सब पढे सब आगे बढे
डा. प्रीत अरोडा

शिक्षा एक ऐसा अमूल्य धन है जिसे कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में प्राप्त करके धनवान बन सकता है। परन्तु विडÞम्बना यह है कि आज भारत की भावी पीढÞी ही इस अधिकार से वंचित हो रही है। शैक्षणिक क्षेत्र के अर्न्तर्गत र्सव शिक्षा अभियान चलाकर सभी को शिक्षित होने का अधिकार दिया जाता है। इसके अर्न्तर्गत प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास किया जाता है। परन्तु क्या सही मायनों में यह प्रयास र्सार्थक सिद्ध हो रहा है – कहने को तो सारे भारतवर्षमें ११ नवम्बर को शिक्षा-दिवस भी मनाया जाता है। शिक्षा-दिवस हम इसलिए मनाते हैं क्योंकि इस दिन भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्मदिन होता है। मौलाना आजाद भी जब एक छात्र थे तब उन्होंने खूब मन लगाकर पढर्Þाई की। पढÞने-लिखने में वे ऐसे होनहार थे कि ग्यारह-बारह साल की छोटी-उम्र में वे अपने से दोगुनी उम्र के लोगों के शिक्षक बन गए। वे बाद में पत्रकार बने, फिर देश की आजादी की लडर्Þाई में महात्मा गाँधी के साथी बने और जब देश आजाद हुआ तो उन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में एक ऐसे भारत का सपना देखा जहाँ हर नागरिक पढÞा-लिखा हो।र्
र्सव शिक्षा अभियान को लागू करने और शिक्षा-दिवस को मनाने के बावजूद भी बाल-जीवन अशिक्षित रहकर जीवन जीने को मजबूर है। चूंकि समाज के उस निम्न वर्ग पर किसी की नजर जाती ही नहीं जिसकी उनको सबसे ज्यादा जरूरत है। आज जरूरत है कि इस दिशा में और कदम उठाएँ जाने की। जैसे कि ऐसे योग्य बच्चों को जो आर्थिक स्तर पर कमजोर होने के कारण अपनी प्रतिभा को समाज के समक्ष प्रस्तुत करने में अर्समर्थ होते हैं। सही मायनों में ऐसे बच्चों को शिक्षित करके आगे लाना चाहिए। आज अशिक्षा के कारण मासूम बच्चे बाल-अपराधी बनते जा रहे हैं और अभावग्रस्त जीवन जी रहे हैं। आज सबसे ज्यादा जरूरत है इस ओर अधिक ध्यान देने की और नए कदम उठाने की। चूंकि शिक्षा एक ऐसा जादू है जिससे हम किसी भी मनचाही वस्तु को प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षा का अर्थ है- सीखना। शिक्षा द्वारा मनुष्य में सच बोलना, अंहिसा, चोरी न करना, दूसरों के लिए प्रेम, सहानुभूति, उदारता, विनम्रता व सहनशीलता आदि जैसे गुणों का विकास होता है। शिक्षा मानव जीवन को शांत और सुखी बनाती है। यदि हम बच्चों को शिक्षा नहीं देंगे तो वे अच्छे नागरिक नहीं बनेंगे।
शिक्षा के अभाव में मनुष्य पशु के समान है और उसमेर्ंर् इष्र्या, वैर, कलह आदि के भाव पैदा हो जाते हैं। बच्चों का जीवन कच्चे घडÞे के समान होता है। हम उन्हें जैसी शिक्षा और संस्कार देंगे वे वैसे ही बन जाएंगे। इसलिए यदि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे तो ही वह अच्छे और योग्य नागरिक बनकर देश के विकास में सहायक सिद्ध होंगे। चाहे सभी बच्चों को शिक्षित करने के लिए भारत सरकार ने र्सव शिक्षा अभियान भी चलाया है ताकि देश का हर बच्चा शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार से वंचित न हो परन्तु उस में अभी और सुधार होने बांकी हैं। शिक्षा एक ऐसा धन है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता। शिक्षित व्यक्ति कभी भूखा नहीं मरता। वह कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपना जीवनयापन कुशलता से कर सकता है। अनपढÞता किसी भी देश के लिए सबसे बडÞा कलंक और अभिशाप होता है क्योंकि अनपढÞ व्यक्ति का नैतिक, मानसिक व शैक्षणिक विकास नहीं हो पाता जिसके अभाव में वह अन्धविश्वास और रूढिÞवादिता जैसी कुरीतियों में फंसता चला जाता है और लोग उसे मर्ूख समझकर ठगते हैं व उसका शोषण करते हैं। शिक्षा हमारे लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके द्वारा मनुष्य में आत्मविश्वास, आगे बढÞने की उमंग, कुछ करने का जज्बा और अपनी मंजिल को पाने की इच्छा होती है।
आज हम महात्मा गाँधी, इन्दिरा गाँधी, जवाहरलाल नहेरू आदि का नाम बहुत आदर-सम्मान से लेते हैं जिन्होंने अपनी शिक्षा द्वारा ही भारत का उचित मार्गर्-दर्शन किया है। किसी भी देश की उन्नति और विकास का आधार शिक्षा ही है। यही कारण है कि रूस, अमेरिका, जर्मनी जैसे विकसित देश विश्व में प्रथम स्थान पर हैं। शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक होता है बल्कि वह दूसरों को भी आगे बढÞने की प्रेरणा देता है, जबकि अनपढÞ व्यक्ति स्वयं तो दुखी होता ही है और वह दूसरों के लिए भी दुःख और परेशानी का कारण बनता है। शिक्षा के अभाव में मनुष्य अन्धे के समान होता है क्योंकि उसकी आँखों में ज्ञान की ज्योति नहीं होती और ज्ञान के अभाव में वह अपने भविष्य के बारे में कुछ नहीं सोच पाता और जीवन-भर दर-दर की ठोकरे खाता है।
शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। अपने देश से निरक्षरता यानी अनपढÞता को हटाने के लिए हमें प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित करना होगा। इसके लिए यदि स्वयंसेवी संस्थाएं और युवा वर्ग इस साक्षरता अभियान की बागडोर को अपने हाथों में ले लें और प्रण कर लें कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक व्यक्ति को शिक्षित करेगा तो हम अपने देश को पर्ूण्ा साक्षर बना सकेंगे। इसलिए हमें प्रौढÞ-शिक्षा मतलब बुजर्ुगाें को भी पढÞाना होगा। इसके साथ-ही-साथ जिन गाँवों और कस्बों में जहाँ स्त्रियां व गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है। उन्हें भी शिक्षा देने के लिए हमें प्रयास करने होंगे। इस तरह जब देश का प्रत्येक नागरिक शिक्षित होगा तो हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि आने वाले समय में हमारे देश में बच्चे शिवाजी, महाराणा प्रताप, जवाहरलाल नहेरू व महात्मा गाँधी के पदचिहृन पर चलकर अपने देश की उन्नति व विकास में सहायक सिद्ध होंगे।इसलिए आओं हम सब मिलकर एक नारा बुलन्द करें- सब पढÞें,आगे बढÞें।

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