सफल चुनाव के संदेश : जनता संविधानसभा और संविधान के पक्ष में

mahendra rai yadav कुमार सच्चिदानन्द, १९नोवेम्बर। सारी अनिश्चितताओं को झुठलाते हुए द्वितीय संविधान सभा का निर्वाचन र्नििर्वघ्न समाप्त हो गया । आतंक और विरोध के माहौल की सृजना के बावजूद ७० प्रतिशत मतदान का तथ्य चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किया गया । कहीं–कहीं यह मतदान औसत सीमा को भी लाँघ गयी । मतदान की यह प्रवृत्ति उस जन–उत्साह का द्योतक है जो संविधान सभा के पक्ष में जाहिर हुआ है । इसके लिए चुनाव आयोग धन्यवाद का पात्र है जिसने एक हद तक शांत, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराने में सफलता पायी और एक तरह से राजनैतिक दलों को यह संदेश भी दिया कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अगर हम काम करते हैं तो सफलता निश्चित है । राजनीति तो होनी चाहिए मगर राष्ट्र–कल्याण और जन–कल्याण की शर्तो पर नहीं । ध्न्यवाद के पात्र हैं वे दल जिन्होंने चुनाव के पक्ष में वातावरण् बनाया और इसमें अपनी सहभागिता दी । धन्यवाद के पात्र हैं वे दल भी जिन्होंने अपने प्रखर और हिंसक विरोध के कारण इस चुनाव को निष्कंटक नहीं रहने दिया, लेकिन इस चुनाव की सफलता से यह संदेश गया ही कि इस देश की जनता भेड़–बकरियाँ नहीं हैं जिसे जब चाहा, जिधर भी हाँक दिया, उसका अपना वजूद है जिसकी रक्षा के लिए वे आगे आ सकते हैं । यह सच है इस संविधानसभा के निर्वाचन के बाद विभिन्न दलों और प्रत्याशियों के भाग्य मतपेटिकाओं में कैद हैं । समग्र रूप में किसी दल विशेष के समर्थन और विरोध में पूरे देश में कोई लहर नहीं देखी गयी । इसलिए हार–जीत तो फिलहाल समय के गर्भ में है, लेकिन इस निर्वाचन में व्यापक जनसहभागिता यह बयान करती है कि जनता संविधानसभा और संविधान के पक्ष में है । परिणाम चाहै जैसा भी हो, संविधान देश को चाहिए और कसौटी पर अगर वे खड़े नहीं उतरते तो उन्हें व्यापक जन–असंतोष का सामना करना पड़ सकता है, इसका स्वरूप आन्दोलन का भी हो सकता है ।

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