सभासदों के नाम खुला –पत्र : राकेश कुमार शर्मा

माननीय ६०१ सभासद जी,
संविधान सभा भवन,
नया“ बानेश्वर, काठमाण्डौ, नेपाल

माननीय संविधान सभा के सभासदों को हार्दिक बधाई तथा शुभकामनाए  । पहले संविधान सभा से संविधान निर्माण नही हुआ दूसरा संविधान सभा से संविधान एक वर्ष में बनेगी की, आम नागरिकों में अपेक्षा रही है । दूसरा संविधान सभा के निर्वाचित, छनौट, मानोनित होना और सिफारिस जो भी प्रणाली, साम, दाम, दण्ड और भेद जो भी  तरीकों से संविधान सभा की ऐतिहासिक गरिमामय पदों में पदासिन रहे सभी लोगों को हमारे ओर से हार्दिक बधाई ज्ञापन करते है ।
साथ समय में  ही जनता की चाहना, राष्ट्र के हित, और जनहित की उन्नति, प्रगति और विकास होनेवाला संविधान की निर्माण, जनता के साथ दलों ने कबूल किया समय के अन्दर संविधान निर्माण करना सफल होने के लियें शुभकामना है ।

विगत के पहले संविधान सभा में अपना खूद अपना म्याद थपना डबल समय खर्च करके भी एक थान संविधान जनताओं को नही  दे पाया उनकी दुर्भाग्यपूर्ण रुप से अवसान हुआ । जिस के परिणाम स्वरुप आप लोग सभासद होन की सौभाग्य पाया ।
विगत के पहले संविधान सभा में जनताओं के कर और राजस्वों से उठा लगभग ४ अर्ब रुपैया“ राज्यकोष ढुकुटी दुरुपयोग हुआ था । अब के सभासदों ने राज्यकोष ढुकुटी दुरुपयोग नही होगा आशा भी रक्खा हू“ ।

सभासदों की न्वारन (नामकरण, छठियार) किया दिन स्मरण हो । वि.सं. २०७० साल मंसीर ०४ गते सम्पन्न हुआ , दूसरा संविधान सभा निर्वाचन में विजय होकर  गयें  प्रत्यक्ष तर्फ के सभासदों, समानुपातिक तर्फ के सभासदों और मनोनित हुने सभासदों को  अन्य बादों याद हो या न हो, यह बातें एक वर्ष तक ही स्मरण है या नही कि, बि.स. २०७० साल मंसीर ०९ गते दूसरे  संविधान सभा निर्वाचन को मैं न्वारन (नामकरण, छठियार) हो चुका है । नामकरण के नाम “सभासदों को पद ” रहा है । सभासदों ने भीे  एक वर्ष में संविधान बनाएगें कहकर जनताओं के समक्ष वाचा कियें थे । वाचा की ख्याल करना कहरक अनुरोध करते है ।

पहले संविधान सभा विघटन होने की अन्तिम क्षण और अवस्था में सभासदों ने संविधान सभा भवन की घेराव किया, सिंहदरबार घेरा, नाराबाजी करना और नारायणकाजी श्रेष्ठ के आ“ख से धर धर आ“शु गिरना । नाटक जैसे क्रियाकलापों सभासदों से हुआ था ।

दूसरा संविधान सभा की निर्वाचन में बडे बडे शीर्ष मसौंदा निर्णायक तह के नेताओ को दबाव (उचभककगचभ) देने हो सभासदों ने शुरु से ही करना । २०६२÷०६३ की जनआन्दोलन पश्चात उथलपुथल करा के राष्ट्र को निकास न देना , सभी दिन  अनिर्णय की बन्दी बना के रक्खा शीर्ष नेताओं ने निकास न देने तक सभासदें ने निर्णायक तह के शीर्ष नेताए“ रिसोर्ट , फाइफ स्टार, थ्रीस्टार होटल गयें रिसोर्ट और होटल में घेरा डाले, घर में घेरा डालियें संविधान निर्माण को अलग रखकर केवल उद्घाटन करने की काम ,पार्टी का काम , अपने मुलुक भितर और बाह्य मुलुक भ्रमण जाने लगे तो एयरपोर्ट में घेरा डालियें, सिंहदरबार में बैंठक बैंठे , निकास न देनें तक सिंहदरबार के भितर ही बन्द कर दिजिए तथा संविधान सभा भवन में बैंठक बैठें है तो , निकास न देनें तक संविधान सभा  भवन के खन्दर ही बन्द करके रखियें , जिधर भी निकले जायें और तो भी बन्द करदें उन लोगों को मत छोडियें । घेरा डाल्ने की काम करेगें और बन्द करके रक्खेगें तब उसके बाद अवश्य ही निकास आएगा सभासदों, प्रधानमन्त्री , गृहमन्त्री और मन्त्रीयों ने जनताओं की कर और राजस्व से भत्ता खाकर घुमफिर और एैस आराम करना पा रहे है । संविधान निर्माण के नामों पर बारम्बार राज्यकोष ढुकुटी फोकट में दुरुपयोग करना नही मिलेगी ।

इतिहासकै लामो समय वि.सं. २०५२ साल देखि आज सम्म राष्ट्र संक्रमणकाल बाट गुज्रीरहेको अवस्था छ । शीर्ष नेताहरुले गर्दा राष्ट्रले निकास र समयमा (एक वर्ष पछि) संविधान निर्माण हुन सकेन भनेर सभासदहरुले पहिलो संविधान सभा जस्तै पुनः दोस्रो संविधान सभामा अन्तिम अवस्थामा चिच्याई, रोईकराई, अाँशु झारेर नाटक , जात्रा देखाउन र दोष दिन उपयुक्त हुने छैन ।

Constituent Assembly of Nepalयदि अब भी राष्ट्र ने निकास नही पाया और समय एक वर्ष के बाद संविधान निर्माण नही हुआ तो , उस के बाद संविधान मै खुद घोषणा करेगें और वि.सं.२०७१ साल माघ ९ गते एक वर्ष के बाद  मैं दुबारा  सभासद पदों के और नेताऔं का श्राद्ध करने के लियें  तयार हू“ । हम को दोष नही दे पायेगें  इस के दोषी भागीदार आप लोग  (सभासद और नेता) स्वयं होगें इस बातें अवगत या जानकारी कराना चाहते ।

वि.सं. २०६२÷०६३ की जनआन्दोलन पश्चात नेताओं शक्ति और सत्ता अपने  पक्षों में करने की दाउपेच करते रहते है । छोटी छोटी बातों में लफडा करते है । नेताओं को सही रास्ते में जाने के लियें सभासदों से दबाव सिर्जना करने की कार्य नही हो पायी  । पहले संविधान सभा भी जुयें की लडाई से करते ही विघटन हो गया ।

हमारे देश में शिक्षा, आर्थिक, सामाजिक उन्नति की सोच, जनता की समृद्धि, चेतना की विकास और देश विकास कर सके ऐसा कोई भी नही है ऐसी अवस्था में जनताओं में निराशा पैदा हुई अब देश सञ्चालन करने की राष्ट्र ठेक्का ९ऋयलतचबअत०, करार९ीभबकभ० और भाडा ९ाबचभ० में टेन्डर आह्वान करके अन्र्तराष्ट्रीय मुलुक को  देगें  की नही ?

हम और हमारीे स्वाभिमान को रक्षा करने के लियें देश की अव्यवस्था और जनता में निराशापन हुआ इस को अब कौन हटाए“ ? किस की दायित्व, कर्तव्य और जवाफदेहिता में बातचीत करें ?

स्वतन्त्र नेपाली नागरिक ,  राकेश कुमार शर्मा    मोबाईल नं. ९८४८०५५७७६

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