझौते से मुझे मेे ध्येय को पूा कने में कामयाबी मिलेगी ऐसी मैंने अपेक्षा की है। ाज्य पर्ुनर्संचना आयोग का गठन होना भी एक बडी उपलब्धि है। लडाकुओं के पर्ुनर्वर्गीकण का काम भी लगभग पूा हो गया है। इससे लोगों के मन में समायोजन के लिए जो चिन्ता थी वह भी खत्म हो गया है।
अब ६ महीनों के लिए जो संविधान सभा की समय सीमा बर्ढाई गई थी उसमें सभी द्लों के साथ मिलक संविधान निर्माण के बांकी बचे काम को पूा किया जाना है। इस बीच कुछ बातों की काफी चर्चा की गई। एक मंत्रिमंडल विस् ता के बो में औ दूसा बालकृष्ण ढुंगेल को आममाफी दिए जाने के विषय में । मंत्रिमंडल विस् ता के बो में मेी व्यक्तिगत धाणा यह है कि २७ मंत्रालयों में २० से अधिक मंत्री नहीं हना चाहिए। मैने पहले भी कुछ मंत्रालयों को एक क इसकी संख्या कम कने की बात कही थी। लेकिन जब आप संयुक्त सका या गठबन्धन सका चला हे हों तो यह सब संभव नहीं है। आपको अपने गठबन्धन दलों का ध्यान खना ही पडता है। सका को टिकाए खने के लिए कभी भी आपको ना चाहते हुए भी अपने वसूलों से समझौता कना ही पडता है। अन्य दलों के द्वाा जिसको मंत्री के रूप में भेजा जाता है प्रधानमंत्री के नाते आपका काम सिर्फशपथ ग्रहण काना ही होता है। इसलिए बाध्यतावश मंत्रिमंडल का आका बडा हो गया है। अब कांग्रेस एमाले सका में शामिल नहीं होना चाहते औ मेी अपनी ही पार्टर्ीीा एक बडा तबका इस सका के विोध में खुल क आ गया है। इस समय सका को स् िथ क शान्ति प्रक्रिया औ संविधान निर्माण के काम को पूा कना हमाा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। इसलिए मैंने अपनी व्यक्तिगत छवि को दांव प खक मंत्रिमंडल का आका इतना बडा किया है।
वैसे इस मामले को वैसे विोधी दल औ मीडिया ने जितना उछाला उतना उछालने की कोई भी आवश्यकता नहीं थी। सांसदों की संख्या का कमसे कम १० प्रतिशत मंत्री होने की अर्न्ताष्ट्रीय प्रचलन को भी देखा जाए तो उस हिसाब से मंत्रियों की संख्या कम ही है। ६०१ सांसदों के बीच में अभी जितनी मंत्रियों की संख्या है उसकी तुलना देउवा जी के समय में हे २०५ सांसदों में ४८ मंत्रियों से नहीं की जानी चाहिए।
दूसी बात बालकृष्ण ढुंगेल को आममाफी दिए जाने को लेक मीडिया से लेक विपक्षी दलों ने काफी हंगामा खडा किया था। इस विषय को जिस ढंग से उछाला गया उसे देखक मैं खुद आर्श्चर्य चकित हूं। इसका विकल्प क्या है यह सवाल भी उठता है। द्वंद्वकाल के सभी मुद्दे मुकदमों को वापस लिए जाने की बात प विस् तृत शान्ति समझौते से लेक आज तक सभी समझौते में उल्लेख है तो फि बालकृष्ण ढुंगेल के आम माफी के फैसले प इतना बवंड क्यों-  यदि पुानी बातों को कूेदा गया तो उस समय की सका की तफ से जितनी भी गम्भी गै कानूनी काम औ मानवाधिका के घो उल्लंघन का काम किया गया था उन सभी का फाईल खुल गया तो तत्कालीन सका के मंत्री औ सकाी अधिकाी को सलाखों के पीछे जाना होगा। यदि इसी तह हम आगे बढे तो शान्ति प्रक्रिया औ मेलमिलाप का काम कभी भी पूा नहीं होगा।
शान्ति औ मेलमिलाप के लिए द्वंद्वकाल के मुद्दे मुकदमों को वापस लेना ही होगा। वैसे यह प्रक्रिया माधव नेपाल की सका के समय ही शुरू हो गई थी। झलनाथ खनाल की सका के समय फाईल आगे बढाया गया था। मेी सका ने तो सिर्फउस काम को आगे बढाया है। यह सब जानते हुए भी एमाले औ कांग्रेस द्वाा जानबूझक इस मामले को तूल दिया जा हा है। वैसे यह मामला अब र्सवाेच्च में विचााधीन है इसलिए इस प अधिक चर्चा कने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति हत्या की बात की जाए तो माओवादी के बाहेक अन्य दलों के नेताओं प भी इस तह के आोप पहले भी लगते हे हैं लेकिन द्वंद्व काल में हुए घटनाओं को ाजनीतिक रूप से देखा जाना चाहिए।
सुशासन की बात प मैं अभी भी अडिग व सचेत  हूं। मंत्रिमंडल का आका बडा हो जाने से सुशासन में इसका अस पडेगा इस बात को कहना गलत है। सुशासन की बात को मैं व्यक्तिगत रूचि लेक देखता हूं। सका के बो में जनता की दृष्टिकोण क्या है इस बात को भी मैं समझने की कोशिश कता हूँ। शान्ति के बाद जनता को ाहत दिए जाने प मेा विशेष जोड हता है। बन्द पडे उद्योग को खोलने, बडे विकास निर्माण के काम की शुरूआत कने की सोच सहित काम को आगे बढाया जा हा है।र्
पर्यटन विकास के लिए तत्काल दो बडे जहाजों की खीद कने की प्रक्रिया औ लोडशेडिंग को कम कने के लिए तुन्त भात से बिजली आयात की बात को काफी आगे बढाया गया है। आर्थिक विकास  औ ाहत के लिए दर्ीघकालीन सोच के साथ आगे बढने की जरूत है औ उसी दिशा में काम को आगे बढाया जा हा है। संयुक्त सका या गठबन्धन की सका में सभी सोचे हुए काम को पूा कना काफी मुश्किलों भा चुनौती है। फि भी प्रयास जाी है।
मेे ऊप अपना निजी सचिवालय को बडा खने का भी आोप लग हा है। लेकिन वास् तविकता वैसा नहीं है। पर्ूववर्ती प्रधानमंत्रियों की तह मैं अपने व्यक्ति सगे संबंधियों को नहीं खा है। मैं चाहता तो अपनी बेटी मानूषी को भी ख सकता था। उसको तो पाँकेट खर्च का भी अभाव है। मैं अपने सचिवालय में ख क उसे पैसा दे सकता था लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। काम कने वालों को बकायदा नियुक्ति देक नियम के भीत हक ही काम में लगाया गया है। मेे सचिवालय में कोई भी व्यक्ति मेा सगा संबंधी नहीं है।
अर्न्ताष्ट्रीय शक्ति संतुलन को मिलाक आगे बढने की मान्यता में मैं विश्वास कता हूं। इसी के पणिाम स् वरूप शान्ति प्रक्रिया औ संविधान निर्माण का काम आज सकाात्मक दिशा में आगे बढा है। शान्ति औ संविधान निर्माण प्रक्रिया अर्न्ताष्ट्रीय शक्ति संतुलन में ही निर्भ है। मेा भात भ्रमण से काफी उम्मीदें बढी है। भात के साथ जो हमने दो समझौते किए हैं उससे देश के आर्थिक विकास में काफी मदत मिलेगा। चीन के प्रधानमंत्री का नेपाल भ्रमण होने जा हा है उससे भी नेपाल को काफी फायदा होने की उम्मीड है। अमेकिा ने माओवादी को आतंकवादी की सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू क दी है। ऐसे देखा जाए तो इस सका को अर्न्ताष्ट्रीय सद्भाव प्राप्त है औ इसी से शान्ति औ संविधान निर्माण प्रक्रिया को पूा कने में मदत मिल ही है।
मुझे उम्मीद है कि जल्द ही वर्तमान सका ही ाष्ट्रीय स् वरूप प्राप्त केगी। कांग्रेस औ एमाले भी इसी सका में सहभागी होंगे। शान्ति औ संविधान पूा कने तक यही सका टिकी हेगी। इसी महीने के अन्त तक मेे नेतृत्व में ाष्ट्रीय स्रका बनेगी। इसमें ना तो किसी भी प्रका की द्विविधा है औ ना ही कोई विवाद है। शान्ति प्रक्रिया का काम पूा हो जाने के बाद सका नेतृत्व जिम्बेवाी को बाी बाी से सभी दलों को दिया जा सकता है।  ±±±
-प्रधानमन्त्री भर्ट्टाई के द्वाा कार्तिक २९ गते अपने निवास बालुवाटा में पत्रकाों के साथ की गई बातचीत का मुख्य अंश)

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